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पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, आरोपियों पर PMLA और भ्रष्टाचार कानून लगाने को लेकर नोटिस जारी

पेपर लीक मामलों में आरोपियों पर मनी लॉन्ड्रिंग, भ्रष्टाचार निवारण और बेनामी संपत्ति कानून लागू करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है.

पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, आरोपियों पर PMLA और भ्रष्टाचार कानून लगाने को लेकर नोटिस जारी
पेपर लीक मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है.
  • SC ने पेपर लीक मामलों में भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग और बेनामी संपत्ति कानून लागू करने का नोटिस जारी किया है
  • याचिका में हालिया NEET पेपर लीक सहित विभिन्न परीक्षा घोटालों का उल्लेख करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की गई है
  • याचिकाकर्ता ने पेपर लीक आरोपियों की आर्थिक गतिविधियों और संपत्तियों की गहन जांच करने की भी मांग की है

देशभर में प्रतियोगी और शैक्षणिक परीक्षाओं में सामने आए पेपर लीक मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. अदालत ने पेपर लीक के आरोपियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) और बेनामी संपत्ति कानून के प्रावधान लागू करने की मांग पर नोटिस जारी किया है. जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने याचिकाकर्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की संक्षिप्त दलीलें सुनने के बाद संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया. 

NEET पेपर लीक का दिया गया हवाला

याचिका में हालिया NEET पेपर लीक समेत विभिन्न परीक्षा घोटालों का उल्लेख किया गया है. इसमें कहा गया है कि प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं को रोकने, उनकी निष्पक्ष जांच करने और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने में संबंधित एजेंसियां लगातार असफल रही हैं. याचिकाकर्ता का तर्क है कि ऐसी घटनाएं लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित करती हैं और उनके मौलिक अधिकारों पर भी सीधा असर डालती हैं.

आर्थिक जांच की भी उठी मांग

याचिका में मांग की गई है कि पेपर लीक से जुड़े आरोपियों की वित्तीय गतिविधियों, संपत्तियों और आर्थिक लेनदेन की गहराई से जांच की जाए. यदि अवैध कमाई या संदिग्ध संपत्ति के प्रमाण मिलते हैं तो उनके खिलाफ भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग और बेनामी संपत्ति से जुड़े कानूनों के तहत भी कार्रवाई की जाए.

समयबद्ध जांच पर नहीं दिया जोर

याचिकाकर्ता ने केंद्र और राज्य सरकारों को पेपर लीक मामलों में विशेष जांच प्रक्रिया और समयबद्ध सुनवाई की व्यवस्था तैयार करने का निर्देश देने की भी मांग की थी. हालांकि सुनवाई के दौरान इस मांग पर विशेष जोर नहीं दिया गया. उन्होंने अदालत को बताया कि सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम अधिनियम, 2024 में वर्ष 2026 के संशोधन के बाद समयबद्ध जांच का प्रावधान पहले ही शामिल किया जा चुका है. 
 

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