- दिल्ली के रामलीला ग्राउंड में आधी रात को अतिक्रमण क्यो हटाया गया, MCD मेयर ने बताया
- दिल्ली हाईकोर्ट ने एमसीडी को अतिक्रमण हटाने से पहले प्रभावित पक्षों को सुनवाई का अवसर देने का निर्देश दिया था
- एमसीडी ने 24 नवंबर और 16 दिसंबर 2025 को प्रभावित पक्षों की व्यक्तिगत सुनवाई कर 22 दिसंबर को आदेश पारित किया
दिल्ली के रामलीला ग्राउंड में अतिक्रमण हटाने को लेकर उठा विवाद एक लंबी कानूनी प्रक्रिया और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़ा हुआ है. एमसीडी के मुताबिक, यह जमीन भूमि एवं विकास कार्यालय (एलएंडडीओ), भारत सरकार के अधीन आती है और रामलीला ग्राउंड का लाइसेंस दिल्ली नगर निगम के पास है. एक शिकायत के बाद एमसीडी ने एलएंडडीओ और दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के साथ मिलकर संयुक्त सर्वे कराया, जिसमें यह सामने आया कि रामलीला ग्राउंड के भीतर करीब 36,428 वर्ग फुट क्षेत्र में बैंक्वेट हॉल, निजी डायग्नोस्टिक सेंटर सहित अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के माध्यम से अतिक्रमण किया गया था. सर्वे में सड़क और फुटपाथ पर अतिक्रमण की भी पुष्टि हुई.
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अवैध अतिक्रमण पर हाई कोर्ट ने क्या कहा?
इसी अतिक्रमण को हटाने के लिए एक संगठन ने दिल्ली हाईकोर्ट में रिट याचिका (सिविल) संख्या 17153/2025 दायर की थी. इस पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने 12 नवंबर 2025 को एमसीडी को निर्देश दिया कि संयुक्त सर्वे रिपोर्ट में चिन्हित अवैध अतिक्रमण और व्यावसायिक गतिविधियों को हटाने से पहले प्रभावित पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया जाए और तीन महीने के भीतर उचित कार्रवाई की जाए.
हाईकोर्ट के आदेशों के अनुपालन में एमसीडी ने 24 नवंबर और 16 दिसंबर 2025 को प्रभावित पक्षों को व्यक्तिगत सुनवाई का मौका दिया. सुनवाई में प्रबंध समिति मस्जिद सैयद फ़ैज़ इलाही, दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड, डीडीए, एलएंडडीओ और दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग के अधिकारी व प्रतिनिधि मौजूद रहे. प्रस्तुत दस्तावेज़ों और बयानों पर विचार के बाद एमसीडी ने 22 दिसंबर 2025को आदेश पारित किया. आदेश में कहा गया कि वर्ष 1940 में एलएंडडीओ द्वारा केवल 0.195 एकड़ भूमि के लिए पट्टा विलेख निष्पादित किया गया था, जिसमें टिन शेड, चबूतरा, हुजरा और कब्रिस्तान शामिल थे. इससे अधिक भूमि पर स्वामित्व या अधिकार से संबंधित कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया.
एमसीडी मेयर राजा इकबाल ने क्या कहा?
एमसीडी का कहना है कि इसी आदेश के तहत 7 जनवरी 2026 को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई. NDTV से एक्सक्लूसिव बातचीत में एमसीडी मेयर राजा इक़बाल ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई पूरी योजना और कानूनी तैयारी के साथ की गई थी. उन्होंने बताया कि कार्रवाई रात के समय इसलिए की गई ताकि इलाके में आम लोगों की आवाजाही न हो और किसी तरह की अव्यवस्था की स्थिति न बने.
मेयर राजा इक़बाल ने NDTV से कहा कि यह कार्रवाई अचानक नहीं की गई. सबको पहले नोटिस दिए गए थे, सुनवाई का पूरा मौका दिया गया और हाईकोर्ट के आदेश के तहत ही एक्शन लिया गया. रात में इसलिए किया गया ताकि एरिया खाली रहे और स्थिति नियंत्रण में रहे.
धार्मिक स्थल को कोई नुकसान नहीं पहुंचा
उन्होंने धार्मिक एंगल पर उठ रहे सवालों को खारिज करते हुए कहा कि धार्मिक स्थल को किसी तरह का कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया है और न ही पहुंचने दिया जाएगा. दुख की बात है कि कुछ लोग इस कार्रवाई को धार्मिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं. एमसीडी का काम अवैध निर्माण हटाना है. यह हर इलाके में होता है और आगे भी होता रहेगा, धार्मिक स्थल पूरी तरह सुरक्षित है.
कल रात से सुबह तक क्या हुआ?
एमसीडी और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम ने देर रात अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की. कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों की ओर से विरोध किया गया और पथराव की घटनाएं सामने आईं. हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया और हल्का बल प्रयोग किया. कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पांच लोगों को हिरासत में लिया गया. पुलिस और प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर जल्द काबू पा लिया गया और सुबह तक कार्रवाई पूरी कर ली गई.
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