Adhik Guru Pradosh Vrat Ke Upay: सनतान परंपरा में हर महीने कृष्णपक्ष और शुक्लपक्ष में पड़ने वाली त्रयोदशी तिथि का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है क्योंकि यह देवों के देव यानि महादेव की पूजा, व्रत और उपवास के लिए समर्पित है. इस पावन तिथि का महत्व तब और अधिक बढ़ जाता है, जब यह गुरुवार के दिन पड़ता है और गुरु प्रदोष व्रत कहलाता है. पंचांग के अनुसार आज यह गुरु प्रदोष व्रत है. गुरु प्रदोष व्रत का अधिक मास के साथ संयोग मिलने से यह व्रत कई गुना ज्यादा शुभ और फलदायी हो गया है. ऐसे में आज भगवान शिव और देवगुरु बृहस्पति की पूजा के साथ श्री हरि का आशीर्वाद पाने के लिए पूजा में कौन से उपाय करने चाहिए, आइए इसे विस्तार से जानते हैं.

1. कनेर के फूल से खुलेगा बंद किस्मत का दरवाजा
हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान शिव को कनेर का पुष्प और बेलपत्र बहुत प्रिय है. ऐसे में आज गुरु प्रदोष व्रत वाले दिन भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए पीले रंग वाले कनेर के पुष्प तथा बेलपत्र में पीले चंदन से श्री राम लिखकर अर्पित करें. मान्यता है कि पूजा के इस उपाय को करने पर शिव कृपा से शीघ्र ही सभी बाधाएं दूर और सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है. मान्यता है कि शिव पूजा का यह उपाय सभी मनोकामनाओं को पूरा करने वाला है.
2. जल में हल्दी डाल कर करें स्नान

हिंदू मान्यता के अनुसार आज शिव साधक को भगवान भोलेनाथ की पूजा करने से पहले पानी में एक चुटकी हल्दी मिलाकर स्नान करना चाहिए. इसी प्रकार शिव पूजा में पीले पुष्प, पीले रंग का आसन, पीले रंग के वस्त्र और पीले रंग के फल अर्पित करने पर महादेव शीघ्र ही प्रसन्न होकर सभी मनोकामनाओं को पूरा करते हैं.
3. शिव पूजा में जरूर पढ़ें प्रदोष व्रत की कथा

हिंदू मान्यता के अनुसार आज गुरु प्रदोष व्रत की पूजा का पूरा पुण्यफल पाने के लिए साधक को भगवान शिव की महिमा का बखान करने वाली पावन व्रत कथा का पाठ अवश्य करना चाहिए. हिंदू मान्यता के अनुसार प्रदोष व्रत की पूजा तब तक अधूरी है जब तक आप उसमें कथा का पाठ कहते या फिर सुनते नहीं हैं.
4. करियर-कारोबार की बाधा दूर करने का उपाय

यदि आपको लगता है कि आपके करियर और कारोबार में बहुत ज्यादा बाधाएं आ रही हैं तो आपको उसे दूर करने के लिए आज किसी शिवालय में जाकर गन्ने के रस से शिवलिंग का अभिषेक करें तथा शमी के पत्र अर्पित करके हृीं शिवाय नम: मंत्र का कम से कम 108 बार जप जरूर करें.
5. गुरु प्रदोष व्रत पर बरसेगा 'हरि-हर' का आशीर्वाद

गुरु प्रदोष व्रत वाले दिन यदि आप पूजा का अधिक से अधिक पुण्यफल पाना चाहते हैं तो शिव साधना के लिए सबसे उत्तम समय यानि प्रदोष काल में ही पूजा करें. हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान शिव की पूजा में यदि गंगाजल से जलाभिषेक किया जाए तो शीघ्र ही उनकी कृपा प्राप्त होती है. इसी प्रकार आज शाम को शिव पूजा के साथ तुलसी के पौधे और बेल के पेड़ की पूजा भी अवश्य करें.
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सायंकाल तुलसी के पौधे और बेल के पेड़ के नीचे शुद्ध देशी घी का दीया जलाकर परिक्रमा करें. मान्यता है कि अधिक मास के गुरु प्रदोष व्रत की पूजा का यह उपाय शत्रुओं पर विजय दिलाते हुए सभी कामनाओं को पूरा करता है. पूजा के इस उपाय से शिव संग श्री हरि और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा बरसती है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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