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Muharram 2026: हज़रत क़ासिम (अ.स.) - वह नौजवान जिसने मौत को शहद से भी ज़्यादा मीठा बताया

Ndtv की स्पेशल रिपोर्ट मोहर्रम की दास्तां में अब तक आपने करबला के 72 शहीदों में अली अकबर और हजरत अब्बास की शहादत के बारे में जाना.. आइए इस कड़ी में अब एक ऐसे शहीद — हजरत कासिम अ.स. (Hazrat Qasim) के बारे में जानते हैं, जो यतीम था, लेकिन उसने अपने चाचा के लिए मौत को कबूल करना भी आसान समझा..

Muharram 2026: हज़रत क़ासिम (अ.स.) - वह नौजवान जिसने मौत को शहद से भी ज़्यादा मीठा बताया
Muharram 2026: हज़रत क़ासिम (अ.स.) की कहानी

कर्बला के मैदान में कुछ शहादतें ऐसी हैं जिन्हें याद करके आज भी दिल कांप उठता है...उनमें से एक नाम हज़रत क़ासिम इब्न हसन (अ.स.) का है.. जिनके पिता हजरत अली के बड़े बेटे इमाम हसन और मां जनाबे उम्मे फरवा थीं.. इमाम हसन की ज़हर देकर शहादत कर दी गई थी और उस वक्त उनके बेटे हजरत कासिम (Hazrat Qasim) की उम्र तकरीबन 3-4 साल थी, जबसे लेकर हजरत कासिम अपने चाचा इमाम हुसैन (Imam Hussain) की परवरिश में ही रहे.. वो अपने चाचा इमाम हुसैन को अपना इमाम और जान से ज्यादा चाहते थे..जब इमाम हुसैन (अ.स.) मदीना से निकले, तो क़ासिम (अ.स.) भी इस काफिले का हिस्सा थे. उन्हें मालूम था कि यह सफर आसान नहीं है..लेकिन उन्होंने अपने इमाम का साथ छोड़ने का कभी नहीं सोचा.

कर्बला का सफर

कर्बला पहुंचने के बाद जब 10 मोहर्रम को एक-एक करके साथी शहीद होने लगे, तो क़ासिम (अ.स.) का दिल भी मैदान में जाने के लिए बेचैन हो उठा.. वो बार बार जंग में जाने की इजाजत मांगते लेकिन उनके चाचा बार बार उन्हें मना कर देते थे..

हजरत कासिम रोते हुए अपनी मां के पास पहुंचे की मां चाचा जान मुझे इजाजत नहीं दे रहे है.. तभी मां ने हजरत कासिम के हाथ पर बंधा तावीज़ खोला जिसमें उनके पिता की वसीयत थी जिसे कहा गया था जब सबसे ज्यादा मुसीबत हो तब ये तावीज खोलना.. तभी मां ने जब ये तावीज खोला तो उसमें इमाम हसन की वसीयत थी, जिसमें लिखा था कि ऐ कासिम मैं करबला (Karbala) के मैदान में तो नहीं होगा लेकिन तुम मेरी जानिब से कुर्बान हो जाना.. और इमाम हुसैन के लिए कहा गया था कि ऐ मेरे भाई हुसैन..मेरे बेटे कासिम को मेरी तरफ से कबूल करना और इसे जंग की इजाजत दे देना..

बस वो तावीज खुलते ही मां और बेटे दोनों के चेहरे पर सुकून की मुस्कुराहट आ गई कि अब तो चाचा जान से जंग की इजाजत मिल जाएगी

बस तभी फौरन हजरत कासिम वो वसीयत लेकर चाचा इमाम हुसैन के पास पहुंचे और जैसे ही इमाम हुसैन ने वो वसीयत पढ़ी तो वो ज़ोर जोर से रोने लगे.. अपने भाई का खत पढ़ कर उन्होंने उसे सीने से लगाया.. जिसके बाद हजरत कासिम से पूछा कि मौत तुम्हारे लिए कैसी है.. तो हज़रत क़ासिम (अ.स.) ने जवाब दिया:

"चाचाजान! आपके साथ हक़ की राह में मौत मुझे शहद से भी ज़्यादा मीठी लगती है...

यह जवाब एक बच्चे का नहीं, बल्कि एक सच्चे मोमिन का था.. जो खुदा की राह के लिए.. नेक राह के लिए .हक की राह के लिए.. शहीद हो जाना आसान समझा..

एक नौजवान की बहादुरी

क़ासिम (अ.स.) मैदान में उतरे तो उनकी उम्र 13 साल की थी, लेकिन उनका हौसला आसमान से ऊंचा था..

उन्होंने दुश्मन के कई सैनिकों का मुकाबला किया और बहादुरी के ऐसे जौहर दिखाए कि दुश्मन हैरान रह गया.. लेकिन आखिरकार चारों तरफ से हमला किया गया..एक वार उनके सर पर लगा और वह घोड़े से गिर पड़े.. जिसके बाद उनके ऊपर तलवारों से हमला किया गया और आपके लाशे पर घोड़े दौड़ाए गए जिससे उनका लाशा जिंदगी में ही टुकड़े टुकड़े हो गया..

इमाम हुसैन (अ.स.) दौड़ते हुए अपने भतीजे के लाश के पास पहुंचे तो देखा उनके लाश के टुकड़े टुकड़े हुए है.. उन्होंने अपनी अबाया उतारी और कासिम के लाश के टुकड़ों को उस अबा(चादर) में रख लिया.. जैसे ही उस गठरी को लेकर इमाम हुसैन खेमों में पहुंचे तभी कोहराम मच गया.. हर एक शहीद का लाशा खेमों में आता था लेकिन कासिम का लाशा नहीं टुकड़ों में लाशा चादर में आया.. 

क़ासिम (अ.स.) हमें क्या सिखाते हैं?

- कम उम्र कभी महान बनने की रुकावट नहीं होती.
- सच्चे इमाम का साथ हर हाल में देना चाहिए.
- हक़ की राह में कुर्बानी सबसे बड़ा सम्मान है.
- ईमान उम्र नहीं, दिल की मजबूती से पहचाना जाता है..

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कर्बला की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक है हज़रत क़ासिम (अ.स.) की शहादत

एक नौजवान जिसने अपनी पूरी ज़िंदगी आगे पड़ी होने के बावजूद अपने इमाम के लिए सब कुछ कुर्बान कर दिया..

आज भी उनका नाम सुनकर यह एहसास होता है कि कर्बला सिर्फ बुज़ुर्गों की नहीं, बल्कि ऐसे नौजवानों की भी कहानी है जिन्होंने हक़ के लिए अपनी जान दे दी..

सलाम हो हज़रत क़ासिम (अ.स.) पर, जिन्होंने मौत को शहद से मीठा बताया और अपने चाचा हुसैन (अ.स.) पर अपनी जान निछावर कर दी..

करबला की दास्तां का अगला भाग हज़रत अली असग़र (अ.स.)  कर्बला का छह महीने का प्यासा शहीद होगा, जो पूरी  दास्तां का सबसे भावुक और दिल को थाम देने वाला माना जाता है..

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