- बिहार में पंचायत चुनाव से पहले वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर पंचायतों का परिसीमन कराया जाएगा
- परिसीमन के बाद पंचायतों की सीमाएं बदलेंगी और आरक्षण रोस्टर तैयार किया जाएगा
- पंचायत चुनाव की तारीख अभी साफ नहीं है, चुनाव प्रक्रिया राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशन में होगी
बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. चुनावी तैयारी में जुटे संभावित प्रत्याशियों के लिए पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश का बयान बेहद अहम है.मधेपुरा पहुंचे मंत्री ने साफ किया कि पंचायत चुनाव से पहले वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर पंचायतों का परिसीमन कराया जाएगा. यानी पंचायत चुनाव का बिगुल बजने से पहले गांवों की सियासत का नक्शा बदल सकता है. पंचायतों की सीमाएं बदलेंगी तो चुनावी क्षेत्र बदल सकते हैं और परिसीमन के बाद आरक्षण रोस्टर तैयार होने पर कई सीटों की तस्वीर भी बदल सकती है.
बिहार में पंचायत चुनाव कब होगा?
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल पंचायत चुनाव की निश्चित तारीख बताना संभव नहीं है, क्योंकि परिसीमन से लेकर चुनाव कराने तक की पूरी प्रक्रिया राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशन में होती है. दीपक प्रकाश ने कहा चुनाव से पहले पंचायतों की सीमाओं का नए सिरे से निर्धारण होगा. कौन सा गांव किस पंचायत में रहेगा, किस पंचायत की सीमा कहां तक होगी, किन इलाकों को एक पंचायत में शामिल किया जाएगा, इन तमाम सवालों का जवाब परिसीमन के बाद सामने आएगा. लेकिन असली असर सिर्फ पंचायतों की सीमा तक सीमित नहीं रहने वाला.
पंचायतों का परिसीमन कराने की तैयारी
परिसीमन पूरा होने के बाद आरक्षण रोस्टर तैयार किया जाएगा. यही वह पड़ाव होगा, जिस पर पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे संभावित प्रत्याशियों की सबसे ज्यादा नजर होगी.क्योंकि आरक्षण बदलने के साथ चुनावी दावेदारी भी बदल सकती है. जो सीट पिछले चुनाव में सामान्य थी, वह आरक्षित हो सकती है. जो सीट आरक्षित थी, उसका स्वरूप बदल सकता है. ऐसे में कई संभावित प्रत्याशियों की महीनों की तैयारी भी नए समीकरण के सामने बदल सकती है.मंत्री के बयान के बाद पंचायत चुनाव की तैयारी में जुटे दावेदार अब दो चीजों का इंतजार कर रहे हैं-पंचायत का नया परिसीमन और आरक्षण रोस्टर.
गांवों में चुनावी चर्चा पहले से शुरू है. संभावित प्रत्याशी लोगों के बीच पहुंच बना रहे हैं, जनसंपर्क कर रहे हैं और अपने पक्ष में माहौल तैयार करने में जुटे हैं. लेकिन परिसीमन की नई तस्वीर आने के बाद यह तय होगा कि किस प्रत्याशी का चुनावी क्षेत्र वही रहेगा और किसका समीकरण बदल जाएगा. यानी पंचायत चुनाव की असली राजनीतिक तस्वीर तारीख घोषित होने से पहले ही परिसीमन के साथ बननी शुरू हो सकती है.
आरक्षण रोस्टर होगा तैयार
पंचायती राज मंत्री ने पंचायत चुनाव की तारीख को लेकर फिलहाल कोई निश्चित समय-सीमा बताने से इनकार किया. उनका कहना है कि परिसीमन, आरक्षण रोस्टर तैयार करने से लेकर पंचायत चुनाव कराने तक की पूरी प्रक्रिया राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशन में होती है. विभाग की ओर से निर्वाचन आयोग को हरसंभव सहयोग दिया जा रहा है. सभी जरूरी प्रक्रियाओं को समय पर पूरा कराने का प्रयास जारी है. सरकार की कोशिश प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की है, लेकिन चुनाव की तारीख का अंतिम फैसला निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा.
अब सवाल ये है कि 2011 की जनगणना के आधार पर होने वाला परिसीमन पंचायत चुनाव के समीकरण को कितना बदलेगा?इसका जवाब आने वाले समय में मिलेगा.लेकिन इतना तय है कि पंचायतों की सीमाओं में बदलाव हुआ तो कई इलाकों में स्थानीय राजनीतिक समीकरण भी बदल सकते हैं.किस पंचायत से कौन उम्मीदवार मैदान में उतरेगा, किस इलाके में किसका प्रभाव रहेगा और आरक्षण की नई व्यवस्था में कौन अपनी दावेदारी पेश करेगा, इन तमाम सवालों पर अब गांव की राजनीति टिकी है.
चुनावी लड़ाई में एक-एक सीट का महत्व
पंचायत चुनाव सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि गांव की स्थानीय सत्ता का सबसे बड़ा मुकाबला होता है.मुखिया से लेकर पंचायत समिति, वार्ड और जिला परिषद तक की चुनावी लड़ाई में एक-एक सीट का महत्व होता है.ऐसे में परिसीमन और आरक्षण रोस्टर को लेकर संभावित प्रत्याशियों के बीच उत्सुकता भी है और बेचैनी भी.क्योंकि चुनावी मैदान तैयार है, दावेदार तैयार हैं लेकिन अभी यह तय होना बाकी है कि किसे किस मैदान में उतरना होगा.तो बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर फिलहाल सबसे बड़ा अपडेट यही है.
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