- संसद से पास हुए जन विश्वास (संशोधन) विधेयक 2026 में 79 केंद्रीय कानूनों के 784 प्रावधानों में संशोधन किए गए.
- 700 से अधिक छोटे अपराधों को डिक्रिमिनलाइज कर जुर्माना या चेतावनी के विकल्प अपनाने का प्रावधान रखा गया है.
- DL एक्सपायर होने के बाद 30 दिन तक वैध रहेगा और राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगाने पर जेल की सजा खत्म हुई है.
कभी ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यू कराने में देरी, कभी जन्म-मृत्यु की सूचना देने में चूक, या फिर किसी विरोध में सड़क जाम... अब तक ऐसी छोटी-छोटी गलतियां भी आपको अपराधी बना सकती थीं. लेकिन अब यह तस्वीर बदलने जा रही है. संसद से पास हुआ जन विश्वास (संशोधन) विधेयक 2026 कानून के उस पुराने ढांचे को बदलने की कोशिश है, जहां हर गलती का जवाब जेल से दिया जाता था. अब सरकार 'सजा' की जगह 'सुधार' पर जोर देती दिख रही है.
700 से ज्यादा अपराध खत्म, कानून हुआ हल्का
इस विधेयक के तहत 79 केंद्रीय कानूनों के 784 प्रावधानों में संशोधन किया गया है, जिनमें से 700 से ज्यादा छोटे अपराधों को पूरी तरह डिक्रिमिनलाइज कर दिया गया है. यानी अब ये अपराध नहीं माने जाएंगे, बल्कि अधिकतर मामलों में जुर्माना या चेतावनी जैसे विकल्प अपनाए जाएंगे. सरकार का मानना है कि इससे आम आदमी को राहत मिलेगी और न्याय व्यवस्था पर अनावश्यक दबाव भी कम होगा.

DL से लेकर हाईवे जाम तक, सीधा असर आपकी जिंदगी पर
इस बदलाव का असर सीधे लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ेगा. अब ड्राइविंग लाइसेंस एक्सपायर होने के बाद 30 दिन तक वैध रहेगा, यानी मामूली देरी पर आप अपराधी नहीं बनेंगे. राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगाने जैसे मामलों में जेल का प्रावधान खत्म कर दिया गया है और इसे जुर्माने तक सीमित कर दिया गया है. इसी तरह आग का झूठा अलार्म देने, जन्म-मृत्यु की सूचना में देरी या बिजली नियमों के उल्लंघन जैसे मामलों में भी जेल की सजा हटाई गई है.
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छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत
यह कानून छोटे कारोबारियों के लिए भी राहत लेकर आया है. पहले जहां कॉस्मेटिक्स के नियमों के उल्लंघन पर जेल हो सकती थी, अब केवल जुर्माना लगेगा. इससे खासकर MSME सेक्टर को फायदा मिलने की उम्मीद है, जो अक्सर जटिल नियमों और सख्त दंड के कारण दबाव में रहता था.
राहत या जोखिम? बहस भी जारी
हालांकि, इस बदलाव को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं. कुछ लोगों का मानना है कि इससे कानून का डर कम हो सकता है और लोग जुर्माना भरकर नियमों को हल्के में लेने लगेंगे. वहीं सरकार का तर्क है कि यह कदम न्याय व्यवस्था को ज्यादा मानवीय और व्यावहारिक बनाने की दिशा में है.
नजरिया बदलने की कोशिश
कुल मिलाकर, जन विश्वास बिल सिर्फ कानूनों में बदलाव नहीं है, बल्कि शासन के नजरिये में बदलाव का संकेत है, जहां नागरिक को सजा देने से पहले उसे सुविधा और भरोसा देने की कोशिश की जा रही है.
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