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Sawan Jalabhishek: सावन में जलाभिषेक के बाद जरूर चढ़ाएं ये फूल, जानिए महादेव को कौन सा पुष्प है सबसे प्रिय

Lord Shiva Puja: भगवान शिव को जलाभिषेक के बाद बेलपत्र, धतूरा, आंकड़ा, कनेर, बेला, शमी और हरसिंगार जैसे फूल चढ़ाने की मान्यता है. इसके अलावा, आचार्य मदन मोहन ने अलग-अलग पुष्पों का धार्मिक महत्व भी बताया है.

Sawan Jalabhishek: सावन में जलाभिषेक के बाद जरूर चढ़ाएं ये फूल, जानिए महादेव को कौन सा पुष्प है सबसे प्रिय
जलाभिषेक के बाद फूल और बेलपत्र चढ़ाने की परंपरा है
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भगवान शिव की पूजा में जलाभिषेक के बाद फूल और बेलपत्र चढ़ाने की परंपरा है. ऐसी मान्यता है कि भोलेनाथ को अलग-अलग फूल अर्पित करने से अलग-अलग फल मिलते हैं. सावन और सोमवार के दिन शिवलिंग पर फूल चढ़ाने का खास महत्व बताया गया है. आइए आचार्य मदन मोहन से जानिए जलाभिषेक के समय कौन सा फूल चढ़ाएं.

महादेव को प्रिय हैं ये फूल

आचार्य मदन मोहन के अनुसार भगवान शिव को बेला, शमी, आंकड़ा, कनेर, अगस्त्य, हरसिंगार, धतूरा, जूही और चमेली जैसे फूल अर्पित करने की धार्मिक मान्यता है. हालांकि, पूजा में हमेशा ताजे और साफ फूल ही चढ़ाने चाहिए. उन्होंने आगे बाताया कि शिवलिंग पर कनेर का फूल चढ़ाने से धन-संपत्ति की प्राप्ति होती है. वहीं अगस्त्य का फूल भगवान शिव को अर्पित करने से मान-सम्मान और यश बढ़ने की मान्यता है.

आंकड़ा और धतूरे का भी है खास महत्व

आचार्य ने बताया कि शिव पूजा में सफेद और लाल आंकड़े के फूल चढ़ाने की परंपराा है. इसे मदार भी कहा जाता है. वहीं धतूरा भगवान शिव को प्रिय माना जाता है और जलाभिषेक के बाद इसके फूल-फल अर्पित किए जाते हैं.

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हरसिंगार और जूही से जुड़ी है मान्यता

उन्होंने बताया कि हरसिंगार को पारिजात या शिउली भी कहा जाता है. मान्यता है कि इसे शिवलिंग पर चढ़ाने से सुख-समृद्धि मिलती है. वहीं जूही के फूल से पूजा करने पर घर में अन्न और धन की कमी नहीं होने की मान्यता है. साथ ही,  भगवान शिव को चमेली और बेला के फूल भी प्रिय मानने जाते हैं. धार्मिक मान्यता में इन फूलों को अर्पित करने से जीवन में सकारात्मकता और सुख-शांति आती है.

जलाभिषेक के बाद बेलपत्र जरूर चढ़ाएं

मदन मोहन ने बताया कि शिवलिंग पर जल चढ़ाने के बाद बेलपत्र अर्पित करनाा विशेष रूप से शुभ माना जाता है. इसके साथ धतूरा, आंकड़ा और उपलब्धता के अनुसार भगवान शिव को प्रिय फूल चढ़ाकर श्रद्धा से पूजा की जा सकती है. इन मान्यताओं को धार्मिक आस्था के रूप में ही देखना चाहिए.

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