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मंगला गौरी व्रत कितने मंगलवार करना चाहिए? मंगला गौरी व्रत कैसे किया जाता है, जानिए मंगला गौरी व्रत कथा और आरती

सावन मास का चौथा मंगला गौरी व्रत 25 अगस्त को है. यह व्रत माता पार्वती यानी गौरी को समर्पित है. चलिए आपको बताते हैं मंगला गौरी व्रत कितने मंगलवार करना चाहिए. मंगला गौरी व्रत कैसे किया जाता है, मंगला गौरी व्रत कथा और आरती.

मंगला गौरी व्रत कितने मंगलवार करना चाहिए? मंगला गौरी व्रत कैसे किया जाता है, जानिए मंगला गौरी व्रत कथा और आरती
मंगला गौरी व्रत
file photo

सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए बेहद पवित्र माना जाता है. इसी महीने आने वाले हर मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है. यह व्रत खासतौर पर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से करती हैं. सावन मास का चौथा मंगला गौरी व्रत 25 अगस्त को है. यह व्रत माता पार्वती यानी गौरी को समर्पित है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियम से माता गौरी और भगवान शिव की पूजा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और दांपत्य जीवन में प्रेम बढ़ता है. चलिए आपको बताते हैं मंगला गौरी व्रत कितने मंगलवार करना चाहिए. मंगला गौरी व्रत कैसे किया जाता है, मंगला गौरी व्रत कथा और आरती.

मंगला गौरी व्रत कितने मंगलवार करना चाहिए?

मंगला गौरी व्रत सावन महीने के सभी मंगलवारों को रखा जाता है. परंपरा के अनुसार, विवाह के बाद महिलाएं लगातार 5 वर्षों तक सावन के प्रत्येक मंगलवार यह व्रत करती हैं. हालांकि, कई महिलाएं अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार भी यह व्रत करती हैं.

मंगला गौरी व्रत कैसे किया जाता है?

  • मंगला गौरी व्रत करने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें.
  • इसके बाद पूजा स्थान पर मां गौरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें.
  • उन्हें लाल चुनरी, फूल, सुहाग का सामान, फल और मिठाई अर्पित करें.
  • इसके बाद दीपक जलाकर मां गौरी का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें.
  • पूजा के दौरान मंगला गौरी व्रत कथा का पाठ या श्रवण करना शुभ माना जाता है.
  • दिनभर उपवास रखने के बाद शाम को विधि-विधान से आरती करें और प्रसाद ग्रहण करें.

मंगला गौरी व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक धनी व्यापारी धर्मपाल का पुत्र दीर्घायु नहीं था. उसे एक श्राप मिला था. व्यापारी के पुत्र का विवाह एक ऐसी कन्या से हुआ जिसकी माता नियमित रूप से मंगला गौरी का व्रत करती थी. उस व्रत के पुण्य और प्रभाव से धर्मपाल के पुत्र को लंबी आयु का वरदान मिला. तभी से वैवाहिक सुख और संकटों से मुक्ति के लिए यह व्रत रखा जाने लगा.

मंगला गौरी आरती

जय मंगला गौरी माता, जय मंगला गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।
 उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको॥

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