
सुशील मोदी ने बताया 2019 लोकसभा चुनाव का सियासी गणित, कहा- कितने वोटर NDA के साथ, कितने खिलाफ
दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया की सलाहकार रही और आम आदमी पार्टी नेता आतिशी के मुताबिक, दिल्ली सरकार यह सर्वे इसलिए कर रही है ताकि उसको पता चल सके कि दिल्ली के स्कूलों में कितने बच्चे असल में दिल्ली के हैं और कितने यूपी और हरियाणा के और फिर सरकार पॉलिसी इसी हिसाब से बनाएगी.

एनडीटीवी इंडिया से खास बातचीत में आतिशी ने कहा कि 'हाल ही में हमने कुछ स्कूलों का इंस्पेक्शन किया और पाया कि जो बॉर्डर के इलाकों के स्कूल हैं, वहां बड़े पैमाने पर यूपी और हरियाणा के बच्चे पढ़ रहे हैं. एक स्कूल में तो 61 फीसदी बच्चे दिल्ली के बाहर के रहने वाले थे. एक दूसरे स्कूल में पाया कि 54 फ़ीसदी बच्चे दिल्ली से बाहर के थे. दिल्ली सरकार पिछले साढ़े साल से पैसा इन्वेस्ट कर रही है, नए कमरे बना रही है, नई ड्रेस खरीद रही है. इसलिए कि दिल्ली के बच्चों को एक अच्छा पढ़ाई का माहौल मिल सके. वहां एक क्लास रूम में 40 से ज्यादा बच्चे ना बैठे हो. अच्छे टीचर मिल सके. अच्छी सुविधाएं मिल सके लेकिन हम अपना इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाए जा रहे हैं लेकिन बच्चे ही बढ़ते जा रहे हैं क्योंकि वह यूपी से आ रहे हैं, हरियाणा से आ रहे हैं.
आगे उन्होंने कहा कि 'यूपी और हरियाणा के भी बच्चे देश के बच्चे हैं लेकिन यूपी के बच्चों को पढ़ाना यूपी सरकार की जिम्मेदारी है और हरियाणा के बच्चों को पढ़ाना हरियाणा सरकार की जिम्मेदारी है. अब दिल्ली में ऐसी स्थिति बनती जा रही है कि दिल्ली के स्कूलों का इस्तेमाल दिल्ली के बच्चों से ज्यादा दिल्ली के बाहर के बच्चे कर रहे हैं. इसलिए वोटर ID कार्ड आधार कार्ड मांगना जरूरी है ताकि हमें पता तो चले कि यह बच्चे दिल्ली में रहते हैं या नहीं रहते और कितने फ़ीसदी बच्चे असल में दिल्ली के बाहर के हैं.'

आतिश के इस बयान से प्रतीत होता है कि आम आदमी पार्टी सरकार अपनी उसी रणनीति पर आगे बढ़ रही है जिसमें वह इससे पहले ही दिल्ली के अस्पतालों में दिल्ली वालों के लिए आरक्षण लागू कर चुकी है. लेकिन सवाल यह है कि आम आदमी पार्टी सरकार इस तरह का डाटा इकट्ठा करके करेगी क्या? दिल्ली के स्कूलों में जो दिल्ली से बाहर के बच्चे पढ़ रहे हैं उनको निकाला जाएगा? आतिशी ने कहा 'यह मेरा आश्वासन है कि जो दिल्ली से बाहर के बच्चे अभी दिल्ली के स्कूलों में पढ़ रहे हैं उनको नहीं निकाला जाएगा लेकिन दिल्ली के सरकारी स्कूलों में दिल्ली से बाहर से आने वाले बच्चों की भीड़ किस तरह से रोकी जाए उसका समाधान निकाला जाएगा.'
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दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी ने दिल्ली सरकार के इस सर्कुलर पर सवाल खड़े किए हैं, मनोज तिवारी का कहना है कि जब एक बार बच्चे का दाखिला स्कूल में हो गया तो दिल्ली सरकार को इस तरह की जानकारी मांगने का कोई अधिकार नहीं. ये निजता के अधिकार पर हमला है. यही नहीं, उन्होंने इसे एक साजिश का हिस्सा बताया. मनोज तिवारी ने कहा ' निजता का अधिकार मौलिक अधिकार है जिसको दिल्ली सरकार असंवैधानिक तरीके से भंग कर रही है. अगर किसी ने अपना बच्चा स्कूल में पढ़ने भेजा है तो जितनी जानकारी चाहिए होती है वह पहले ही दे दी गई है. अबे बच्चे को पढ़ाना है ना ...आप हर अभिभावक का वोटर ID कार्ड आधार कार्ड क्यों मांग रहे हैं? आपको ऐसा करने का कोई अधिकार ही नहीं है. मैं अभी इस बारे में सारी जानकारी जुटा रहा हूं और जो अभी तक मेरे पास जानकारी है उसके मुताबिक यह एक बहुत बड़ी साजिश है किसी भी चुनी हुई सरकार को कोई अधिकार नहीं कि वह किसी की निजता के अधिकार पर हमला करे'.
दिल्ली में सरकारी और प्राइवेट मिलाकर करीब 2700 स्कूल हैं. इनमें करीब 26 लाख बच्चे पढ़ते हैं. इन्हीं से दिल्ली सरकार ने डेटा मांगा है.
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