राधा अष्टमी का व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है. इस दिन सुबह जल्दी स्नान करके राधा-कृष्ण की पूजा का संकल्प लिया जाता है और दोपहर के शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से पूजा व कथा संपन्न की जाती है. राधा अष्टमी का व्रत राधारानी की कृपा पाने और प्रेम, सुख-समृद्धि की कामना के लिए बेहद शुभ माना जाता है. इस साल राधा अष्टमी की व्रत 19 सितंबर को रखा जाएगा. चलिए आपको बताते हैं राधा अष्टमी का व्रत कैसे रखें, राधा अष्टमी व्रत नियम, पूजा विधि और व्रत खोलने का समय क्या है?
राधा अष्टमी व्रत और मुहूर्त
अष्टमी तिथि की शुरुआत- 18 सितंबर 2026 को दोपहर 1:02 बजे
अष्टमी तिथि का समापन- 19 सितंबर 2026 को दोपहर 3:28 बजे
मध्याह्न पूजा का शुभ मुहूर्त- सुबह 11:01 बजे से दोपहर 1:28 बजे तक (अवधि: लगभग 2 घंटे 27 मिनट)
राधा अष्टमी के दिन क्या खाएं क्या न खाएं
राधा अष्टमी के दिन अगर आपने व्रत रखा है, तो व्रत के दौरान आप फल, दूध, और मेवे यानी ड्राई फ्रूट्स का सेवन कर सकते हैं. इसके अलावा कुट्टू या सिंघाड़े के आटे का फलाहार या सेंधा नमक का उपयोग कर सकते हैं. दोपहर में पूजा के बाद पंचामृत या चरणामृत ग्रहण करके व्रत का पारण किया जा सकता है. वहीं, व्रत के दौरान सामान्य अन्न, दाल, चावल और साधारण नमक का सेवन न करें. प्याज, लहसुन, मांसाहारी भोजन और मदिरा का सेवन भी नहीं करें.
राधा अष्टमी व्रत पूजा विधि
स्नान व संकल्प- सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें.
वेदी सजावट- पूजा स्थल को साफ करके राधा-कृष्ण की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें.
अभिषेक व श्रृंगार- अगर संभव हो, तो पंचामृत से राधा-कृष्ण का अभिषेक करें और उन्हें सुंदर वस्त्र व फूलों से सजाएं.
भोग अर्पण- भगवान को फल, खीर, मालपुआ, माखन-मिश्री या सात्विक मिठाइयों का भोग लगाएं. भोग में तुलसी जरूर शामिल करें.
कथा और आरती- राधा अष्टमी की व्रत कथा सुनें या पढ़ें और अंत में राधा रानी व श्री कृष्ण की आरती करें.
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