Hindu New Year 2026 predictions : लोग भले ही एक जनवरी को नया साल मनाते हो. पर हिंदू समाज में नववर्ष की शुरुआत गुड़ी पड़वा से ही होती है. इस वर्ष 19 मार्च 2026 से चैत्र माह की प्रतिपदा तिथि से नया संवत्र शुरू होने जा रहा है. इस दिन से चैत्र नवरात्रि भी शुरू हो जाएगी. वैसे, ज्योतिषीय गणना के मुताबिक इस बार हिंदू नववर्ष कई मायनों में बेहद खास होने वाला है, दरअसल ग्रहों की स्थिति को लेकर चिंता जताई जा रही है. माना जा रहा है कि इस बार माता दुर्गा का आगमन पालकी पर हो रहा है और ग्रहों की स्थिति अनुकूल नहीं है. इस कारण देश-दुनिया में संघर्ष, आर्थिक संकट और राजनीतिक उथल-पुथल के योग बनते नजर आ रहे हैं.
बन रहा है दुर्लभ संयोग : ज्योतिषाचार्य दीपक कुमार दीक्षित के अनुसार इस बार हिंदू नववर्ष की शुरुआत करीब 72 साल बाद बनने वाले बेहद दुर्लभ योग में होने जा रही है. इस दिन शुक्ल योग, ब्रह्म योग और सर्वार्थ सिद्ध योग एक साथ बन रहे हैं, जो अपने आप में बेहद खास संयोग हैं. पर चिंता इस बात भी है कि गुड़ी पड़वा के दिन माता दुर्गा का आगमन पालकी पर हो रहा है, जिसे शुभ संकेत नहीं माना जाता.
वैश्विक स्तर पर आर्थिक मंदी के संकेत : वैसे जब नवरात्रि में माता दुर्गा पालकी पर सवार होकर आती हैं तो इसे अच्छा संकेत नहीं माना जाता है. पंडित जी के अनुसार ऐसे समय में आर्थिक संकट, संघर्ष और सामाजिक अस्थिरता बढ़ने की संभावना बनी रहती है. उनके अनुसार इसकी शुरुआती झलक अभी से देखने लगी है, जहां वैश्विक स्तर पर आर्थिक मंदी के संकेत दिखाई दे रहे हैं और पेट्रोल, डीजल और गैस जैसी चीजों को लेकर भी कई जगह अस्थिरता देखी जा रही है.
19 मार्च से शुरू हो रहा है संवत्सर : 19 मार्च से रौद्र नाम का संवत्सर शुरू हो रहा है. ज्योतिष में रौद्र संवत्सर को उग्र और संघर्षपूर्ण माना गया है. इस समय लग्न में मंगल के साथ राहु की युति भी बन रही है, जिसे ज्योतिष में अशुभ माना गया है. इस स्थिति के कारण देश में आगजनी, संघर्ष और ग्रह युद्ध जैसे हालात बनने की संभावना बताई जा रही है. साथ ही सरकार, शासक और जनता के बीच आपसी विचारों का टकराव भी बढ़ने की संभावना है.
भारत में स्थिति नियंत्रण में रहने के संकेत : इन तमाम संभावनाओं के बावजूद अन्य देशों की तुलना में भारत में स्थिति अपेक्षाकृत नियंत्रण में रह सकती है. उन्होंने इसके पीछे देश के प्रधानमंत्री की कुंडली को एक कारण बताया.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)