महाभारत का युद्ध सिर्फ शस्त्रों और वीरता का संघर्ष नहीं था. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस युद्ध के पीछे कुछ ऐसे श्राप भी थे जिन्होंने कई बड़े योद्धाओं और पूरे वंश का भविष्य तय कर दिया. ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय बताते हैं कि महाभारत में तीन ऐसे महाश्राप बताए गए हैं जिनका असर केवल युद्ध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इतिहास की दिशा भी बदल गई.
परशुराम का श्राप बना कर्ण की हार की वजह
ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय बताते हैं कि कर्ण ने ब्राह्मण बनकर भगवान परशुराम से दिव्य अस्त्रों की शिक्षा ली थी. जब परशुराम को सच्चाई पता चली तो उन्होंने कर्ण को श्राप दिया कि सबसे कठिन समय में वह अपनी सीखी हुई विद्या भूल जाएगा. मान्यता है कि अर्जुन से अंतिम युद्ध के दौरान यही श्राप कर्ण की हार का बड़ा कारण बना.
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युधिष्ठिर ने महिलाओं को क्यों दिया श्राप?
पंडित कौशल पांडेय के मुताबिक, युद्ध खत्म होने के बाद माता कुंती ने पांडवों को बताया कि कर्ण उनके बड़े भाई थे. यह जानकर युधिष्ठिर बेहद दुखी हुए. पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी पीड़ा में उन्होंने श्राप दिया कि महिलाएं कोई भी बात लंबे समय तक अपने मन में छिपाकर नहीं रख पाएंगी. इस मान्यता को आज भी कई लोककथाओं से जोड़कर देखा जाता है.
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गांधारी के श्राप से हुआ यदुवंश का अंत
ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय बताते हैं कि अपने 100 पुत्रों की मृत्यु से दुखी गांधारी ने श्रीकृष्ण को श्राप दिया था कि 36 वर्ष बाद यदुवंश का भी आपसी संघर्ष में विनाश होगा. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, बाद में यही घटना द्वारका के अंत और द्वापर युग के समापन का कारण बनी. इन तीनों श्रापों को महाभारत के सबसे रहस्यमयी प्रसंगों में गिना जाता है.
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