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Sant Ki Seekh: जीवन में गुरु क्यों जरूरी है? जानें युवा शक्ति के लिए सद्गुरु के मार्ग दर्शन का महत्व 

Guru Kyon Jaruri Hai: इंसान को आखिर किसी गुरु की आवश्यकता क्यों पड़ती है? 21वीं सदी के इस तकनीक वाले युग में आखिर युवाओं के लिए एक गुरु क्यों बेहद जरूरी हो जाता है? गुरु की महत्ता को विस्तार से बता रहे हैं देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति एवं प्रसिद्ध आध्यात्मिक विचारक डॉ. चिन्मय पंण्ड्या. 

Sant Ki Seekh: जीवन में गुरु क्यों जरूरी है? जानें युवा शक्ति के लिए सद्गुरु के मार्ग दर्शन का महत्व 
Sant Ki Seekh: गुरु का क्या महत्व है?
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Importance of guru in our life: युवावस्था मानव जीवन का सबसे स्वर्णिम और महत्वपूर्ण कालखंड है. यह वह समय है, जब व्यक्ति बड़े सपने देखता है, जीवन के ऊंचे लक्ष्य निर्धारित करता है और अपने भविष्य की मजबूत नींव रखता है. इस अवस्था में उत्साह, असीम ऊर्जा और महत्वाकांक्षा कूट-कूट कर भरी होती है. किंतु, दिशाहीनता के इस दौर में यदि सही मार्गदर्शन न मिले, तो युवा भटकाव का शिकार भी हो सकता है. ऐसे समय में एक सच्चे सद्गुरु का सान्निध्य युवाओं को भटकाव से बचाकर सही दिशा प्रदान करता है.

गुरु ने हर युग में दिखाई सही राह

हमारे इतिहास और संस्कृति में अनेक महान विभूतियों के जीवन में गुरु की केंद्रीय भूमिका स्पष्ट रूप से दिखाई देती है. स्वामी विवेकानंद के जीवन को एक युगांतरकारी दिशा देने का कार्य उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस ने किया. विवेकानंद के भीतर अद्भुत प्रतिभा, तीव्र जिज्ञासा और अदम्य साहस था, किंतु गुरु के सान्निध्य ने ही उन्हें आत्मबोध कराया और जीवन का वास्तविक उद्देश्य प्रदान किया. इसी का परिणाम था कि वे वैश्विक पटल पर भारतीय संस्कृति और अध्यात्म के विश्वविख्यात प्रतिनिधि बनकर उभरे. इसी प्रकार, छत्रपति शिवाजी महाराज के शौर्य और राष्ट्र-निर्माण के संकल्प को निखारने में समर्थ रामदास का प्रभाव उल्लेखनीय रहा. गुरु के कुशल मार्गदर्शन ने शिवाजी के भीतर राष्ट्रभक्ति, धर्मनिष्ठा और 'हिन्दवी स्वराज्य' के संकल्प को और अधिक सुदृढ़ तथा सुव्यवस्थित किया.

युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य की सीख 

युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के अनुसार, युवा के भीतर छिपी हुई प्रसुप्त प्रतिभाएं, उच्च आदर्श और दिव्य संभावनाएं उचित प्रेरणा व सही मार्गदर्शन मिलने पर ही अंकुरित और विकसित होती हैं. सद्गुरु युवा को न केवल सद्ज्ञान देते हैं, बल्कि उनके चिंतन को भी उत्कृष्ट बनाते हैं तथा उनके व्यक्तित्व का परिष्कार करते हैं. वे युवा को यह बोध कराते हैं कि जीवन केवल व्यक्तिगत सुखों के लिए जीने का नाम नहीं है, बल्कि समाज, राष्ट्र और मानवता के प्रति अपने उत्तरदायित्वों को निभाने का एक अनुपम अवसर है. आचार्यश्री का अटूट विश्वास था कि जब कोई युवा अपने जीवन में संयम, सेवा, स्वाध्याय, सदाचार और आत्मविकास जैसे पंचशील आदर्शों को समाहित कर लेता है, तब वह केवल एक सफल व्यक्ति ही नहीं, बल्कि एक आदर्श नागरिक और 'युग-निर्माता' के रूप में रूपांतरित हो जाता है.

तकनीक के इस दौर में गुरु क्यों जरूरी है?

आज का युवा तकनीकी क्रांति और सोशल मीडिया के आभासी युग में जी रहा है. उसके पास सूचनाओं का अथाह भंडार तो है, परंतु सूचना और विवेक में अंतर होता है. आज सही और गलत के चयन की क्षमता (विवेक) विकसित करना सबसे बड़ी चुनौती है. केवल तकनीकी जानकारी या डिग्रियां जीवन को सफल नहीं बनातीं; उसके लिए सुदृढ़ चरित्र, अनुशासन, नैतिकता और आत्मसंयम अपरिहार्य हैं. सद्गुरु युवाओं को इन्हीं शाश्वत मूल्यों से परिचित कराते हैं और उन्हें जीवन के वास्तविक ध्येय से जोड़ते हैं.

Sant Ki Seekh: 'मिड लाइफ क्राइसिस' क्या आपको सता रहा है?

वास्तव में, सद्गुरु युवा जीवन के लिए दिशा, प्रेरणा और दिव्य प्रकाश के जीवंत स्रोत होते हैं. वे युवाओं की बिखरी और उच्छृंखल ऊर्जा को रचनात्मक एवं सकारात्मक कार्यों की ओर मोड़कर उन्हें एक उत्कृष्ट व्यक्तित्व में ढालते हैं. वर्तमान समय में, जब भौतिकवादी आकर्षण और नैतिक मूल्यों का संकट युवाओं के समक्ष वैचारिक चुनौतियां खड़ी कर रहा है, तब सद्गुरु का मार्गदर्शन और भी प्रासंगिक हो जाता है. अतः, प्रत्येक युवा को एक ऐसे श्रेष्ठ मार्गदर्शक, गुरु या उच्च आदर्श से अवश्य जुड़ना चाहिए, जो उसके जीवन को महान उद्देश्यों, बड़े और अच्छे कामों के लिए जोश और उत्साह से भर सके. गुरु के आशीष और कुशल मार्गदर्शन से युवा न केवल अपने जीवन को सार्थक बना सकता है, बल्कि राष्ट्र और समाज के नवनिर्माण में भी अपना अमूल्य योगदान दे सकता है.

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