Kiske Pair Chuna chahiye: सनातन परंपरा में अपने बड़ों से मिलते ही उनके प्रति आदर या सम्मान को प्रदर्शित करने के लिए चरण स्पर्श की परंपरा पौराणिक काल से चली आ रही है. दरअसल, अपनों से बड़ों के पैर छूना सिर्फ अभिवादन का हिस्सा भर नहीं है, बल्कि यह शिष्टाचार और संस्कार है जो सनातन परंपरा से जुड़ा हुआ है. इस संस्कार या फिर कहें शिष्टाचार में जहां पैर छूने वाला व्यक्ति अपने अहंकार को मिटाकर दूसरे प्रति अपनी श्रद्धा और विश्वास को प्रस्तुत करता है तो वहीं पैर छूने पर जब दूसरा व्यक्ति अपने आशीर्वाद के साथ सकारात्मक ऊर्जा और मंगलकामनाएं प्रदान करता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि पैर छूने का भी एक नियम होता है? यदि नहीं तो आइए इसे विस्तार से जानते और समझते हैं.
कब-कब पैर छूना चाहिए

- हिंदू मान्यता के अनुसार अपने से बड़ों के पैर हमेशा सुबह उठने से पहले और सोते समय छूना चाहिए. मान्यता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम भी अपने माता-पिता के पैर प्रात:काल उठते ही छूकर आशीर्वाद लिया करते थे.
- सामान्य रूप से परिवार में अपने से बड़े व्यक्ति को मिलने पर उनका अभिवादन करने के लिए भी पैर छूने की परंपरा है.
- हिंदू धर्म में किसी यात्रा पर निकलते समय, किसी शुभ या महत्वपूर्ण कार्य को प्रारंभ करते समय या फिर उसके पूरे हो जाने पर अपने से बड़ों का पैर छूने की परंपरा है.
- हिंदू मान्यता के अनुसार तीज-त्योहार, व्रत, पूजा आदि के बाद अपने से बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लेने की परंपरा है.
- हिंदू धर्म में परीक्षा-प्रतियोगिता के लिए निकलते समय भी अपने से बड़ों का आशीर्वाद लेने की परंपरा है.
पैर छूने की सनातनी विधि

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हिंदू मान्यता के अनुसार अपने से बड़े और पूजनीय व्यक्ति के चरण हमेशा विनम्रता के साथ कमर को झुकाकर स्पर्श करना चाहिए. हिंदू मान्यता के अनुसार हमेशा दांए हाथ से दायां पैर और बाएं हाथ से बायां पैर छूना चाहिए. सनातन परंपरा में वैसे तीन तरह से पैर छूने की परंपरा चली आ रही है. जिसमें पहली परंपरा में व्यक्ति कमर को झुकाकर दूसरे के पैर को स्पर्श करता है तो वहीं दूसरी परंपरा में वह घुटने के बल पर बैठकर पैर छूता है तो वहीं तीसरी परंपरा दंडवत प्रणाम करने की है, जिसमें व्यक्ति साष्टांग प्रणाम करता है.
किसे पैर नहीं छूने देना चाहिए
हिंदू मान्यता के अनुसार कन्या को देवी का स्वरूप माना गया है, ऐसे में कभी भूलकर भी कन्या को पैर नहीं छूने देना चाहिए, बल्कि स्वयं उनके पैर छूना चाहिए. इसी प्रकार भांजे-भांजियों को भी अपने पैर नहीं छूने देना चाहिए.
किन लोगों के पैर नहीं छूने चाहिए?
- हिंदू मान्यता के अनुसार लेटे हुए व्यक्ति या फिर बीमार व्यक्ति का कभी भी पैर नहीं छूना चाहिए.
- हिंदू मान्यता के अनुसार किसी भी सन्यासी को अपने गुरु या फिर अपने से वरिष्ठ संत को छोड़कर किसी का भी पैर नहीं छूना चाहिए.
- हिंदू मान्यता के अनुसार यदि कोई व्यक्ति ईश्वर की पूजा कर रहा हो तो उसके पैर नहीं छूने चाहिए.
- हिंदू मान्यता के अनुसार लेटे हुए व्यक्ति या फिर बीमार व्यक्ति का कभी भी पैर नहीं छूना चाहिए, क्योंकि हिंदू धर्म में मृत व्यक्ति के पैर लेटी हुई अवस्था में छूने का विधान है. ऐसे में लेटे हुए व्यक्ति का पैर छूना बेहद अशुभ माना जाता है.
- हिंदू मान्यता के अनुसार श्मशान में या फिर श्मशान से लौटै हुए व्यक्ति के पैर नहीं छूने चाहिए क्योंकि इस स्थान पर गया व्यक्ति अशुद्ध अवस्था में होता है.
- मान्यता है कि दामाद को अपने सास-ससुर और अपने साले-सरहज के पैर नहीं छूने चाहिए. पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव ने जब से अपने श्वसुर राजा दक्ष का सिर काटा है, तब से यह परंपरा बन गई. हालांकि यहां यह भी मान्यता जुड़ी हुई है कि विवाह के समय श्वसुर स्वयं अपने दामाद और कन्या के पैर पूजता है, इसलिए उसके पैर नहीं छूने चाहिए.
- हिंदू परंपरा में भांजे-भांजियों को भूलकर भी अपने मामा के पैर नहीं छूना चाहिए. इस परंपरा के पीछे कृष्ण और कंस की कथा को अक्सर तर्क दिया जाता है.
- हिंदू मान्यता के अनुसार मंदिर के भीतर किसी भी व्यक्ति के पैर नहीं छुए जाते हैं. मान्यता है कि ऐसा करने पर उस देवालय में विराजमान देवता का अपमान होता है. यदि आप चाहें तो वहां से निकलने के बाद व्यक्ति विशेष के पैर छू सकते हैं.
- हिंदू मान्यता के अनुसार यदि कोई व्यक्ति किसी भी कारण से अशुद्ध अवस्था में हो तो उसे देवी, देवता, गुरु आदि के पैर भूलकर भी नहीं छूने चाहिए.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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