सावन का महीना शुरू हो चुका है और इस माह में चारों ओर बम-बम भोले के जयकारों की गूंज ही सुनाई देती है. साथ ही शिव भक्तों में भी काफी ज्यादा उत्साह देखने को मिलता है. हर साल लाखों श्रद्धालु कठिन नियमों और श्रद्धा के साथ कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं. इन श्रद्धालुओं में महिलाएं भी बड़ी संख्या में होती हैं. लेकिन इस दौरान महिलाओं के मन में यह भी सवाल आता है कि क्या पीरियड्स यानी मासिक धर्म के दौरान कांवड़ यात्रा की जा सकती है. आज हम आपकी इसी दुविधा को दूर करने जा रहे हैं. आइए जानते हैं इस स्थिति में धार्मिक मान्यताएं क्या हैं और महिलाओं को किन नियमों का पालन करना चाहिए. इसकी जानकारी ज्योतिषाचार्य डॉक्टर गौरव कुमार दीक्षित ने NDTV से बातचीत के दौरान दी है. आइए जानते हैं...
क्या पीरियड्स के दौरान की जा सकती है कांवड़ यात्रा?
ज्योतिषाचार्य गौरव बताते हैं कि कांवड़ यात्रा को काफी पवित्र यात्रा माना गया है. हमारे शास्त्रों के अनुसार इसमें पवित्र नदियों से जल भरकर शिवलिंग पर अर्पित किया जाता है. उन्होंने आगे बताया कि ऐसे में यदि कोई महिला कांवड़ यात्रा में शामिल हो और यात्रा के दौरान अचानक उन्हें पीरियड्स आ जाएं, तो कांवड़ और संबंधित धार्मिक कार्यों से दूरी बना लेनी चाहिए. ज्योतिषाचार्य के अनुसार मान्यता है कि अगर ऐसी स्थिति में महिला कांवड़ के जल या कांवड़ से जुड़ी किसी भी वस्तु को स्पर्श करती है, तो वह अशुद्ध मानी जाती है.

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मानसिक रूप से कर सकती हैं पूजा
ज्योतिषाचार्य ने आगे बताया कि अगर वह यात्रा में साथ रहना चाहती हैं, तो केवल साथ चल सकती हैं. वह मानसिक रूप से पूजा कर सकती हैं, भगवान शिव का ध्यान कर सकती हैं. लेकिन मूर्ति और कांवड़ का स्पर्श निषेध माना जाता है. मान्यता के अनुसार, यदि ऐसी महिला कांवड़ या मूर्ति को स्पर्श कर लेती है, तो कांवड़ चढ़ाने की प्रक्रिया अशुद्ध मानी जाती है और कांवड़ खंडित हो जाता है.
अगर कांवड़ यात्रा के दौरान किसी महिला को पीरियड्स आ जाएं और वह कांवड़ लेकर चल रही हो, तो उसे अपनी कांवड़ अपने परिवार के किसी सदस्य या साथ यात्रा कर रहे किसी अन्य श्रद्धालु को सौंप देनी चाहिए. आमतौर पर कांवड़ यात्रा में कई लोग पूरे ग्रुप के साथ चलते हैं, इसलिए कांवड़ को किसी अन्य साथी को सौंपा जा सकता है.
कब चढ़ाया जा सकता है जल?
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि ऐसी स्थिति में, जब मासिक धर्म के पांच दिन पूरे हो जाएं, तो सिर धोने और शुद्धि के बाद अगर महिला चाहे, तो शिवलिंग पर जल भी अर्पित कर सकती हैं.
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