
प्रतीकात्मक फोटो
नई दिल्ली:
दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर चिंता जाहिर की है। चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने कहा कि हालात बेहद गंभीर हैं। प्रदूषण की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छवि खराब हो रही है। जब भी बाहर से कोई डेलिगेट आता है तो प्रदूषण को लेकर कहता है। ऐसे में बेहद शर्मिंदगी होती है।
दिल्ली सरकार और केंद्र मिलकर हल निकालें
उन्होंने कहा कि पिछले हफ्ते इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस के अध्यक्ष दिल्ली आए थे तो उनको प्रदूषण के बारे में बताते हुए शर्म महसूस हो रही थी। जस्टिस ठाकुर ने कहा कि दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार को चाहिए था कि आपस में बैठकर मीटिंग करें और प्रदूषण कम करने को लेकर कोई ठोस नतीजा निकालें लेकिन सरकार ने ऐसा कुछ भी नहीं किया।
ये कोई स्थायी हल नहीं
अब जो सोचा जा रहा है वे इमरजेंसी के तहत कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन ये कोई स्थायी हल नहीं है। इस मामले में अल्प, मध्यम और लंबी अवधि के लिए योजना बनाने की जरूरत है, लेकिन हैरानी की बात है कि कोई भी फोरम इस समस्या से निपटने के लिए सुझाव नहीं दे रही है।
जस्टिस ठाकुर ने कहा कि अगर आप हर समस्या के समाधान के लिए कोर्ट आएंगे तो हमारे लिए संभव नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने 15 दिसंबर को सुझाव लेकर आने को कहा है और उसी दिन इस मामले की सुनवाई भी होगी।
ट्रकों की एंट्री में 30 फीसदी की गिरावट
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ग्रीन टैक्स मामले मे एमसीडी के टोल कांट्रेक्टर की याचिका पर सुनवाई कर रहा है। याचिका में कहा गया है कि ग्रीन टैक्स लगाने के बाद दिल्ली में ट्रकों की एंट्री में 30 फीसदी की गिरावट आ गई है, जिससे रेवेन्यू कम हो रहा है। निगम से हुए करार के मुताबिक, पैसा न देने पर निगम ने सात करोड़ की गारंटी जब्त कर ली है।
कंपनी का कहना है कि करार के मुताबिक, उसे निगम को हर हफ्ते 10.5 करोड़ रुपये देने हैं, लेकिन ग्रीन टैक्स के चलते वाहनों में गिरावट आई है तो वह 30 फीसदी कम रुपये निगम को दे रहा है। दरअसल, कोर्ट ने दिल्ली में आने वाले कमर्शियल वाहनों से 1 नवंबर से चार महीने के लिए 700 से 1300 रुपये ग्रीन टैक्स वसूलने के आदेश दिए थे।
दिल्ली सरकार और केंद्र मिलकर हल निकालें
उन्होंने कहा कि पिछले हफ्ते इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस के अध्यक्ष दिल्ली आए थे तो उनको प्रदूषण के बारे में बताते हुए शर्म महसूस हो रही थी। जस्टिस ठाकुर ने कहा कि दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार को चाहिए था कि आपस में बैठकर मीटिंग करें और प्रदूषण कम करने को लेकर कोई ठोस नतीजा निकालें लेकिन सरकार ने ऐसा कुछ भी नहीं किया।
ये कोई स्थायी हल नहीं
अब जो सोचा जा रहा है वे इमरजेंसी के तहत कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन ये कोई स्थायी हल नहीं है। इस मामले में अल्प, मध्यम और लंबी अवधि के लिए योजना बनाने की जरूरत है, लेकिन हैरानी की बात है कि कोई भी फोरम इस समस्या से निपटने के लिए सुझाव नहीं दे रही है।
जस्टिस ठाकुर ने कहा कि अगर आप हर समस्या के समाधान के लिए कोर्ट आएंगे तो हमारे लिए संभव नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने 15 दिसंबर को सुझाव लेकर आने को कहा है और उसी दिन इस मामले की सुनवाई भी होगी।
ट्रकों की एंट्री में 30 फीसदी की गिरावट
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ग्रीन टैक्स मामले मे एमसीडी के टोल कांट्रेक्टर की याचिका पर सुनवाई कर रहा है। याचिका में कहा गया है कि ग्रीन टैक्स लगाने के बाद दिल्ली में ट्रकों की एंट्री में 30 फीसदी की गिरावट आ गई है, जिससे रेवेन्यू कम हो रहा है। निगम से हुए करार के मुताबिक, पैसा न देने पर निगम ने सात करोड़ की गारंटी जब्त कर ली है।
कंपनी का कहना है कि करार के मुताबिक, उसे निगम को हर हफ्ते 10.5 करोड़ रुपये देने हैं, लेकिन ग्रीन टैक्स के चलते वाहनों में गिरावट आई है तो वह 30 फीसदी कम रुपये निगम को दे रहा है। दरअसल, कोर्ट ने दिल्ली में आने वाले कमर्शियल वाहनों से 1 नवंबर से चार महीने के लिए 700 से 1300 रुपये ग्रीन टैक्स वसूलने के आदेश दिए थे।
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