Muharram 2026: इस्लामिक कैलेंडर की शुरुआत मुहर्रम के पाक महीने से होती है. मुहर्रम इस्लामिक कैलेंडर के चार पाक महीनों में से एक है, जिसके पहले 10 दिन मातम के कहलाते हैं. यह पाक महीना कर्बला की जंग और इमाम हुसैन की शहादरत की याद से जुड़ा हुआ है. इस्लामिक मान्यता के अनुसार मुहर्रम महीने में किसी भी प्रकार की कोई लड़ाई नहीं की जाती है, जबकि इसमें नेक कामों को करने पर सवाब कई गुना ज्यादा बढ़ जाता है. आइए जानते हैं कि आखिर मुहर्रम महीने की शुरुआत कब होगी?
कब से शुरू होगा मुहर्रम?
सबसे पहले तो यह जान लेना जरूरी है कि मुहर्रम कोई पर्व नहीं बल्कि इस्लामिक कैलेंडर का वो पाक महीना है जो इमाम हुसैन की शहादत से जुड़ा हुआ है. मुहर्रम महीने की शुरुआत भी ईद और बकरीद की तरह चांद के दिखने पर ही तय होती है. शिया धर्मगुरु मौलाना यासूब अब्बास के अनुसार आज रात को दिखने वाले चांद से ही मुहर्रम की तारीख तय होगी.
-
पीएम मोदी के ग्लोबल विजन से लेकर RBI गवर्नर के बड़े बयान तक, अखबारों के फ्रंट पेज पर छाया NDTV समिट -
'भारतीय दयालु, ईमानदार और बुद्धिमान होते हैं', खामेनेई ने अपने प्रतिनिधि को भारत भेजते समय क्या कहा था? -
NDTV WORLD SUMMIT 2026 : कृति सेनन को बिकिनी सीन करने में क्यों लगे 12 साल? -
ब्रिटेन के हरियाणवी मेयर तुषार कुमार ने बताया कैसे गरीबों की मदद ने जिताया चुनाव -
टैक्स सिर्फ कमाई पर लगे, पूरी रकम पर नहीं..."F&O ट्रेडर्स के नुकसान पर बोले Zerodha को-फाउंडर निखिल कामत -
जिस शशि थरूर को सुनती है पूरी दुनिया, संसद में वह किसे सुनना पसंद करते हैं? खुद खोला राज -
AI से बुलेट ट्रेन तक... अश्विनी वैष्णव ने बताया भारत का फ्यूचर प्लान -
NDTV World Summit 2026: वेजिटेरियन खिलाड़ियों को कौन सी दिक्कतें होती हैं? Savita, Neeru ने बताया -
NDTV World Summit 2026 के मंच पर भारत की 'गोल्डन गर्ल्स' ने बताया जीत का मंत्रा! | Asian Games 2026 -
NDTV World Summit 2026: Lovlina Borgohain ने बताया जीवन का सबसे बड़ा चैलेंज! क्यों लगने लगे ठहाके?
मुहर्रम में क्यों मनाया जाता है मातम

मौलाना यासूब अब्बास के अनुसार मुहर्रम महीने में मनाए जाने वाले मातम की शुरुआत इस पाक महीने के पहली रात से होती है और यह 10 दिनों तक चलता है,गौरतलब है कि इसी महीने के 10 दिनों तक यजीद ने इमाम हुसैन के अनुयायियों, महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को पानी पीने तक के लिए नहीं दिया गया और उन्हें तमाम तरह की यातनाएं दी गई थीं. जिनमें से अधिकांश इमाम हुसैन के साथ कर्बला की लड़ाई में शहीद हो गये थे. मुहर्रम महीने के दसवें दिन यौम-ए-अशूरा (Youm-e-Ashura) पड़ता है, जिसमें ताजिए निकालकर शोक मनाया जाता है, यही वो दिन है जिस दिन मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन अपने 72 साथियों के साथ भूखे प्यासे शहीद हुए थे...
इमाम हुसैन की याद में शिया मुसलमान 9 से 10 मुहर्रम तक अपने सिर पर तेल और कंघी का प्रयोग तक नहीं करते हैं. बगैर बाल और दाढ़ी बनाए हम करबला वालों की याद में गमजदा रहते हैं. शिया मुसलमान 10 मुहर्रम को फाका रखते हैं, फाका मतलब पूरे दिन भूखे प्यासा रहना बस तकरीबन 4-5 बजे यानि असर की नमाज के वक्त हम लोग फाका शिकनी यानी गम का खाना खाते है..इसी महीने में इमाम हुसैन को प्यासा शहीद किया गया था, इसलिए उनकी याद में सबीले लगती हैं. लंगर लगाकर लोगों को खाना खिलाया जाता है.
मातम के दौरान काले कपड़े क्यों पहनते हैं?
शिया धर्मगुरु मौलाना यासूब अब्बास के अनुसार मुहर्रम के दौरान काले कपड़े पहनना इमाम हुसैन के लिए शोक और संवेदना का प्रतीक है, यही कारण है कि इस दौरान हर शख्स काले वस्त्र पहनता है. काला कपड़ा जुल्म के खिलाफ आवाज है कि हम जालिम के खिलाफ और मजलूम यानि पीड़ित के साथ हैं. मान्यता है कि इमाम हुसैन की शहादत के बाद उनके परिवार के लोगों ने भी गम मनाते हुए काले रंग के कपड़े पहने
थे. मौलाना यासूब अब्बास के अनुसार यह काला कपड़ा बताता है कि हम आज भी यजीदियों के खिलाफ अपनी आवाज को बुलंद कर रहे हैं.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं