Rules For Ringing The Bell During Worship: सनातन धर्म में पूजा-पाठ के दौरान घंटी बजाने की परंपरा सदियों पुरानी है. मंदिर में प्रवेश करते समय या घर में पूजा शुरू करते वक्त घंटी बजाना शुभ माना जाता है. मान्यता है कि घंटी की ध्वनि से पूजा का वातावरण पॉजिटिव और पवित्र बनता है. इसके साथ ही इससे मन को एकाग्र करने में भी मदद मिलती है. हालांकि, कई लोग पूजा के दौरान लगातार घंटी बजाते रहते हैं, जबकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हर समय घंटी बजाना जरूरी नहीं माना जाता. पूजा के अलग-अलग चरणों में घंटी बजाने का अलग महत्व बताया गया है. आइए जानते हैं 3 स्टेप में घंटी बजाने का सही तरीका -
1. पूजा की शुरुआत में कितनी बार बजाएं घंटी?
पूजा शुरू करते समय कुछ सेकंड के लिए घंटी बजाने की परंपरा बताई जाती है. इस दौरान करीब 3 से 5 बार घंटी बजाई जा सकती है. घंटी को बहुत तेज या लगातार बजाने के बजाय धीमी और सहज आवाज में बजाना उचित माना जाता है. मान्यता के अनुसार, पूजा की शुरुआत में घंटी बजाने से वातावरण में पॉजिटिविटी आती है और व्यक्ति का ध्यान पूजा की ओर केंद्रित होता है.
2. आरती के दौरान बजाएं लगातार घंटी
पूजा में घंटी बजाने का सबसे प्रमुख समय आरती को माना जाता है. आरती शुरू होने से लेकर उसके समाप्त होने तक घंटी बजाई जा सकती है. हालांकि, इस दौरान भी घंटी को बहुत तेज बजाने से बचना चाहिए. कोशिश करें कि घंटी एक समान लय में बजे. श्रद्धा और शांत मन से घंटी बजाने को पूजा का हिस्सा माना जाता है. आरती के दौरान घंटी की ध्वनि वातावरण को भक्तिमय बनाने के साथ पूजा में लोगों का ध्यान केंद्रित करने में मदद करती है.
3. भोग लगाते समय भी बजा सकते हैं घंटी
आरती समाप्त होने के बाद जब भगवान को भोग लगाया जाता है, तब भी कुछ समय के लिए घंटी बजाने की परंपरा है. इस दौरान करीब 5 से 10 सेकंड तक धीमी आवाज में घंटी बजाई जा सकती है. मान्यता के अनुसार, भोग लगाते समय घंटी बजाना भी पूजा की प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता है. हालांकि, इस दौरान भी घंटी को लगातार या बहुत तेज बजाने की जरूरत नहीं होती.
मंत्र जाप और ध्यान के समय न बजाएं घंटी
पूजा के हर चरण में घंटी बजाना जरूरी नहीं माना जाता. मंत्र जाप, ध्यान या शांत साधना के दौरान घंटी बजाने से बचना बेहतर माना जाता है. इन समयों में मन को शांत और एकाग्र रखने पर ध्यान दिया जाता है. इसी तरह शाम या रात में विशेष पूजा करते समय भी घंटी की आवाज धीमी रखने की सलाह दी जाती है, ताकि आसपास के लोगों को परेशानी न हो.
याद रखें कि घंटी बजाने को लेकर अलग-अलग परंपराओं और धार्मिक मतों में अंतर हो सकता है. इसलिए इसे किसी कठोर नियम के बजाय धार्मिक मान्यता और व्यक्तिगत श्रद्धा के रूप में देखना चाहिए. सबसे जरूरी है कि पूजा शांत मन और श्रद्धा के साथ की जाए.
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