बच्चों के आत्मविश्वास को मजबूत करने में माता-पिता का व्यवहार अहम भूमिका निभाता है. पैरेंटिंग कोच परीक्षित जोबनपुत्रा के अनुसार, बच्चों को हर बात पर डराने, दूसरों से तुलना करने या जरूरत से ज्यादा रोकने के बजाय उन्हें भरोसा, विकल्प और अपनी गलतियों से सीखने का मौका देना चाहिए. रोजमर्रा की कुछ छोटी आदतें बच्चे के आत्मविश्वास को मजबूत करने में मदद कर सकती हैं.
डर दिखाकर बात मनवाने से बचें
पैरेंटिंग कोच परीक्षित जोबनपुत्रा के अनुसार, बच्चे को बात समझाने और डराने में फर्क है. 'खाना नहीं खाया तो मोबाइल नहीं मिलेगा, पढ़ाई नहीं की तो हॉस्टल भेज देंगे' जैसे डर पैदा करने वाले वाक्य बच्चे के मन में असुरक्षा बढ़ा सकते हैं. इसलिए माता-पिता को धमकी की जगह प्यार से अपनी बात समझानी चाहिए.
बच्चे के सामने न करें झगड़ा
एक्सपर्ट के अनुसार, माता-पिता के बीच होने वाले लगातार झगड़े या तीखी बहस का असर बच्चों पर पड़ सकता है. एक्सपर्ट के अनुसार, बच्चे के सामने आपसी मतभेद और गुस्सा दिखाने से वह खुद को असुरक्षित महसूस कर सकता है. इसलिए कोशिश करें कि गंभीर बातचीत बच्चे के सामने न हो.
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हर काम में जरूरत से ज्यादा न दें सुरक्षा
एक्सपर्ट के अनुसार, बच्चे को सुरक्षित रखना जरूरी है, लेकिन हर छोटी परेशानी से बचाना भी सही नहीं. एक्सपर्ट की सलाह है कि उम्र के हिसाब से बच्चों को छोटे-छोटे फैसले लेने और मुश्किलों का सामना करने का मौकाा दें. इससे उनमें समस्या सुलझाने और खुद पर भरोसा करने की क्षमता विकसित हो सकती है.
दूसरे बच्चों से तुलना न करें
एक्सपर्ट ने बताया कि देखो, वह कितना अच्छा पढ़ता है या तुम उससे क्यों नहीं सीखते जैसी तुलना बच्चे के आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकती है. इसी तरह रिश्तेदारों या दोस्तों के सामने बच्चे की शिकायत करने से भी बचनाा चाहिए. उसकी कमियों के बजाय सुधार के तरीके पर बाात करें.
गले लगाएं और भरोसा दिलाएं
बच्चा किसी नई जगह या नए लोगों के बीच असहज महसूस करे तो तुरंत डांटने या सलाह देने के बजाय उसे भावनात्मक सहारा दें. एक्सपर्ट जुबिन प्रूथ के अनुसार, प्यार से गले लगाना और यह एहसास करानाा कि मैं तुम्हारे साथ हूं, बच्चे को सुरक्षित महसूस कराा सकता है.
बच्चे को विकल्प चुनने दें
हर छोटी बात का फैसला माता-पिता करने के बजाय बच्चे को दो-तीन विकल्प दिए जा सकते हैं. जैसे खाने या किसी गतिविधि में उसकी पसंद पूछना. अपनी उम्र के मुताबिक छोटे फैसले लेने से बच्चे में निर्णय लेने की आदत और आत्मविश्वास विकसित हो सकताा है.
नई चीजें आजमाने का दें मौका
बच्चे को सिर्फ पढ़ाई और तय दिनचर्या तक सीमित न रखें. चित्रकारी, खेल, संगीत या कोई नई गतिविधि आजमाने दें. इस दौरान उससे गलती हो तो उसे तुरंत डांटने के बजाय गलती से सीखने का मौकाा दें. साथ ही रोजाना खेलकूद या पसंद की शारीरिक गतिविधि के लिए समय निकालना भी फायदेमंद हो सकता है.
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