सावन के महीने में लाखों शिवभक्त कांवड़ यात्रा कर गंगाजल लाते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं. इस दौरान कई श्रद्धालु सुविधा के लिए प्लास्टिक की बोतल में गंगाजल लेकर शिवलिंग पर चढ़ा देते हैं. लेकिन क्या ऐसा करना धार्मिक दृष्टि से उचित माना जाता है. इस सवाल का जवाब ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय ने शास्त्रों और परंपरा के आधार पर बताया है.
शास्त्रों में क्या कहा गया है?
ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय के अनुसार, भगवान शिव का जलाभिषेक हमेशा पवित्र पात्र से करना चाहिए. शास्त्रों में तांबे, पीतल, चांदी या मिट्टी के पात्र को शुभ और शुद्ध माना गया है. इन्हीं बर्तनों से जल चढ़ाने का विशेष महत्व बताया गया है.
प्लास्टिक की बोतल क्यों नहीं मानी जाती उचित
पंडित जी बताते हैं कि प्लास्टिक एक कृत्रिम पदार्थ है, जिसे धार्मिक अनुष्ठानों में पवित्र नहीं माना जाता. इसलिए कांवड़ में लाए गए गंगाजल को सीधे प्लास्टिक की बोतल से भगवान शिव पर अर्पित करने से बचना चाहिए.
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अगर प्लास्टिक में जल लाए हैं तो क्या करें
अगर यात्रा के दौरान मजबूरी में गंगाजल प्लास्टिक की बोतल में रखा है तो मंदिर पहुंचकर उसे पहले तांबे, पीतल या मिट्टी के पात्र में निकाल लें. इसके बाद उसी पात्र से भगवान शिव का जलाभिषेक करें. इससे धार्मिक मर्यादा भी बनी रहती है.
आस्था के साथ परंपरा का भी रखें ध्यान
पंडित कौशल पांडेय का कहना है कि भगवान शिव भक्तों की भावना देखते हैं, लेकिन पूजा-पाठ में शास्त्रों और परंपराओं का पालन करना भी जरूरी माना गया है. इसलिए कांवड़ यात्रा के दौरान जलाभिषेक करते समय सही पात्र का उपयोग करना अधिक शुभ माना जाता है.
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