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This Article is From Jul 30, 2025

आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों से दिल्ली सरकार चिंतित, सीएम ने कहा- जरूरत पड़ी तो कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे

दिल्ली सरकार ने आवारा कुत्तों और मवेशियों के हमलों पर उच्च स्तरीय बैठक की. बैठक के बाद सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि आवारा कुत्तों के मुद्दे पर सभी पक्षों की राय ली जाएगी और जरूरत पड़ी तो राहत दिलाने के लिए हम कोर्ट भी जाएंगे.

आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों से दिल्ली सरकार चिंतित, सीएम ने कहा- जरूरत पड़ी तो कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे
  • दिल्ली सरकार ने आवारा कुत्तों और मवेशियों के हमलों की बढ़ती घटनाओं को लेकर उच्च स्तरीय बैठक की.
  • मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि आवारा कुत्तों के मुद्दे पर सभी पक्षों की राय लेकर समाधान निकाला जाएगा.
  • सरकार पशु जन्म नियंत्रण अधिनियम में संशोधन कर स्थायी समाधान खोजने पर गंभीरता से विचार कर रही है.
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नई दिल्ली:

राजधानी दिल्ली में आवारा कुत्तों और मवेशियों के हमलों की बढ़ती घटनाओं से चिंतित दिल्ली सरकार ने बुधवार को एक उच्च स्तरीय बैठक की. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में शहरी विकास मंत्री आशीष सूद और पशु विभाग के मंत्री कपिल मिश्रा भी शामिल हुए. सरकार इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए सभी पहलुओं पर विचार कर रही है. बैठक के बाद सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि आवारा कुत्तों के मुद्दे पर सभी पक्षों की राय ली जाएगी और जरूरत पड़ी तो हम कोर्ट भी जाएंगे. 

सभी पक्षों से बात, समाधान पर विचार

बैठक के बाद मंत्री आशीष सूद ने बताया कि सरकार आवारा पशुओं जैसे कि गाय और कुत्तों को लेकर चिंतित है और NGO, पेट लवर्स, डॉग लवर्स जैसे सभी पक्षों को साथ में लेकर इस समस्या का समाधान निकालना चाहती है. दिल्ली नगर निगम ने आवारा कुत्तों के लिए विशेष आश्रय केंद्र खोलने का भी ऐलान किया था. उन्होंने कहा कि डॉग लवर्स और पेट लवर्स की अपनी कुछ चिंताएं हैं. सूद ने कहा कि डॉग लवर्स जानवरों के प्रति अपना प्रेम दिखाएं, लेकिन ये भी देखें कि छोटे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं पर हो रहे हमलों से किस तरह लोगों की जान आफत में आ रही है. इसे लेकर सरकार चिंतित है.

कानून के जरिए स्थायी समाधान पर जोर

उन्होंने कहा कि सरकार कानूनी पक्ष और पशु जन्म नियंत्रण (ABC) कानून में राहत पर ऐसा स्थायी समाधान देना चाहती है जो सबको मान्य हो. लेकिन सबको ये समझना चाहिए कि कुत्तों के हमले चिंता का विषय हैं. मुख्यमंत्री भी इसे लेकर चिंतित हैं. इस समस्या का समाधान निकालने के लिए हर एंगल से काम कर रहे हैं. केंद्र सरकार के कानून को किस तरह लागू करें कि लोगों की सुरक्षा भी हो जाए, इस पर सभी स्टेक होल्डर्स को साथ में लेकर विचार करने की बात है. ज़रूरत पड़ी तो इस मामले को लेकर सरकार अदालत भी जा सकती है.

ABC Act क्या है?

आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में कुत्तों के काटने की पिछले साल 37 लाख घटनाएं हुई थीं. कुत्तों के बढ़ते हमलों को देखते हुए पशुपालन मंत्रालय ने देशभर में कुत्तों को पालने को लेकर दिशानिर्देश जारी किए थे. अब दिल्ली सरकार ABC act में संशोधन को लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाने पर विचार कर रही है. आइए बताते हैं कि ये एक्ट क्या है?

  • ABC Act का पूरा नाम पशु जन्म नियंत्रण (Animal Birth Control) कानून है.
  • एबीसी के प्रावधान आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने में मदद करता हैं.
  • इसमें कुत्ते जैसे जानवरों के काटने से होने वाली रेबीज बीमारी को फैलने से रोकने के नियम हैं. 
  • इसमें नसबंदी और टीकाकरण के जरिए आवारा कुत्तों के स्वास्थ्य एवं कल्याण पर जोर दिया गया है.

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी फटकार

दिल्ली समेत कई राज्यों में आवारा कुत्तों द्वारा लोगों पर हमले करने और काटने की खबरें लगातार सामने आ रही हैं. आवारा कुत्तों को खाना खिलाने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट भी सुनवाई कर रहा है. पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा था कि आप उन्हें घर में खाना क्यों नहीं खिलाते हैं. इसके बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस सी छिड़ गई. 

सोसायटियों में बढ़ रहा कुत्तों का आतंक

नोएडा के निवासी अमित सिंह कहते हैं कि आवारा कुत्तों को खाना खिलाने में कोई दिक्कत नहीं है. लेकिन कुछ लोग सोसायटी के अंदर कुत्तों को खाना खिलाते हैं. इसकी वजह से सोसायटी के अंदर कुत्तों को बढ़ावा मिलता है. कई बार बच्चों को कुत्ते काट लेते है. पुलिस को भी इस मामले पर पूरी जानकारी नहीं है. इस वजह से मामला और पेचीदा हो गया है.

कुत्तों को लेकर जागरुकता की जरूरत

कीर्ति वर्मा कहती हैं कि सोसाइटी के अंदर अगर कुत्ते रहते हैं तो उन्हें आवारा नहीं बल्कि कम्युनिटी डॉग कहते हैं. कुत्तों को खिलाने के लिए एक निर्धारित जगह बनाई गई थी, लेकिन सोसाइटी के लोगों ने उसका विरोध किया. कुत्तों को लेकर हमें एक अवेयरनेस कार्यक्रम चलाना चाहिए. लोगों को बताना चाहिए कि जब कुत्ते आपके सामने हों तो उन्हें भागना नहीं चाहिए. 

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