बवाना विधानसभा उपचुनाव के लिए मतदान जारी है ( फाइल फोटो )
- बवाना विधानसभा उपचुनाव के लिए मतदान जारी
- 8 प्रत्याशी हैं मैदान में
- केजरीवाल की प्रतिष्ठा है दांव पर
नई दिल्ली:
दिल्ली का बवाना विधानसभा उपचुनाव आम आदमी पार्टी, भाजपा और कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन गया है. इस चुनाव में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल बहुत कुछ दांव पर लगा हुआ है. लगातार पांच हारों के बाद अगर आम आदमी पार्टी इस चुनाव में भी जीत दर्ज नहीं कर पाती है तो उसके लिए दिल्ली में ही खतरा पैदा हो जाएगा. बवाना विधानसभा चुनाव में 2.94 लाख से अधिक मतदाता आठ उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे. चुनाव आयोग ने इस बार खास तैयारी की है. ईवीएम पर कोई सवाल न उठे इसके लिए वीवीपीएटी का भी इस्तेमाल किया जा रहा है. कुल 379 मतदान केंद्र बनाए गए हैं. चुनाव में 8 प्रत्याशी किस्मत आजमा रहे हैं लेकिन लड़ाई यहां त्रिकोणीया है.
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1- आम आदमी पार्टी से हैं रामचंद्र मैदान में : आम आदमी पार्टी ने इस चुनाव में रामचंद्र को अपना प्रत्याशी बनाया है. इस चुनाव को जीतने के लिए आम आदमी पार्टी ने पूरी ताकत झोंक रखी है. दरअसल 2015 के विधानसभा चुनाव में शानदार जीत के बाद 'आप' को अभी तक दिल्ली में जीत नसीब नहीं हो पाई है. यही वजह है कि इस बार चुनाव प्रचार में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल खुद मोर्चा संभाले हुए हैं.
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2- कांग्रेस का प्रत्याशी भी दमदार : इस चुनाव में एक कांग्रेस के प्रत्याशी सुरेंद्र कुमार की भी इस सीट में अच्छी खासी पकड़ है. वह इस सीट से तीन बार विधायक रह चुके हैं. कांग्रेस अगर यह सीट खोलती है तो दिल्ली विधानसभा में उसका खाता खुल जाएगा.
वीडियो : केजरीवाल की प्रतिष्ठा दांव पर
3- वेद प्रकाश भाजपा के उम्मीदवार : भाजपा ने इस चुनाव में दोहरा दांव खेला है. पार्टी ने आम आदमी पार्टी के बागी विधायक वेद प्रकाश को उम्मीदवार बनाया है. वेद प्रकाश ने साल 2015 के विधानसभा चुनाव में यहां से आम आदमी पार्टी के टिकट पर चुनाव जीता था. लेकिन उन्होंने इस पद से इस्तीफा दे दिया और मार्च में बीजेपी ज्वाइन कर लिया.
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1- आम आदमी पार्टी से हैं रामचंद्र मैदान में : आम आदमी पार्टी ने इस चुनाव में रामचंद्र को अपना प्रत्याशी बनाया है. इस चुनाव को जीतने के लिए आम आदमी पार्टी ने पूरी ताकत झोंक रखी है. दरअसल 2015 के विधानसभा चुनाव में शानदार जीत के बाद 'आप' को अभी तक दिल्ली में जीत नसीब नहीं हो पाई है. यही वजह है कि इस बार चुनाव प्रचार में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल खुद मोर्चा संभाले हुए हैं.
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2- कांग्रेस का प्रत्याशी भी दमदार : इस चुनाव में एक कांग्रेस के प्रत्याशी सुरेंद्र कुमार की भी इस सीट में अच्छी खासी पकड़ है. वह इस सीट से तीन बार विधायक रह चुके हैं. कांग्रेस अगर यह सीट खोलती है तो दिल्ली विधानसभा में उसका खाता खुल जाएगा.
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3- वेद प्रकाश भाजपा के उम्मीदवार : भाजपा ने इस चुनाव में दोहरा दांव खेला है. पार्टी ने आम आदमी पार्टी के बागी विधायक वेद प्रकाश को उम्मीदवार बनाया है. वेद प्रकाश ने साल 2015 के विधानसभा चुनाव में यहां से आम आदमी पार्टी के टिकट पर चुनाव जीता था. लेकिन उन्होंने इस पद से इस्तीफा दे दिया और मार्च में बीजेपी ज्वाइन कर लिया.
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