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This Article is From Jan 21, 2026

हम टेबल पर नहीं आए तो मेन्यू में होंगे... जाने कनाडाई पीएम ने किस पर किया सबसे करारा वार

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने दावोस में साफ कहा कि दुनिया अब किसी सामान्य बदलाव से नहीं बल्कि विनाशकारी दरार के दौर गुजर रही है, जहां दशकों पुरानी नियम आधारित व्यवस्था अब धुंधली पड़ती जा रही है.

हम टेबल पर नहीं आए तो मेन्यू में होंगे... जाने कनाडाई पीएम ने किस पर किया सबसे करारा वार
  • दावोस में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिका की नेतृत्व वाली वैश्विक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए
  • कार्नी ने कहा कि दुनिया अब विनाशकारी दरार के दौर से गुजर रही है, दशकों पुरानी व्यवस्था कमजोर हो रही है
  • कनाडाई पीएम ने कहा कि मिडिल पावर्स को एकजुट होकर काम करना होगा. अगर हम टेबल पर नहीं हुए तो मेन्यू में होंगे

दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की सालाना बैठक के बीच कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिका की अगुआई वाली वैश्विक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए गंभीर चेतावनी दी. कार्नी ने साफ कहा कि दुनिया अब किसी सामान्य बदलाव से नहीं बल्कि विनाशकारी दरार के दौर गुजर रही है, जहां दशकों पुरानी नियम आधारित व्यवस्था अब धुंधली पड़ती जा रही है. उन्होंने अमेरिका को दुनिया भर में अपनी मनमर्जी थोपने के लिए भी आड़े हाथ लिया. 

कनाडाई पीएम ने साफ कहा कि मिडिल पावर्स को एकजुट होकर काम करना होगा. अगर हम टेबल पर नहीं हुए तो मेन्यू में होंगे. उनका इशारा साफ था कि अगर कनाडा जैसे देश एकजुट नहीं हुए तो महाशक्तियां उन्हें अपनी मर्जी के मुताबिक इस्तेमाल करेंगी. उनका ये भी कहना था कि अब नियमों का पालन करने मात्र से सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलेगी.

दावोस में दुनिया भर के राजनीतिक और वित्तीय दिग्गजों को संबोधित करते हुए कार्नी का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावोस पहुंचने से ठीक पहले आया, जिसे सीधे तौर पर ट्रंप की "अमेरिका फर्स्ट" और विस्तारवादी नीतियों का सबसे तीखा जवाब माना जा रहा है. हालांकि कार्नी ने ट्रंप का नाम नहीं लिया.  

प्रधानमंत्री कार्नी ने कहा कि कनाडा जैसे देशों ने दशकों तक अमेरिकी वर्चस्व वाली उस व्यवस्था का लाभ उठाया जिसने समुद्री रास्तों की सुरक्षा, स्थिर वित्तीय प्रणाली और विवादों को सुलझाने के लिए एक सिस्टम प्रदान किया. लेकिन अब वास्तविकताएं बदल चुकी हैं. उन्होंने कहा कि अब व्यवस्था ऐसी हो गई है जहां ताकतवर देश आर्थिक एकीकरण का इस्तेमाल अपनी मर्जी थोपने और दूसरों को मजबूर करने के औजार के रूप में कर रहे हैं.

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बड़ी शक्तियों को खुश करने की कोशिशों के खिलाफ चेतावनी देते हुए कार्नी ने कहा कि कनाडा जैसे देश अब इस उम्मीद में नहीं रह सकते कि नियमों का पालन करने से वे सुरक्षित रहेंगे. उन्होंने दोटूक कहा कि ऐसा नहीं होने वाला है. कनाडा जैसे मंझले देशों के लिए अब सवाल यह नहीं है कि उन्हें इस नई सच्चाई के साथ ढलना है या नहीं, क्योंकि उनके पास और कोई चारा नहीं है. असली सवाल यह है कि क्या वो सिर्फ ऊंची दीवारें बनाकर खुद को सुरक्षित रख पाएंगे या फिर कुछ बड़ा और साहसी कदम उठाएंगे.

कार्नी ने कहा कि मंझले देशों को अब एकजुट होकर काम करना होगा. उन्होंने मुहावरे के जरिए समझाया कि अगर हम बातचीत की मेज पर मौजूद नहीं होंगे, तो हम दूसरों के खाने के मेन्यू में शामिल होकर शिकार हो जाएंगे. उनका कहना था कि कि बड़ी शक्तियां फिलहाल अकेले चलने का जोखिम उठा सकती हैं क्योंकि उनके पास बड़ा बाजार, सैन्य ताकत और शर्तें तय करने की क्षमता है लेकिन मंझले देशों के पास यह सुविधा नहीं है. 

यह बयान इस लिहाज से अहम है क्योंकि इस वक्त अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और कनाडा के बीच तनाव चरम पर है. ट्रंप ने हाल ही में कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बताया था और सोशल मीडिया पर एक नक्शा पोस्ट किया था जिसमें कनाडा को अमेरिकी झंडे से ढका दिखाया गया था. 

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