सनातन धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व है. 16 दिनों तक चलने वाले इस काल में हम अपने पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान करते हैं, ताकि उनकी आत्मा को शांति मिले और उनका आशीर्वाद परिवार पर बना रहे. इस साल पितृपक्ष 26 सितंबर से शुरू होगा. इस दिन काले तिल के साथ तर्पण करने से विशेष लाभ मिलता है. चलिए आपको बताते हैं पितरों के तर्पण में काला तिल क्यों जरूरी है?
पितरों के तर्पण में क्यों जरूरी है काला तिल?
धार्मिक मान्यता है कि इस अवधि में जो व्यक्ति काले तिल का दान करता है उसे सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है और उनके ऊपर पूर्वजों की कृपा दृष्टि बनी रहती है. काले तिल का दान करना और जल में काले तिल डालकर पूर्वजों के निमित्त तर्पण करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. पितरों के तर्पण और श्राद्ध में काले तिल का उपयोग उनकी तृप्ति, पवित्रता और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए सबसे जरूरी माना जाता है.
श्राद्ध यानी पितृ पक्ष में पिंड दान और तर्पण का विशेष महत्व होता है. इसके साथ ही काले तिल का भी खास महत्व होता है. काल तिल को जल तर्पण में इस्तेमाल किया जाता है, पिंडों में मिलाया जाता है, पवित्र नदी में अर्पित किया जाता है और मुख्य रूप से जरूरतमंदों को दान के रूप में दिया जाता है. पितृ पक्ष में तिल का इस्तेमाल करने से पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है और उनकी आत्मा को शांति मिलती है.
धार्मिक और पौराणिक कारण
भगवान विष्णु का स्वरूप- पौराणिक कथाओं के अनुसार, काले तिल की उत्पत्ति भगवान विष्णु के पसीने से हुई है. इसलिए इसे बेहद पवित्र और दैवीय माना गया है.
असुर और नकारात्मकता का नाश- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तर्पण में काले तिल मिलाने से बुरी शक्तियां दूर रहती हैं और पूजा का पूरा फल सीधे पितरों तक पहुंचता है.
पूर्वजों का आशीर्वाद- तर्पण में काले तिल का इस्तेमाल करने से पितृ दोष शांत होता है और पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है.
हिंदू धर्मशास्त्रों के मुताबिक, काले तिल पितरों को अत्यंत प्रिय और तृप्ति देने वाले माने गए हैं. मान्यता है कि काले तिल में सभी तीर्थों का पुण्य समाहित होता है. इसलिए जहां गंगा-यमुना जाना संभव न हो, वहां काले तिल मिला जल ही गंगा जल के समान फल देता है. काले तिल में सूर्य और अग्नि की ऊर्जा होती है. पितर सूक्ष्म लोक में रहते हैं, उन्हें ठोस भोजन नहीं पहुंचता. काले तिल की सूक्ष्म ऊर्जा ही उन्हें शक्ति और तृप्ति प्रदान करती है. इसके अलावा काले रंग का संबंध शनि और यम से है. काले तिल चढ़ाने से पितृ दोष, कुल में आने वाली बाधाएं, संतान-दोष, धन-हानि आदि दोष मिटने के साथ ही उन्नति के द्वार खुलते हैं.
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