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अदाणी फाउंडेशन और अनुष्का फाउंडेशन ने मिलाया हाथ, 10 हजार बच्चों की बदलेगी जिंदगी

अदाणी फाउंडेशन ने अनुष्का फाउंडेशन के साथ तीन साल की साझेदारी की घोषणा की है. इससे क्लबफुट की समस्या से जूझ रहे 10 हजार से ज्यादा बच्चों की जिंदगी बदलेगी.

अदाणी फाउंडेशन और अनुष्का फाउंडेशन ने मिलाया हाथ, 10 हजार बच्चों की बदलेगी जिंदगी
अदाणी फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अदाणी.
नई दिल्ली:

अदाणी समूह की सामाजिक शाखा अदाणी फाउंडेशन और क्लबफुट उन्मूलन के लिए काम करने वाली गैर-लाभकारी संस्था अनुष्का फाउंडेशन ने विश्व क्लबफुट दिवस के मौके पर तीन साल की साझेदारी की घोषणा की है. इस पहल के तहत मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के 61 जिलों में क्लबफुट (टेढ़े पैर) से प्रभावित 10 हजार से ज्यादा बच्चों को इलाज और लंबे समय तक देखभाल का लाभ मिलेगा.

इस साझेदारी की औपचारिक शुरुआत कानपुर स्थित मान्यवर कांशीराम संयुक्त चिकित्सालय और ट्रॉमा सेंटर में किया गया, जो यूपी के प्रमुख संस्थानों में से एक है. यूपी देश के क्लबफुट के सबसे ज्यादा मामलों वाले राज्यों में शामिल है, जहां हर साल लगभग 6 हजार बच्चे इस स्थिति के साथ जन्म लेते हैं. राज्य के सबसे बड़े जिलों में से एक कानपुर इस चुनौती की गंभीरता और समय पर इलाज की जरूरत को दिखाता है.

क्या है क्लबफुट?

क्लबफुट एक जन्मजात स्थिति है, जिसमें बच्चे का एक या दोनों पैर जन्म के समय अंदर की ओर मुड़े हुए होते हैं. यह समस्या लगभग हर 800 नवजातों में से एक को प्रभावित करती है. हालांकि, विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त पोंसेटी पद्धति के जरिए इसका प्रभावी इलाज संभल है लेकिन आज भी वंचित समुदायों के अनेक बच्चों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता, जिससे उनकी गतिशीलता, आत्मविश्वास और जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होती है.

10 हजार बच्चों को मिलेगा लाभ

अनुष्का फाउंडेशन के मौजूदा क्लबफुट कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए यह पहल अगले तीन सालों में 10 हजार से ज्यादा बच्चों तक पहुंचेगी. इसमें सामुदायिक जागरूकता, मेडिकल केयर, क्षमता निर्माण और परिवारों को सहयोग जैसे महत्वपूर्ण पहलू शामिल होंगे. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के सहयोग से यह कार्यक्रम शुरुआती पहचान, रेफरल सिस्टम और सार्वजनिक हेल्थ नेटवर्क के माध्यम से इलाज की पहुंच को मजबूत करेगा.

कार्यक्रम के तहत 5 राज्यों के 61 जिलों में स्थित 67 क्लबफुट क्लीनिकों को सहयोग दिया जाएगा. साथ ही 51 स्वास्थ्य पेशेवरों की क्षमता को मजबूत किया जाएगा और 30 हजार से ज्यादा फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर को प्रशिक्षित और संवेदनशील बनाया जाएगा, ताकि बच्चों की समय पर पहचान और इलाज सुनिश्चित हो सके.

भारत में हर साल लगभग 33 हजार बच्चे क्लबफुट के साथ जन्म लेते हैं, जिनमें से लगभग 12 हजार बच्चे उन 5 राज्यों में जन्म लेते हैं, जहां यह कार्यक्रम लागू किया जाएगा. इलाज की पहुंच बढ़ाने, रेफरल व्यवस्था को मजबूत करने और उपचार की पूरी प्रक्रिया के दौरान परिवारों को सहयोग प्रदान करने के माध्यम से यह पहल देश में क्लबफुट की चुनौती से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.

'किसी बच्चे की प्रगति में बाधा नहीं आनी चाहिए'

इस मौके पर अदाणी फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अदाणी ने कहा कि 'क्लबफुट जैसी स्थिति जिसका समय पर पहचान होने पर प्रभावी इलाज संभव है, किसी भी बच्चे की प्रगति में बाधा नहीं बननी चाहिए. हर बच्चे को चलने, सीखने, खेलने और जीवन में पूरी भागीदारी निभाने का अवसर मिलना चाहिए. विशेष रूप से सक्षम व्यक्तियों के लिए अवसरों का निर्माण करना हमेशा से अदाणी फाउंडेशन की सोच का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है.'

उन्होंने कहा, 'अनुष्का फाउंडेशन एक ऐसे भविष्य की दिशा में काम कर रहा है, जहां क्लबफुट जैसी समस्या न रहे. हमें इस मिशन को आगे बढ़ाने में सहयोगी बनने पर गर्व है. हम ज्यादा से ज्यादा बच्चों को सम्मान, आत्मनिर्भरता और अपनी पूरी क्षमता को हासिल करने का अवसर देने का प्रयास करेंगे.'

वहीं, अनुष्का फाउंडेशन के संस्थापक दीपक प्रेमनारायण ने कहा, 'क्लबफुट बचपन में होने वाली उन चुनिंदा शारीरिक चुनौतियों में से एक है, जिनका प्रभावी इलाज संभव है. इसके बावजूद हर साल हजारों बच्चे समय पर इलाज से वंचित रह जाते हैं. अदाणी फाउंडेशन के साथ यह साझेदारी पांच राज्यों के 61 जिलों में गुणवत्तापूर्ण इलाज की पहुंच बढ़ाने के साथ-साथ शुरुआती पहचान और समय पर हस्तक्षेप की व्यवस्था को भी मजबूत करेगी. हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिस स्थिति का इलाज संभव है, वह किसी भी बच्चे की शिक्षा और जीवन के अवसरों के रास्ते में आजीवन बाधा न बने.'

22 राज्यों में कार्यरत है अदाणी फाउंडेशन

11 अगस्त को अदाणी फाउंडेशन अपनी स्थापना के 30 साल पूरे करने जा रहा है. यह पहल समुदाय केंद्रित विकास के प्रति उसकी निरंतर प्रतिबद्धता को दिखाती है. वर्तमान में अदाणी फाउंडेशन 22 राज्यों के 7,247 गांवों में कार्यरत है और हर साल 1.33 करोड़ से ज्यादा लोगों के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहा है. इसके कार्यक्रम स्वास्थ्य, शिक्षा, सतत आजीविका, जलवायु और सामुदायिक विकास जैसे क्षेत्रों में संचालित हैं.

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