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5 मार्च का पंचांग: गुरुवार को अभिजित के साथ विजय मुहूर्त का संयोग, जान लें भद्रा का समय

Aaj Ka Panchang: 5 मार्च को गुरुवार और कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि रहेगी, जो शाम 5 बजकर 3 मिनट तक चलेगी. इसके बाद तृतीया तिथि शुरू होगी. उदयातिथि के अनुसार पूरे दिन द्वितीया तिथि रहेगी. पढ़ें आज का पंचांग

5 मार्च का पंचांग: गुरुवार को अभिजित के साथ विजय मुहूर्त का संयोग, जान लें भद्रा का समय
Aaj Ka Panchang: 5 मार्च का पंचांग

Aaj Ka Panchang: सनातन धर्म में पंचांग का विशेष महत्व है. यह रोजाना के शुभ-अशुभ मुहूर्त, तिथि, नक्षत्र, योग और विभिन्न कालों की पूरी जानकारी देता है. 5 मार्च को गुरुवार और कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि रहेगी, जो शाम 5 बजकर 3 मिनट तक चलेगी. इसके बाद तृतीया तिथि शुरू होगी. उदयातिथि के अनुसार पूरे दिन द्वितीया तिथि रहेगी. 

नक्षत्र की बात करें तो उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र सुबह 8 बजकर 17 मिनट तक रहेगा, उसके बाद हस्त नक्षत्र शुरू हो जाएगा. दिन का योग शूल रहेगा, जो सुबह 7 बजकर 46 मिनट तक प्रभावी रहेगा. करण गर शाम 5 बजकर 3 मिनट तक रहेगा.

कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि की शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 4 मिनट से 5 बजकर 53 मिनट तक रहेगा. सबसे महत्वपूर्ण है अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 9 मिनट से 12 बजकर 56 मिनट तक, जिसमें इस दिन विजय मुहूर्त का भी संयोग बन रहा है. विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 16 मिनट तक रहेगा. यह दोनों शुभ मुहूर्त नए कार्य, शुभ कार्य या महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए अत्यंत उत्तम माने जाते हैं. वहीं, गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 21 मिनट से 6 बजकर 46 मिनट तक रहेगी.

गुरुवार को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 42 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजकर 23 मिनट पर होगा. वहीं, सुबह अमृतकाल 3 बजकर 11 मिनट से अगले दिन 4 बजकर 52 मिनट रहेगा.

अशुभ समय में राहुकाल दोपहर 2 बजे से 3 बजकर 28 मिनट तक रहेगा. यमगण्ड सुबह 6 बजकर 42 मिनट से 8 बजकर 10 मिनट तक, गुलिक काल सुबह 9 बजकर 37 मिनट से 11 बजकर 5 मिनट तक और दोपहर 3 बजकर 16 मिनट से 4 बजकर 3 मिनट तक रहेगा. दुर्मुहूर्त सुबह 10 बजकर 36 मिनट से 11 बजकर 23 मिनट तक और दोपहर 3 बजकर 16 मिनट से 4 बजकर 3 मिनट तक रहेगा. गुरुवार को भद्रा की छाया भी रहेगी.

गुरुवार नारायण, विजय की देवी मां पितांबरा और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित है. इस पूजा -पाठ में पीले चीजों का इस्तेमाल करना चाहिए. नारायण को केला, हल्दी और गुड़ के साथ चने की दाल, पीली मिठाई चढ़ाने और भोग लगाने का विधान है.
 

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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