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Bakrid 2026: बकरीद 2026 कब है? जानिए भारत और सऊदी में कब मनाई जाएगी ईद-उल-अजहा?

Bakrid 2026: ईद-उल-अज़हा यानी बकरीद का त्योहार मुसलमानों के लिए बहुत खास होता है. यह त्योहार दुनिया भर के मुसलमान बहुत खुशी और उत्साह के साथ मनाते हैं.

Bakrid 2026: बकरीद 2026 कब है? जानिए भारत और सऊदी में कब मनाई जाएगी ईद-उल-अजहा?
Bakra Eid kab hai
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Bakrid 2026: दुनियाभर के मुसलमान ईद-उल-अज़हा यानी बकरीद मनाने की तैयारी कर रहे हैं. मुसलमानों के दो बड़े और प्रमुख त्योहार होते हैं ईद-उल-फित्र और ईद-उल-अज़हा (बकरीद). इस्लामी चंद्र कैलेंडर के अनुसार, ईद-उल-फित्र आमतौर पर अप्रैल में मनाई जाती है, जबकि ईद-उल-अज़हा जुल हिज्जा महीने में मनाई जाती है, जो इस्लामी साल का 12वां महीना होता है. यह त्योहार दुनिया भर के मुसलमान बहुत खुशी और उत्साह के साथ मनाते हैं. इसी महीने में हज यात्रा भी होती है, जिसके लिए मुसलमान सऊदी अरब के मक्का शहर जाते हैं. जुल हिज्जा महीने की शुरुआत चांद दिखने के साथ होती है.

भारत में ईद-उल-अजहा (बकरीद) कब मनाई जाएगी?

सऊदी अरब, यूएई और पाकिस्तान जैसे देशों में 18 मई को चांद नजर आ गया था, जिससे वहां जुल हिज्जा महीना शुरू हो गया. इस वजह से इन देशों में ईद-उल-अज़हा (बकरीद) 27 मई 2026 को मनाई जाएगी, जबकि भारत में यह त्योहार एक दिन बाद मनाया जाएगा.

बकरीद का महत्व

ईद-उल-अज़हा (बकरीद) का त्योहार मुसलमानों के लिए बहुत खास होता है और इसे पूरी दुनिया में बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है. यह दिन हजरत इब्राहिम की उस कुर्बानी और अल्लाह के प्रति उनकी निष्ठा को याद करता है, जब वे अल्लाह के हुक्म का पालन करने के लिए अपने बेटे की कुर्बानी देने को तैयार हो गए थे. इस्लामी मान्यता के अनुसार, हजरत इब्राहिम को सपने में अल्लाह का आदेश मिला था कि वे अपने बेटे की कुर्बानी दें. उन्होंने अल्लाह के आदेश को मानने का फैसला किया, लेकिन कुर्बानी से पहले ही अल्लाह ने उनकी आस्था को स्वीकार कर लिया और उनके बेटे की जगह एक जानवर कुर्बानी के लिए भेज दिया. तभी से मुसलमान इस दिन को नमाज, कुर्बानी, दान और परिवार के साथ मिलकर मनाते हैं.

बकरीद कैसे मनाई जाती है? (How Bakra Eid is celebrated)

इस दिन लोग सुबह जल्दी उठकर नहाते हैं और अल्लाह की इबादत करते हैं. परिवार के बड़े पुरुष साफ और पारंपरिक कपड़े पहनकर मस्जिद जाते हैं और नमाज पढ़ते हैं. नमाज के बाद जानवर की कुर्बानी दी जाती है और अल्लाह का शुक्रिया अदा किया जाता है. इसके बाद लोग अपने रिश्तेदारों और दोस्तों से मिलते हैं, गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद करते हैं, खाने-पीने की चीजें और नए कपड़े बांटते हैं.

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