आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का पावन पर्व आज यानी 15 जुलाई 2026 से शुरू हो गया है. हिंदू धर्म में इस नवरात्रि को साधना, भक्ति और मां आदिशक्ति की विशेष आराधना का समय माना जाता है. पंचांग के अनुसार, साल में कुल चार नवरात्रि आती हैं. इनमें चैत्र और शारदीय नवरात्रि सबसे अधिक प्रसिद्ध हैं, जबकि आषाढ़ और माघ की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है. इन दिनों में मां आदिशक्ति की गुप्त रूप से आराधना की जाती है. मान्यता है कि श्रद्धा और नियम के साथ की गई पूजा से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है. इस वर्ष आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई से शुरू होकर 23 जुलाई 2026 तक चलेगी.
देवी के इन स्वरूपों की होती है पूजा
गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा के दस महाविद्या स्वरूपों की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है. इन नौ दिनों में मां काली, मां तारा, मां त्रिपुर सुंदरी, मां भुवनेश्वरी, मां त्रिपुर भैरवी, मां छिन्नमस्ता, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मां मातंगी और मां कमला देवी की विधि-विधान से आराधना की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि इन स्वरूपों की पूजा से आध्यात्मिक शक्ति, आत्मविश्वास और देवी का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है.
घटस्थापना का शुभ मुहूर्तपंचांग के अनुसार, 15 जुलाई 2026 को आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि सुबह 11:51 बजे तक है. इसके बाद द्वितीया लग जाएगी. बुधवार को आषाढ़ गुप्त नवरात्र का पहला दिन (प्रतिपदा) है. घटस्थापना के लिए सुबह 6 बजकर 3 मिनट से सुबह 8 बजकर 20 मिनट तक का समय शुभ माना जा रहा है.
ऐसे करें घटस्थापना- सुबह स्नान करके साफ और स्वच्छ वस्त्र पहनें.
- इसके बाद पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई करें और गंगाजल से शुद्ध कर लें.
- अब, एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर मां के दस महाविद्या स्वरूपों का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें.
- मिट्टी या तांबे के कलश में स्वच्छ जल भरें, उसमें आम के पत्ते रखें और ऊपर नारियल स्थापित करें.
- मां का ध्यान करते हुए कलश की स्थापना करें और अखंड दीप जलाएं.
- कलश स्थापना के बाद मां दुर्गा का ध्यान करें और श्रद्धा के साथ दुर्गा सप्तशती का पाठ करें.
- इसके बाद मां को भोग अर्पित करें.
- आरती करें और पूजा के अंत में माता से जाने-अनजाने में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा मांगें.
मान्यता है कि पूरे नियम, श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई पूजा मां आदिशक्ति की कृपा दिलाती है और भक्त के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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