
दिल्ली में जंतर मंतर पर आंदोलनरत पूर्व सैनिक।
नई दिल्ली:
दिल्ली के जंतर मंतर पर जुटे पूर्व सैनिकों ने ऐलान किया है कि वे अपना आंदोलन और तेज करेंगे। रविवार को हुई रैली में जंतर मंतर पर एक हजार से ज्यादा पूर्व सैनिक जुटे। पिछले 294 दिनों से पूर्व सैनिक वन रैंक वन पेंशन की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
दिल्ली में जंतर मंतर पर उनके प्रदर्शन को दस महीने पूरे होने में बस एक हफ्ता बाकी है, लेकिन उनकी रिले भूख हड़ताल जारी है। यहां रिले भूख हड़ताल पर बैठे कपूरथला के महेन्द्र सिंह कहते हैं कि हम सैनिक हैं और जब तक फतह नही कर लें तब तक मोर्चा नहीं छोड़ते हैं। सरकार का दावा है कि वह वन रैंक, वन पेंशन की मांग मान चुकी है और पूर्व सैनिकों को बकाया राशि की पहली किस्त का भुगतान हो भी चुका है लेकिन पूर्व सैनिकों का कहना है कि संसद में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो वादा किया था उसे पूरा नहीं किया गया है। भगत सिंह कोश्यारी कमेटी की सिफारिशों को लागू नहीं किया गया है।
इंडियन एक्स सर्विस मेन मूवमेंट के चेयरमैन मेजर जनरल सतबीर सिंह ने कहा कि यह एक लंगड़ी ओआरओपी है जिसे हम नही मानेंगे। जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं की जातीं तब तक आंदोलन जारी रहेगा। सरकार की हालत यह है कि इस महीने हमनें छह चिट्ठियां लिखीं लेकिन अभी तक किसी का जवाब नहीं आया। पूर्व सैनिकों का यह भी कहना है कि 1 जनवरी 1973 से पहले जवानों और जेसीओ को वेतन का 70 फीसदी पेंशन के रूप में मिलता था, उसे फिर से लागू किया जाए। उस वक्त सिविल अधिकारियों के वेतन की तीस फीसदी पेंशन मिलती थी और इसे बाद में पचास फीसदी कर दिया गया, जबकि फौज के जवानों की पेंशन वेतन के 70 फीसदी से घटाकर 50 फीसदी कर दी गई।
दिल्ली में जंतर मंतर पर उनके प्रदर्शन को दस महीने पूरे होने में बस एक हफ्ता बाकी है, लेकिन उनकी रिले भूख हड़ताल जारी है। यहां रिले भूख हड़ताल पर बैठे कपूरथला के महेन्द्र सिंह कहते हैं कि हम सैनिक हैं और जब तक फतह नही कर लें तब तक मोर्चा नहीं छोड़ते हैं। सरकार का दावा है कि वह वन रैंक, वन पेंशन की मांग मान चुकी है और पूर्व सैनिकों को बकाया राशि की पहली किस्त का भुगतान हो भी चुका है लेकिन पूर्व सैनिकों का कहना है कि संसद में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो वादा किया था उसे पूरा नहीं किया गया है। भगत सिंह कोश्यारी कमेटी की सिफारिशों को लागू नहीं किया गया है।
इंडियन एक्स सर्विस मेन मूवमेंट के चेयरमैन मेजर जनरल सतबीर सिंह ने कहा कि यह एक लंगड़ी ओआरओपी है जिसे हम नही मानेंगे। जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं की जातीं तब तक आंदोलन जारी रहेगा। सरकार की हालत यह है कि इस महीने हमनें छह चिट्ठियां लिखीं लेकिन अभी तक किसी का जवाब नहीं आया। पूर्व सैनिकों का यह भी कहना है कि 1 जनवरी 1973 से पहले जवानों और जेसीओ को वेतन का 70 फीसदी पेंशन के रूप में मिलता था, उसे फिर से लागू किया जाए। उस वक्त सिविल अधिकारियों के वेतन की तीस फीसदी पेंशन मिलती थी और इसे बाद में पचास फीसदी कर दिया गया, जबकि फौज के जवानों की पेंशन वेतन के 70 फीसदी से घटाकर 50 फीसदी कर दी गई।
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