सुबह या किसी जरूरी काम के लिए घर से निकलते समय आपने बड़े-बुजुर्गों को अक्सर कहते सुना होगा कि पीछे से आवाज नहीं देनी चाहिए. कई लोग इसे पुरानी परंपरा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं. हालांकि वास्तु और ज्योतिषीय मान्यताओं में इसके पीछे कुछ कारण बताए गए हैं. आचार्य मदन मोहन ने बताया कि निकलते समय पीछे से टोकने को शुभ संकल्प में बाधा से जोड़कर देखा जाता है.
शुभ काम में आ सकती है रुकावट
आचार्य मदन मोहन के अनुसार, जब कोई व्यक्ति किसी खास उद्देश्य से घर से निकलता है तो उसका ध्याान अपने लक्ष्य पर होता है. पीछे से आवाज आने पर उसका संकल्प और काम का प्रवाह टूटने की मान्यता है. इससे काम में बाधा आने की आशंका मानी जाती है.
राहु और नकारात्मक ऊर्जा से जाता है जोड़ा
उन्होंने कहा कि शुभ काम के लिए निकलते समय सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है. अचानक पीछे से टोकने को राहु के अशुभ प्रभाव और नकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है. इससे मन अशांत और व्यक्ति असहज महसूस कर सकता है.
एकाग्रता भी हो सकती है प्रभावित
आचार्य ने आगे बताया कि इस परंपरा का एक व्यावहारिक पक्ष भी है. अचानक पीछे से आवाज आाने पर व्यक्ति का ध्यान भटक सकता है. जल्दबाजी या घबराहट में वह रास्ते पर अपना ध्यान ठीक से नहीं रख पाता.
धन-संबंधी परेशानी की मान्यता
आचार्य मदन मोहन के अनुसार, घर की दहलीज पार करते समय टोकना मां लक्ष्मी के नाराज होने से भी जोड़ा जाता है. ऐसी मान्यता है कि इससे आर्थिक प्रगति और कामकाज में बाधा आ सकती है.
गलती से टोक दिया जाए तो क्या करें
साथ ही, अगर निकलते समय कोई पीछे से पुकार दे तो घबराने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि वापस आकर 1-2 मिनट बैठें, थोड़ा पानी पिएं, इष्टदेव का ध्यान करें और फिर शांत मन से बाहर निकलें.
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