दिल्ली की ऐतिहासिक जामा मस्जिद और उसके आसपास कथित अवैध निर्माण को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा एमसीडी को दो महीने के भीतर सर्वे रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए जाने के बाद आज का दिन बेहद अहम माना जा रहा था. अदालत के आदेश के बाद यह पहला जुम्मा था, जब बड़ी संख्या में लोगों के नमाज़ के लिए एकत्र होने की संभावना थी. इसी वजह से प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क नज़र आईं.

सुबह से ही जामा मस्जिद के बाहर हलचल थी. मस्जिद के इर्द-गिर्द हाईकोर्ट के आदेश और संभावित सर्वे को लेकर चर्चाएं होती रहीं, लेकिन इसके बावजूद माहौल सामान्य और शांत बना रहा. सुबह-सुबह बड़ी संख्या में सैलानी भी ऐतिहासिक जामा मस्जिद को देखने पहुँचे. कोई कश्मीर की वादियों से आया था तो कोई कोलकाता, हरियाणा, चूरू और हरिद्वार से. विदेशी पर्यटक भी दिल्ली की कड़कड़ाती ठंड के बीच इस ऐतिहासिक धरोहर की भव्यता और खूबसूरती को निहारते नज़र आए.
सुबह करीब सात बजे तक जामा मस्जिद से सटे बाज़ार बंद रहे, लेकिन जैसे-जैसे दिन चढ़ा, दुकानों के शटर उठने लगे और बाज़ारों में चहल-पहल लौट आई. रोज़मर्रा की ज़िंदगी की रफ्तार ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि तमाम अटकलों के बावजूद इलाके में सामान्य स्थिति बनी हुई है. स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए गए थे. दिल्ली पुलिस के साथ केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) और रैपिड एक्शन फ़ोर्स (RAF) की टीमें तैनात रहीं. जामा मस्जिद के बाहर और आसपास के इलाकों में जगह-जगह सीसीटीवी कैमरों के ज़रिए निगरानी की जा रही थी, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से समय रहते निपटा जा सके.

पौना एक बजे अज़ान की आवाज़ गूंजते ही नमाज़ियों का मस्जिद की ओर आना शुरू हो गया. कड़ी सुरक्षा जांच के बाद सैकड़ों लोग जामा मस्जिद के भीतर दाखिल हुए. दोपहर 1 बजकर 5 मिनट से 1 बजकर 15 मिनट के बीच जुमे की नमाज़ अदा की गई. पूरी प्रक्रिया के दौरान माहौल शांतिपूर्ण और संयमित बना रहा. अमन कमेटी के सदस्य भी मौके पर मौजूद रहे और सभी की साझा कोशिश थी कि सौहार्द और शांति का संदेश कायम रहे.
जामा मस्जिद सिर्फ़ एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि दिल्ली की पहचान और इतिहास की जीवित मिसाल भी है. इसे मुग़ल बादशाह शाहजहां ने वर्ष 1656 में लगभग 5 हज़ार मज़दूरों की मेहनत से बनवाया था. इसकी विशालता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां एक साथ 25 हज़ार से अधिक लोग नमाज़ अदा कर सकते हैं. यही वजह है कि यह मस्जिद न सिर्फ़ नमाज़ियों, बल्कि देश-विदेश से आने वाले सैलानियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनी रहती है.

बहरहाल, सुबह से लेकर दोपहर तीन बजे तक जब एनडीटीवी की टीम जामा मस्जिद परिसर और आसपास के इलाकों में मौजूद रही, तब तक हालात पूरी तरह सामान्य और शांतिपूर्ण नज़र आए. हाईकोर्ट के आदेश के साए में भी जामा मस्जिद और उसका इलाका आज अमन, संयम और आपसी सौहार्द का पैग़ाम देता दिखा.
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