Kanvar Yatra in Sawan: 22 जुलाई को सावन (Sawan) माह शुरू होने के साथ ही कांवड़ यात्रा (Kanvar Yatra) भी शुरू हो गई है. शिव भक्त गंगाजल लेकर पैदल यात्रा कर देश भर के शिव मंदिरों में भोलेबाबा (Lord Shiva) के दर्शन के लिए पहुंचने लगे हैं. इन कांवड़ यात्रा में भक्त 150 किमी से लेकर 200 किमी तक कि पैदल यात्रा करते हैं और गंगाजल से भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं. कांवड़ यात्रा के दौरान भक्त कई नियमों का पालन करते हैं ताकि यात्रा की पवित्रता बनी रही और यात्रा का माहौल भी भक्तिमय रहे. एक नियम के अनुसार यात्रा के दौरान भक्त एक दूसरे का नाम नहीं लेते हैं. आइए जानते हैं इस नियम का कारण और कौन सी कांवड़ यात्रा मानी जाती है सबसे कठिन….
रुद्राक्ष धारण करने से मन रहता है शांत और नकारात्मता हो जाती है दूर
सभी सिर्फ शिव भक्तकांवड़ यात्रा के दौरान यात्रा में शामिल सभी लोग केवल शिव भक्त होते हैं. यात्रा कर रहे सभी यात्री पूरी तरह शिव भक्ति में लीन रहते हैं और माहौल भी पूरी तरह शिवमय होता है. ऐसे में एक दूसरे का नाम नहीं लेकर उन्हें बम कह कर बुलाते हैं ताकि उनके मुंह से केवल शिव नाम का ही उच्चारण हो. भक्त एक दूसरे को बम, भोले, भोली कहते हैं और अनोखा रिश्ता बना लेते हैं.
-
नो इंडियंस अलाउड से मेयर तक का सफर, NDTV समिट में रोहतक से लंदन गई मां-बेटे की जोड़ी ने बताई अपनी जर्नी -
NDTV World Summit 2026: Lovlina Borgohain ने बताया जीवन का सबसे बड़ा चैलेंज! क्यों लगने लगे ठहाके? -
NDTV World Summit 2026: हॉकी चैंपियन नेहा गोयल का बड़ा खुलासा! दर्द में भी जीत का जश्न -
Ashwini Vaishnaw के ऑफिस में कुर्सी के पीछे क्यों लगी है कील? NDTV World Summit में खोला राज -
NDTV World Summit : क्या AI छीन लेगा नौकरियां? माइक वॉल्श ने दिया चौंकाने वाला जवाब -
NDTV World Summit 2026: Asian Games में कैसे जीते 2 Gold Medal? Shooter Neeru Dhanda ने बताया -
AI न नौकरी खाएगा, न इंसानों की जगह लेगा... NDTV World Summit में माइक वॉल्श ने बता दिया AI का फ्यूचर -
महंगाई, GDP और AI पर RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा का बड़ा बयान, आम आदमी को कितनी राहत? -
रेलमंत्री वैष्णव ने बताया बुलेट ट्रेन में देरी की क्या रहीं वजहें, जापानी मंत्री के आरोपों का दिया जवाब -
AI पर भारत में आएगा कानून, NDTV World Summit में बोले अश्विनी वैष्णव- चंद हफ्तों में आएगा कंसल्टेशन पेपर
यह सबसे ज्यादा प्रचलित कांवड़ यात्रा है. इसमें यात्री बगैर जूते चप्पल की यात्रा करते हैं और थकान होने पर बैठकर आराम कर सकते हैं. कांवड़ को जमीन पर रखने की मनाही होती है इसलिए कांवड़ खास तरह के स्टैंड पर रखा जाता है.
खड़ी कांवड़खड़ी कांवड़ यात्रा में कांवड़ को स्थिर रखने की मनाही होती है. इसमें यात्री का एक सहयोगी भी होता है. यात्रा के दौरान यात्री के आराम करते समय सहयोगी कांवड़ ले लेता है. सहयोगी यात्री को लेकर हिलता डुलता रहता है ताकि कांवड़ को स्थिर न रहे.
झूला कांवड़यह बांस से बनाया खास तरह का कांवड़ होता है जिसमें दोनों छोर पर मटके रखने की व्यवस्था होती है. यात्री इन मटकों में गंगाजल भर लेते हैं. आराम करते समय झूला कांवड़ का नीचे रखना वर्जित होता है.
डाक कांवड़कांवड़ यात्रा मे सबसे कठिन यात्रा डाक कावड़ यात्रा होती है. इस यात्रा में कांवड़िए गंगा जल लेने के बाद कहीं नहीं रुकते हैं और 24 घंटे के अंदर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं. ये सफेद रंग का वस्त्र धारण करते हैं, जो इनकी पहचान होती है और इनका मार्ग कोई नहीं रोकता है. शिव मंदिरों में भी इनके लिए विशेष मार्ग बनाए जाते हैं.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं