Hariyali Teej Puja Vidhi : हरियाली तीज का त्योहार आते ही घरों में पूजा की तैयारियां शुरू हो जाती हैं. कई सुहागिन महिलाएं इस दिन व्रत रखती हैं और तीज माता यानी माता पार्वती की पूजा करती हैं. कई जगहों पर तीज माता की प्रतिमा बाजार से लाने के बजाय घर पर ही मिट्टी से बनाने की परंपरा भी देखने को मिलती है. मान्यता है कि इस तरह अपने हाथों से तीज माता को बनाकर पूजा करने से भक्ति और श्रद्धा का भाव बढ़ता है. अगर आप भी इस बार घर पर तीज माता की मिट्टी की प्रतिमा बनाना चाहती हैं, तो ये ज्यादा मुश्किल नहीं है. आइए जानते हैं प्रतिमा बनाने से लेकर पूजा और विसर्जन तक की पूरी विधि.
ऐसे बनाएं मिट्टी से तीज माता
मान्यता के अनुसार, तीज माता यानी माता पार्वती की प्रतिमा बनाने के लिए मिट्टी को शुभ माना जाता है. इनपुट में बताई गई परंपरा के मुताबिक, नदी किनारे की मिट्टी ली जा सकती है. मिट्टी में थोड़ा-थोड़ा पानी मिलाकर पहले माता का चेहरा तैयार करें. इसके बाद हाथ-पैर बनाएं. प्रतिमा तैयार होने के बाद चावल को पीसकर बनाए गए घोल से माता की प्रतिमा पर पारंपरिक डिजाइन बनाए जाते हैं. आंखों में काजल और होंठों पर आलता लगाया जा सकता है. इसके बाद प्रतिमा को कुछ देर सूखने के लिए रख दें. माता की प्रतिमा सूख जाए तो उन्हें 16 श्रृंगार से सजाने की परंपरा है. हरे रंग की चोली और लाल साड़ी पहनाने को भी शुभ माना जाता है. इसके बाद प्रतिमा को लकड़ी के पाटे पर रखा जाता है.
पूजा में क्या-क्या चढ़ाएं?
पूजा के लिए सबसे पहले उस जगह की सफाई करें जहां तीज माता की स्थापना करनी है. वहां लकड़ी का पाटा रखकर लाल कपड़ा बिछाएं और माता की प्रतिमा स्थापित करें. साथ में एक छोटा शिवलिंग भी रखा जा सकता है. इसके बाद कलश पर स्वास्तिक बनाकर उसमें आम के पत्ते रखें और ऊपर श्रीफल रखें. तीज माता को गुड़हल का फूल, इत्र, पंचामृत, मालपुआ और भीगे चने चढ़ाने की परंपरा बताई गई है. कुछ जगहों पर हरी सब्जियां और बेलपत्र भी अर्पित किए जाते हैं. इसके बाद 16 श्रृंगार की चीजों से भरी डलिया और हरी चुनरी चढ़ाई जाती है. आखिर में तीज माता की आरती करके अखंड सौभाग्य की कामना की जाती है.
कब करें तीज माता का विसर्जन?
हरियाली तीज के दिन व्रत का पारण करने के बाद तीज माता का विसर्जन किया जा सकता है. इस हरियाली तीज के दिन, शाम 5 बजकर 28 मिनट पर पारण के बाद विसर्जन किया जा सकता है. मिट्टी की प्रतिमा का विसर्जन घर के मिट्टी के गमले में भी किया जा सकता है. इसके अलावा कुछ लोग पवित्र नदी में भी प्रतिमा विसर्जित करते हैं. हालांकि, पूजा और विसर्जन से जुड़े नियम अलग-अलग जगहों की परंपराओं के अनुसार अलग हो सकते हैं. इसलिए अपनी स्थानीय परंपरा और परिवार में चली आ रही मान्यता को ध्यान में रखना बेहतर माना जाता है.
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