Nirjala Ekadashi 2026: ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी के नाम से जाना जाता है. साल की 24 एकादशी तिथियों में निर्जला एकादशी को सबसे श्रेष्ठ माना गया है. इसे भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं. ज्योतिष पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि की शुरुआत 24 जून को शाम 6 बजकर 13 मिनट पर हो गई है. वहीं, इसका समापन आज शाम 8 बजकर 10 मिनट पर होगा. ऐसे में निर्जला एकादशी का व्रत आज यानी 25 जून को रखा जा रहा है.
निर्जला एकादशी पर किन परिस्थितियों में पी सकते हैं पानी?
निर्जला एकादशी व्रत में सूर्योदय से द्वादशी के सूर्योदय तक जल नहीं पीने का विधान होता है और इसी कारण इसे निर्जला एकादशी कहते हैं. इसी कड़ी में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि निर्जला एकादशी में किन-किन परिस्थिति में पानी पी सकते हैं. इसकी आचार्य मदनमोहन ने NDTV से बातचीत के दौरान दी है.
- आचार्य मदनमोहन बताते हैं कि अगर आपने एकादशी का व्रत रखा है और बहुत ज्यादा प्यास लग रही है, तो आप थोड़ा-सा पानी पी सकते हैं ताकि गला तर रहे.
- गर्भवती महिलाओं को व्रत के दौरान पानी या दूध पीते रहना चाहिए, ताकि उन्हें कोई परेशानी न हो और व्रत का फल भी मिल सके.
- जो लोग बीमार हैं और पूरा व्रत नहीं रख सकते, वे उस दिन अन्न का त्याग करके फल खा सकते हैं, इससे भी उन्हें व्रत का फल मिले.
आचार्य मदनमोहन ने बताया कि अगर आप इन तीनों स्थितियों (प्यास, गर्भावस्था, बीमारी) में नहीं आते हैं, तो कोशिश करें कि नियम से पूरा व्रत रखें. साथ ही जो लोग इन परिस्थितियों में हैं, वे भगवान के अनुसार पानी और फल का सेवन कर सकते हैं.
निर्जला एकादशी की कथा
निर्जला एकादशी का व्रत ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रखा जाता है. इसकी महिमा से जुड़ी एक कथा है कि भीम जी जंगल में घूमते-घूमते पूरे दिन और रात बिना कुछ खाए-पिए रहे. उन्हें भूख-प्यास लगी, फिर भी उन्होंने कुछ ग्रहण नहीं किया और भगवान का नाम लेते रहे. उस दिन एकादशी थी, इसलिए उनका यह व्रत अनजाने में ही निर्जला एकादशी के रूप में पूरा हो गया. भगवान विष्णु इससे प्रसन्न हुए और उन्होंने भीम जी को आशीर्वाद दिया कि आगे से ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी उनके नाम से जानी जाएगी, जिसे भीमसेन एकादशी कहा जाता है.
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