Rajendra Bharti Disqualification: मध्य प्रदेश की सियासत एक बार फिर गर्मा गई है. दतिया विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने एक पुराने ग्रामीण बैंक धोखाधड़ी मामले में तीन साल की सजा सुनाई है. सजा का ऐलान होते ही विधानसभा सचिवालय ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उनकी अयोग्यता का गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया, जिसके बाद दतिया सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया. खास बात यह है कि राजेंद्र भारती ने इसी सीट से भाजपा के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा को हराया था. अब सवाल यही है कि क्या राजेंद्र भारती कानूनी रास्ते से अपनी विधायकी बचा पाएंगे, या दतिया में उपचुनाव तय है?
पहले देखिए राजेंद्र भारती की प्रतिक्रिया
#WATCH | Delhi's Rouse Avenue court awarded a 3-year sentence to Congress MLA Rajender Bharti in a Gramin Bank fraud case.
— ANI (@ANI) April 2, 2026
He says, "We respect the court's decision. However, this is entirely a political matter; our political adversaries have forcibly and fraudulently… https://t.co/XpkKvrcL1f pic.twitter.com/gtdVy33RQz
सजा के बाद तुरंत अयोग्यता, उठा बड़ा सवाल
दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट द्वारा तीन साल की सजा सुनाए जाने के कुछ ही घंटों के भीतर मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया. आधी रात में हुई इस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस ने तीखी आपत्ति दर्ज कराई है. पार्टी का कहना है कि जब अदालत ने अपील के लिए 60 दिन का समय दिया है, तो इतनी जल्दबाजी क्यों की गई? कांग्रेस इसे “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” करार दे रही है.
#WATCH | दिल्ली: राउज़ एवेन्यू कोर्ट द्वारा एक ग्रामीण बैंक धोखाधड़ी मामले में कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 3 साल की सज़ा सुनाने पर शिकायतकर्ता के वकील अनिल शुक्ला ने कहा, "यह मामला 1998 का है। दतिया में एक संस्था है जो राजेंद्र भारती की मां के नाम पर है; उन्होंने ₹10 लाख… pic.twitter.com/dymXiEdBPh
— ANI_HindiNews (@AHindinews) April 2, 2026
क्या कहता है कानून?
मध्य प्रदेश विधानसभा के पूर्व प्रमुख सचिव अवधेश प्रताप सिंह के मुताबिक, कानून बिल्कुल स्पष्ट है. यदि किसी जनप्रतिनिधि को दो साल से अधिक की सजा होती है तो उसकी सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है. हालांकि इसमें एक अहम कानूनी पहलू भी जुड़ा है. यदि ऊपरी अदालत निचली अदालत के फैसले पर रोक (स्टे) लगा देती है, तो अयोग्यता खत्म हो सकती है. उनका कहना है कि अगर अपील के दौरान राजेंद्र भारती को सजा पर स्टे मिल जाता है, तो उनकी विधायकी बहाल हो सकती है. लेकिन अगर स्टे नहीं मिला, तो उनकी अयोग्यता बरकरार रहेगी और दतिया सीट पर उपचुनाव तय माना जाएगा.
राजेंद्र भारती के वकील ने क्या कहा?
#WATCH Delhi: On the Rouse Avenue Court sentencing Congress MLA Rajendra Bharti to 3 years in a Gramin bank fraud case, Rajendra Bharti's lawyer Abhik Chimni said, "The allegation against Rajendra Bharti was that through a fixed deposit (FD), he took more interest than the… https://t.co/9ojdZ59TCa pic.twitter.com/jz6bNEy0vu
— ANI (@ANI) April 2, 2026
कांग्रेस की टीम तैयार : PCC चीफ
पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने कहा कि राजेंद्र भारती के मामले में कांग्रेस की बड़ी तैयारी है. बड़े नेताओं की टीम तैयार की गई है. विवेक तन्खा, कपिल सिब्बल अपनी टीम के साथ उच्च अदालतों में अपील करेंगे. जबकि दिग्विजय सिंह इस मामले की मॉनिटरिंग करेंगे. पटवारी ने कहा कि यह राज्यसभा चुनाव प्रभावित करने के लिए मुकेश मल्होत्रा, राजेंद्र भारती के साथ षड्यंत्र है. विधायक कम करें और चुनाव में अटैक करें. कांग्रेस राज्यसभा के चुनावों के लिए अलर्ट है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि राजेंद्र भारती की सदस्यता को लेकर विधानसभा मुख्य सचिव से पूछा कि क्यों आप इतनी रात को काम कर रहे हैं तो वे उठकर भाग गए.
1998 का मामला, क्या है पूरा आरोप?
शिकायतकर्ता के वकील अनिल शुक्ला के अनुसार, यह मामला साल 1998 का है. आरोप है कि दतिया में राजेंद्र भारती की मां के नाम पर एक संस्था है, जिसमें ₹10 लाख की फिक्स्ड डिपॉजिट कराई गई थी. तीन साल की FD को नियमों के खिलाफ बढ़ाकर 15 साल कर दिया गया और उस पर नियमित रूप से करीब ₹1.35 लाख की राशि निकाली जाती रही. अदालत ने इसे ग्रामीण बैंक और जिला सहकारी बैंक के साथ धोखाधड़ी माना और इसी आधार पर तीन साल की सजा सुनाई. बचाव पक्ष का कहना है कि यह मामला बेहद पुराना है और राजनीतिक दुर्भावना से इसे अब सक्रिय किया गया.

Rajendra Bharti Disqualification: राजेंद्र भारती कैसे बचा पाएंगे विधायिकी
भाजपा का पक्ष: अदालत के फैसले का सम्मान
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने साफ कहा है कि यह पूरा मामला अदालत के सामने था और सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद ही फैसला आया है. उनके मुताबिक, अदालत के आदेश का सभी दलों को सम्मान करना चाहिए. भाजपा का कहना है कि यह पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया है, न कि राजनीतिक साजिश.
कांग्रेस का पलटवार: “आधी रात का लोकतंत्र”
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने विधानसभा सचिवालय की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार रात के अंधेरे में स्वायत्त संस्थाओं का गला घोंट रही है. पटवारी का कहना है कि जब अदालत ने अपील के लिए समय दिया है, तो विधानसभा सचिवालय ने दिल्ली से अधिकारी बुलाकर आधी रात को विधायकी खत्म करने का फैसला क्यों लिया? उन्होंने इसे “अपराध” करार देते हुए कहा कि इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों को जवाब देना होगा.
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस विधायक श्री राजेंद्र भारती जी को अपील के लिए 60 दिनों की मोहलत दी थी, पर उसके बाद भी रात 12 बजे विधानसभा सचिवालय खुलवाकर उनकी सदस्यता समाप्त कर दी गई।
— Jitendra (Jitu) Patwari (@jitupatwari) April 3, 2026
नरेंद्र मोदी के नए भारत में लोकतंत्र आख़िरी साँसें ले रहा है। pic.twitter.com/SlP85LSKyr
राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी गणित?
कांग्रेस का आरोप है कि यह पूरी कार्रवाई राज्यसभा चुनाव को ध्यान में रखकर की गई है. पार्टी का कहना है कि भाजपा विपक्षी विधायकों को किसी न किसी तरीके से बाहर करने की रणनीति पर काम कर रही है, ताकि संख्या बल अपने पक्ष में किया जा सके. इसी कड़ी में कांग्रेस आलाकमान ने कानूनी मामलों में फंसे सभी विधायकों की जानकारी मांगी है. पार्टी ने साफ किया है कि वरिष्ठ वकील विवेक तनखा और कपिल सिब्बल इन मामलों की पैरवी करेंगे और खुद आलाकमान इसकी निगरानी करेगा.
विपक्ष का हमला: “कानून सत्ता के इशारों पर?”
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि जब मामला न्यायालय में विचाराधीन है और अपील का समय दिया गया है, तब विधानसभा सचिवालय की यह जल्दबाजी लोकतंत्र के खिलाफ है. अरुण यादव ने भी विधानसभा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले कार्यकाल में भाजपा में गए नेताओं के मामलों में वर्षों तक कोई कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन अब राज्यसभा चुनाव नजदीक आते ही कांग्रेस विधायकों पर बिजली की रफ्तार से फैसले लिए जा रहे हैं.
आगे क्या? विधायकी बचाने का आखिरी रास्ता कौन सा है?
अब पूरा मामला अदालत पर टिका है. अगर राजेंद्र भारती ऊपरी अदालत से सजा पर रोक हासिल कर लेते हैं, तो उनकी विधायकी बहाल हो सकती है और दतिया सीट रिक्त नहीं रहेगी. लेकिन अगर स्टे नहीं मिलता, तो उनकी सदस्यता समाप्त मानी जाएगी और वहां उपचुनाव होगा. फिलहाल दतिया सीट ने मध्य प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है. सवाल सिर्फ एक है, क्या कांग्रेस के राजेंद्र भारती कानूनी लड़ाई जीतकर अपनी विधायकी बचा पाएंगे, या यह मामला भाजपा और कांग्रेस के बीच एक नई सियासी जंग की शुरुआत बन जाएगा?

Rajendra Bharti Disqualification: क्या है पूरा मामला
इन 4 सवाल-जवाब में छिपी है पूरी कहानी
राजेंद्र भारती को अयोग्य क्यों घोषित किया गया?
तीन साल से अधिक की सजा मिलने के कारण जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत उनकी सदस्यता समाप्त की गई.
क्या राजेंद्र भारती अपनी विधायकी वापस पा सकते हैं?
अगर ऊपरी अदालत से सजा पर स्टे मिल जाता है तो सदस्यता बहाल हो सकती है.
दतिया सीट पर अब क्या होगा?
स्टे न मिलने की स्थिति में सीट पर उपचुनाव होगा.
कांग्रेस क्यों इसे राजनीतिक साज़िश बता रही है?
कांग्रेस का आरोप है कि राज्यसभा चुनाव से पहले विपक्षी विधायकों को बाहर करने की रणनीति है.
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