अमेरिका में H-1B वीजा को लेकर बहस कोई नई नहीं है. लेकिन इस बार मामला सिर्फ नौकरियों या वीजा नीति तक सीमित नहीं रहा. अमेरिकी सीनेटर एरिक श्मिट (Eric Schmitt) ने हैदराबाद के मशहूर चिलकुर बालाजी मंदिर को ही निशाने पर ले लिया. यही मंदिर 'वीजा मंदिर' या 'वीजा बालाजी' के नाम से दुनिया भर में जाना जाता है.
एरिक श्मिट ने मंदिर को कथित “वीजा कार्टेल” का हिस्सा बताते हुए कहा कि अमेरिकी कर्मचारियों को ऐसे “गेम्ड सिस्टम” से मुकाबला नहीं करना चाहिए, जहां 'कार्टेल और मंदिर' दोनों मौजूद हों. उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली और कई लोगों ने इसे भारतीयों और हिंदुओं के प्रति अपमानजनक बताया.
The "Visa Cartel" has its own “Visa Temple” in Hyderabad, which sees thousands of Indians circling altars and getting passports blessed for U.S. work visas.
— Senator Eric Schmitt (@SenEricSchmitt) May 13, 2026
American workers shouldn't have to compete against a system this gamed. pic.twitter.com/k7wSlECTJ6
क्या है हैदराबाद का ‘वीजा मंदिर'?
हैदराबाद से करीब 30 किलोमीटर दूर उस्मान सागर झील के पास स्थित चिलकुर बालाजी मंदिर करीब 500 साल पुराना मंदिर है. पिछले तीन दशकों में यह मंदिर खास तौर पर उन छात्रों और IT प्रोफेशनल्स के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ, जो अमेरिका जाने का सपना देखते हैं.
1990 के दशक में जब हैदराबाद से बड़ी संख्या में इंजीनियर और सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल अमेरिका जाने लगे, तब इस मंदिर की पहचान 'वीजा मंदिर' के रूप में बनने लगी. यहां आने वाले श्रद्धालु भगवान बालाजी से US वीजा मिलने की प्रार्थना करते हैं.
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मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां:
- दानपेटी नहीं है.
- VIP दर्शन नहीं होते.
- पैसे, फूल या नारियल चढ़ाने की अनुमति नहीं है.
यहां की परंपरा भी अनोखी है. श्रद्धालु पहले 11 परिक्रमा लगाकर मनोकामना मांगते हैं. अगर वीजा मिल जाए, तो वे लौटकर 108 परिक्रमा पूरी करते हैं.
हर हफ्ते करीब 70 हजार लोग यहां आते हैं. हालांकि रिपोर्ट्स के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में लौटने के बाद मंदिर आने वालों की संख्या में कुछ गिरावट दर्ज की गई है. मंदिर के मुख्य पुजारी सीएस रंगराजन ने कहा था, 'ट्रंप अस्थायी हैं, हमारे बालाजी स्थायी हैं.'
आखिर अमेरिका में H-1B पर इतना विवाद क्यों?
H-1B वीजा अमेरिका का वह प्रोग्राम है, जिसके जरिए विदेशी स्किल्ड प्रोफेशनल्स खासकर भारतीय IT इंजीनियर अमेरिकी कंपनियों में काम करते हैं. लंबे समय से अमेरिकी राजनीति में एक धड़ा यह आरोप लगाता रहा है कि बड़ी टेक कंपनियां सस्ते विदेशी कर्मचारियों को रखकर अमेरिकी कर्मचारियों की नौकरियां और वेतन प्रभावित करती हैं.
माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों का नाम लेते हुए श्मिट ने दावा किया कि हजारों अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी के बावजूद कंपनियां H-1B वीजा के जरिए विदेशी कर्मचारियों को कम वेतन पर भर्ती कर रही हैं. उन्होंने X पर लिखा कि यह एक 'ग्लोबल वीजा कार्टेल' है, जिसमें विदेशी रिक्रूटमेंट नेटवर्क, फर्जी रिज्यूमे, शेल कंपनियां और किकबैक स्कीम जैसे तरीके इस्तेमाल किए जाते हैं. इसी दौरान उन्होंने हैदराबाद के 'वीजा मंदिर' का जिक्र करते हुए कहा कि यह उस 'संगठित वीजा पाइपलाइन' का प्रतीक है, जहां हजारों भारतीय US वीजा के लिए मंदिर में पूजा करते हैं.
सोशल मीडिया पर क्यों भड़के लोग?
श्मिट के बयान के बाद भारतीयों ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी. कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि अगर चर्च में लोग नौकरी, स्वास्थ्य या सफलता के लिए प्रार्थना करते हैं, तो मंदिर में वीजा के लिए प्रार्थना करने में क्या गलत है? कुछ लोगों ने इसे नस्लवादी और हिंदू विरोधी टिप्पणी बताया. कई यूजर्स ने लिखा कि मंदिर में प्रार्थना करने से वीजा अपने आप नहीं मिलता. अंतिम फैसला तो अमेरिकी दूतावास ही करता है. भारतीय प्रोफेशनल्स अमेरिकी टेक सेक्टर में बड़ा योगदान देते हैं.
सिर्फ आस्था या भारत के ग्लोबल IT प्रभाव का प्रतीक?
दरअसल, चिलकुर बालाजी मंदिर सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत के IT माइग्रेशन और अमेरिकी सपने का सांस्कृतिक प्रतीक भी बन चुका है. हजारों भारतीय छात्र और इंजीनियर अमेरिका जाने से पहले यहां माथा टेकते हैं. इसलिए जब अमेरिकी राजनीति में H-1B को लेकर गुस्सा बढ़ता है, तो यह मंदिर भी प्रतीकात्मक बहस का हिस्सा बन जाता है. लेकिन भारत में बड़ी संख्या में लोग इसे सिर्फ 'आस्था' मानते हैं, न कि किसी 'वीजा कार्टेल' का हिस्सा.
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