हरियाली तीज इस साल कल 15 अगस्त (शनिवार) को मनाई जाएगी. तीज आते ही दिल्ली एनसीआर के बाजारों में हरी चूड़ियों, मेहंदी और हरे कपड़ों की रौनक बढ़ जाती है, महिलाएं इस दिन हरी साड़ी, सूट और चूड़ियों से सजती हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि तीज पर हरा रंग ही इतना खास क्यों होता है. बता दें कि इसके पीछे सावन की हरियाली, प्रकृति और सुहाग से जुड़ी कई मान्यताएं मानी जाती हैं.
सावन की हरियाली से जुड़ा है हरा रंग
जानकारी के अनुसार, हरियाली तीज सावन में आती है. बारिश के बाद पेड़-पौधों और खेतों में हरियाली छा जाती है. ऐसे में हरा रंग सावन की तााजगी और प्रकृति के नए रूप का प्रतीक माना जाता है. यही वजह है कि तीज के त्योहार में इस रंग की खास जगह बनी हुई है.
हरी चूड़ियों को माना जाता है शुभ
आचार्य मदन मोहन ने बताया कि तीज पर हरी चूड़ियां पहनने की परंपरा काफी पुरानी है. ऐसी मान्यता है कि हरी चूड़ियां सुहाग, खुशहाली और सौभाग्य का प्रतीक मानी जाती हैं. महिलाएं हरी चूड़ियों के साथ मेहंदी और हरे कपड़ों से अपना श्रृंगार पूरा करती हैं.
शिव-पार्वती से जुड़ा है त्योहार
उन्होंने आगे बताया कि हरियाली तीज को भगवान शिव और माता पार्वती के प्रेम और वैवाहिक जीवन से जोड़कर देखा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि माता पार्वती ने शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी. इसी वजह से सुहागिन महिलाएं तीज पर सुखी वैवाहिक जीवन और पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं.
हरा रंग देता है नई शुरुआत का संदेश
आचार्य मदन मोहन ने बताया कि हरे रंग को जीवन, विकास और नई शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है. बारिश के बाद सूखी धरती पर उगती नई हरियाली इसी बदलाव को दिखाती है. इसलिए तीज पर हरा पहनना सिर्फ फैशन नहीं, बल्कि प्रकृति, सौभााग्य और सकारात्मकता से जुड़ी एक खूबसूरत परंपरा भी है.
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