गणेश चतुर्थी का त्योहार भगवान गणेश को समर्पित सबसे खास पर्वों में से एक है. भगवान गणेश विघ्नहर्ता हैं और उनकी पूजा करने से जीवन में आने वाली परेशानियां दूर होती हैं. इस साल गणेश चतुर्थी की शुरुआत 14 सितंबर से हो चुकी है और मुख्य गणेश विसर्जन यानी अनंत चतुर्दशी शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी. वहीं, परंपरा के अनुसार डेढ़, तीन, पांच या सात दिन पर विसर्जन (Ganesh Visarjan) करने वाले भक्त अपने तय दिनों के अनुसार विसर्जन कर रहे हैं. चलिए आपको बताते हैं गणेश विसर्जन कब और कैसे करें, गणेश विसर्जन के नियम, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि.
अनंत चतुर्दशी, 25 सितंबर
- लाभ- सुबह 07:41 से 09:12 तक
- अमृत- सुबह 09:12 से 10:42 तक
- अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 11:48 से 12:37 तक
- शुभ चौघड़िया- दोपहर 12:13 से 01:43 तक
- विजय मुहूर्त- दोपहर 02:13 से 03:01 तक
विसर्जन से पहले क्या करना चाहिए?
गणपति विसर्जन से पहले उत्तर पूजा और आरती की परंपरा निभाई जाती है. गणपति को नैवेद्य अर्पित करके उनसे परिवार पर कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की जाती है. इसके बाद श्रद्धापूर्वक गणपति को विदाई दी जाती है.
गणेश विसर्जन की सही पूजा विधि
अंतिम पूजन- विसर्जन से पहले बप्पा को स्नान कराएं. उन्हें नए वस्त्र, चंदन, रोली, अक्षत और दूर्वा घास अर्पित करें.
भोग और आरती- गणेश जी को मोदक, लड्डू और फल का भोग लगाएं. इसके बाद परिवार सहित कपूर या दीपक जलाकर उनकी आरती करें.
क्षमा प्रार्थना- पूजा के दौरान हुई किसी भी भूल या त्रुटि के लिए भगवान गणेश से हाथ जोड़कर क्षमा मांगें और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें.
दही-चावल का शगुन- विदाई से ठीक पहले गणेश जी की हथेली पर थोड़ा सा दही और चावल रखें, क्योंकि यह मान्यता है कि इससे बप्पा अगले वर्ष जल्दी लौटकर आते हैं.
विसर्जन प्रक्रिया- गणेश जी की मूर्ति को श्रद्धापूर्वक उठाकर साफ जल में प्रवाहित करें. विसर्जन के समय गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ का जयकारा लगाएं.
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