ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहा जाता है. ज्येष्ठ महीने में बहुत तेज गर्मी पड़ती है, फिर भी भगवान विष्णु के भक्त पूरे दिन बिना खाना और बिना पानी के व्रत रखते हैं. यह व्रत सिर्फ दिनभर नहीं, बल्कि अगले दिन द्वादशी शुरू होने के बाद ही समाप्त किया जाता है. इस साल निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून को रखा जाएगा.
1 साल में चौबीस एकादशी आती हैं. इनमें निर्जला एकादशी को सबसे श्रेष्ठ माना गया है. इसे भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं, क्योंकि महर्षि वेदव्यास के अनुसार भीमसेन ने इसे धारण किया था. इसी कड़ी में आज हम आपको निर्जला एकादशी व्रत की पूजा विधि, महत्व, दान के बारे में बताने जा रहे हैं. इसकी जानकारी पंडित कौशल पाण्डेय ने NDTV से बातचीत के दौरान दी है.
निर्जला एकादशी का महत्व
निर्जला एकादशी साल की सभी एकादशियों में खास मानी जाती है. मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत रखने से ही साल में आने वाली समस्त एकादशी के व्रत का फल प्राप्त होता है. इस व्रत में सूर्योदय से द्वादशी के सूर्योदय तक जल भी न पीने का विधान होने के कारण इसे निर्जला एकादशी कहते हैं. इस दिन निर्जल रहकर भगवान विष्णु की आराधना का विधान है. इस व्रत से दीर्घायु और मोक्ष की प्राप्ति होती है. जो भक्त साल की सभी चौबीस एकादशियों का उपवास करने में सक्षम नहीं है. उन्हें केवल निर्जला एकादशी का उपवास करना चाहिए, क्योंकि निर्जला एकादशी का उपवास करने से दूसरी सभी एकादशियों का लाभ मिल जाता हैं.

निर्जला एकादशी व्रत पूजा विधि
- इस व्रत में एकादशी तिथि के सूर्योदय से अगले दिन द्वादशी तिथि के सूर्योदय तक जल और भोजन ग्रहण नहीं किया जाता है.
- एकादशी के दिन सुबह स्नान के बाद सर्वप्रथम भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा करें.
- इसके बाद भगवान का ध्यान करते हुए "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें.
- इस दिन भक्ति भाव से कथा सुनना और भगवान का कीर्तन करना चाहिए.
- इस दिन व्रती को चाहिए कि वह जल से कलश भरे व सफेद वस्त्र को उस पर ढककर रखें और उस पर चीनी तथा दक्षिणा रखकर ब्राह्मण को दान दें.
- इसके बाद दान, पुण्य आदि कर इस व्रत का विधान पूर्ण होता है.
निर्जला एकादशी पर क्या दान करें
निर्जला एकादशी पर यथाशक्ति अन्न, जल, वस्त्र, आसन, जूता, छतरी, पंखी और फल आदि का दान करना चाहिए. इस दिन जल कलश का दान करने वालों श्रद्धालुओं को सालभर की एकादशियों का फल प्राप्त होता है. इस एकादशी का व्रत करने से अन्य एकादशियों पर अन्न खाने का दोष छूट जाता है और सम्पूर्ण एकादशियों के पुण्य का लाभ भी मिलता है.
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