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This Article is From Apr 22, 2025

दिल्ली में वक्फ बचाओ सम्मेलन में ओवैसी समेत कई नेताओं की शिरकत; जानें किसने क्या कहा

सम्मेलन में वक्फ कानून को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. कई वक्ताओं ने इसे मुस्लिम समुदाय के अधिकारों पर हमला बताया और एकजुट होकर इसका विरोध करने का आह्वान किया.

नई दिल्ली:

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में 'वक्फ बचाओ सम्मेलन' का आयोजन किया गया. इस सम्मेलन में मुस्लिम उलेमाओं के साथ-साथ AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और विभिन्न दलों के नेता शामिल हुए. वक्फ कानून के खिलाफ विरोध जताने के लिए कई लोग कंधे पर काली पट्टी बांधकर पहुंचे, जबकि कुछ ने आक्रामक भाषणों के जरिए अपनी बात रखी.

रफीउद्दीन अशरफी ने आक्रोश में दिया भाषण

महाराष्ट्र के परभणी से मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य रफीउद्दीन अशरफी ने आक्रोश भरे भाषण में कहा, "हमने सर पर कफन बांध लिया है. वक्फ कानून वापस लो, हम अपने सिरों का नजराना देने को तैयार हैं. मुसलमानों, बोर्ड की आवाज पर सड़कों पर उतरो और बताओ कि तुम्हारा इरादा क्या है. " उनके इस भाषण ने माहौल को और गरम कर दिया. सम्मेलन में एक विवादास्पद मोड़ तब आया, जब सिख धर्म के दयाल सिंह ने मुगल बादशाह औरंगजेब और बाबर का महिमामंडन किया.

हमारा इतिहास मुगलों से जुड़ा...

उन्होंने कहा, "लोग बाबर और औरंगजेब को नकारते हैं, लेकिन अगर मुगल सल्तनत का इतिहास मिटाया गया तो सिख इतिहास भी खत्म हो जाएगा. बाबर से औरंगजेब और गुरु नानक से गुरु गोविंद सिंह तक, हमारा इतिहास मुगलों से जुड़ा है." उन्होंने दावा किया कि गुरु गोविंद सिंह की पत्नी माता सुंदरी औरंगजेब के शासन में दिल्ली में रहीं, और आठवें सिख गुरु हरकिशन सिंह के अंतिम संस्कार के लिए औरंगजेब ने ही यमुना के किनारे जगह दी थी.

दयाल सिंह ने कहा, "गुस्सा जायज है, लेकिन यह लड़ाई सिर्फ मुसलमानों की नहीं है. यह जुल्म और इंसाफ की लड़ाई है. देश की बड़ी आबादी हमारे साथ है. हमें एक-दूसरे को समझने की आदत है." उन्होंने यह भी जोड़ा कि न्यायालय ने कुछ राहत दी है, लेकिन उकसावे से बचने और मिलकर लड़ने की जरूरत है. उन्होंने चेतावनी दी, "मायूसी नहीं रखनी है, गांधी से करार था, जो इसे तोड़ेगा, उसका तख्त ताबूत बन जाएगा."

वक्फ कानून को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं

सम्मेलन में वक्फ कानून को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. कई वक्ताओं ने इसे मुस्लिम समुदाय के अधिकारों पर हमला बताया और एकजुट होकर इसका विरोध करने का आह्वान किया.  पुलिस ने तालकटोरा स्टेडियम के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके. यह सम्मेलन न केवल वक्फ कानून बल्कि भारत के सामाजिक और ऐतिहासिक विमर्श में भी एक नया अध्याय जोड़ता दिख रहा है.


 

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