- सुप्रीम कोर्ट ने ई-चालान का भुगतान न करने वालों के जुर्माने बिजली बिल में जोड़ने का सुझाव दिया है
- जस्टिस पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने कहा कि केवल ई-चालान जारी करना काफी नहीं
- कोर्ट ने कहा कि बकाया चालान के कारण रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस और फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने पर रोक लगाई जाए
ट्रैफिक नियमों की अनदेखी पर चालान नहीं भरने वालों पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है. सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया है कि जो लोग चालान नहीं भर रहे हैं, उनकी चालान की रकम को बिजली बिल में जोड़ दिया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ ई-चालान जारी करना ही काफी नहीं है, बल्कि असली सवाल जुर्माने की वसूली का है.
ये टिप्पणी जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने की. बेंच ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के इलेक्ट्रॉनिक एनफोर्समेंट और अनपेड ई-चालान की वसूली से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी.
सुनवाई के दौरान जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि अधिकारियों को सिर्फ ई-चालान जारी करने से आगे बढ़कर जुर्माने की वसूली पर ध्यान देना चाहिए.
बिजली बिल से जुड़ेगा चालान?
सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि ट्रैफिक के बकाया जुर्माने को बिजली के बिल में जोड़ा जा सकता है, ताकि लोग उन्हें समय पर भर दें. कोर्ट ने कहा कि बिजली के बिना लोग कैसे रहेंगे. इससे लोगों की आदत सुधरेगी.
अदालत ने कहा कि ई-चालान के एवज में 45 हजार करोड़ रुपये की वसूली करनी है, जिसमें से अब तक महज 25 हजार करोड़ की ही वसूली हो सकी है.
कोर्ट ने कहा कि हम जो बात पहुंचाना चाहते हैं वह यह है कि अधिकारियों को जमीनी हकीकत को ध्यान में रखते हुए जमीनी स्तर पर काम करने की जरूरत है.
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अदालत ने और क्या-क्या सुझाव दिए?
ई-चालान का जुर्माना वसूलने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने कई अहम सुझाव दिए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब कोई ई-चालान जारी किया जाता है तो उसे जुर्माना वसूलने के लिए किसी अदालत में भेजा जाता है, जहां वह व्यक्ति जुर्माना भरता है.
कोर्ट ने कहा कि हालांकि अधिकारियों से ये अपेक्षा की जाती है कि वे गाड़ी के रजिस्ट्रेशन का रिन्यूअल, डुप्लीकेट प्रमाण पत्र जारी करने और मालिक की डिटेल को अपडेट या रिन्यू करने पर ही रोक लगा दें. जब तक सभी चालान का भुगतान ना हो जाए, तब तक गाड़ी का फिटनेस सर्टिफिकेट ही जारी न करें.
सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि:-
- ई-चालान न भरने वाले वाहनों को परिवहन पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट किया जाए.
- वाहन के ओनरशिप ट्रांसफर को ब्लॉक किया जाए.
- ड्राइविंग लाइसेंस को रिन्यू न किया जाए और ड्राइविंग लाइसेंस को निलंबित करने के उपाय भी किए जाएं.
- ऐसे वाहनों के लिए पॉल्यूशन सर्टिफिकेट जारी करने की अनुमति न दी जाए.
- गाड़ियों की रैंडम चेकिंग होनी चाहिए और अगर पता चले कि ई-चालान का भुगतान नहीं किया गया है तो गाड़ी को जब्त करने के जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए.
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