सावन का पावन महीना चल रहा है. आज सावन का दूसरा दिन है. हिंदू धर्म में ये महीना भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित माना जाता है. मान्यता है कि जो भक्त सावन में सच्ची श्रद्धा से भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करते हैं, जलाभिषेक करते हैं और सावन के सोमवार पर शिवजी के नाम का उपवास रखते हैं, भोलेनाथ उन पर अपनी विशेष कृपा बरसाते हैं. इसके अलावा इस दौरान लोग पूजा-पाठ से अलग अपने खानपान और जीवनशैली में भी कई धार्मिक नियमों का पालन करते हैं. इन्हीं परंपराओं में एक मान्यता यह भी है कि इस पूरे महीने कढ़ी नहीं खानी चाहिए. सावन में कढ़ी खाने से मनाही होती है. आइए ज्योतिषाचार्य डॉक्टर गौरव कुमार दीक्षित से जानते हैं इसका कारण-
सावन में क्यों नहीं खाते हैं कढ़ी?
ज्योतिषाचार्य डॉक्टर गौरव कुमार दीक्षित बताते हैं, धार्मिक मान्यता है कि सावन से पहले जब देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु चार महीने के लिए क्षीरसागर में शेषनाग की शैया पर योगनिद्रा (शयन मुद्रा) में चले जाते हैं, तब भोलेनाथ को शासन सत्ता सौंप दी जाती है. भोलेनाथ को सावन महीने में कच्चा दूध, दही और अन्य दुग्ध पदार्थ अर्पित किए जाते हैं. इन्हें भगवान की पूजा के लिए बेहद पवित्र माना जाता है. इसलिए इस महीने दूध और दही से बनी चीजों का सेवन निषेध बताया गया है. कढ़ी बनाने में दही का इस्तेमाल होता है, इसलिए सावन में इसे खाने की परंपरा नहीं है.
ज्योतिषाचार्य कहते हैं, सावन का महीना केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संयम, सादगी और सात्विक जीवन जीने का भी संदेश देता है. इस दौरान लोग हल्का, शुद्ध और आसानी से पचने वाला भोजन करने पर जोर देते हैं. माना जाता है कि ऐसा भोजन मन को शांत रखता है और पूजा-पाठ में एकाग्रता बढ़ाने में मदद करता है.
इससे अलग इस महीने ज्यादा खट्टे या भारी भोजन से बचने की सलाह दी जाती है. कढ़ी दही से बनती है और इसका स्वाद खट्टा होता है, इसलिए भी कई लोग धार्मिक नियमों का पालन करते हुए इसे अपने भोजन से कुछ समय के लिए अलग कर देते हैं.
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