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कान्हा की कहानी, कथक की जुबानी, जन्माष्टमी पर कृष्ण भक्ति में डूबीं डॉ. यास्मिन सिंह, 50 मिनट की प्रस्तुति ने जीता दिल

इस्कॉन द्वारका में जन्माष्टमी समारोह के दौरान डॉ. यास्मिन सिंह और उनके ग्रुप ने ‘दिव्य कृष्ण’ कथक प्रस्तुति के जरिए भगवान कृष्ण की लीलाओं को पेश किया.

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर डॉ. यास्मिन सिंह की कथक प्रस्तुति

देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम के साथ मनाया गया. दिल्ली के इस्कॉन द्वारका में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर कई भक्ति और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए. इस दौरान मशहूर कथक डांसर और कोरियोग्राफर डॉ. यास्मिन सिंह और उनके ग्रुप के साथ 50 मिनट की खास प्रस्तुति दी. इस प्रस्तुति का नाम ‘दिव्य कृष्ण' था. इसमें भगवान कृष्ण के जीवन से जुड़े कई प्रसंग दिखाए गए. कृष्ण की बाल लीलाओं, वृंदावन, रासलीला, गोपियों के प्रेम और महाभारत की घटनाओं को कथक के जरिए पेश किया गया. डॉ. यास्मिन सिंह की इस कथक प्रस्तुति ने सबका दिल जीत लिया.

'दिव्य कृष्ण' में दिखीं कृष्ण की लीलाएं

डॉ. यास्मिन सिंह और उनके ग्रुप ने ‘दिव्य कृष्ण' में भगवान कृष्ण के जीवन के अलग-अलग रंग दिखाए. इसमें कृष्ण के बचपन, वृंदावन की खूबसूरती, रासलीला और गोपियों के प्यार को नृत्य के जरिए बताया गया. इस प्रस्तुति में महाभारत से जुड़े कुछ खास प्रसंग भी शामिल थे. कथक के भाव, पैरों की थिरकन, घुंघरुओं और हाथों की मुद्राओं के जरिए कृष्ण की कहानी भक्तों तक पहुंचाई गई.

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कई सालों से कथक कर रही हैं डॉ. यास्मिन

डॉ. यास्मिन सिंह कई सालों से कथक के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपनी कला को भगवान कृष्ण की पूजा और सेवा का माध्यम बनाया है. उन्हें भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की ओर से कथक में सीनियर फेलोशिप और टैगोर स्कॉलरशिप मिल चुकी है. वह विदेश मंत्रालय के आईसीसीआर से जुड़ी कलाकार भी हैं. इसके अलावा उन्हें संस्कृति मंत्रालय और दूरदर्शन की ओर से हाई-ग्रेड कलाकार के रूप में भी मान्यता मिली है.

यह सब कृष्ण की कृपा से हुआ- डॉ. यास्मिन

डॉ. यास्मिन सिंह ने कहा कि जन्माष्टमी के पवित्र मौके पर उन्हें प्रस्तुति देने का मौका मिला, यह उनके लिए बहुत सम्मान की बात है. उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से ही संभव हो पाया. उन्होंने बताया कि प्रस्तुति में कृष्ण के जीवन के कई रंग दिखाए गए. पूरा कार्यक्रम श्रीकृष्ण को समर्पित था. इस्कॉन द्वारका के जन्माष्टमी समारोह का हिस्सा बनकर उन्हें बहुत खुशी और सम्मान महसूस हुआ.

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