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तेरहवीं पर भी नहीं आईं बेटियां, सोनीपत में बुजुर्ग की मौत के बाद समाज ने पूरी की रस्में

वृद्धाश्रम के संचालक आनंद कुमार ने बताया कि जब शिवचरण गुप्ता का निधन हुआ था, तब भी उनकी बेटियां मौके पर नहीं पहुंची थीं. दाह संस्कार के समय बेटियों से वीडियो कॉल पर बात कराई गई थी और अस्थि विसर्जन के दौरान भी सिर्फ व्हाट्सएप के जरिए ही संपर्क हुआ था.

तेरहवीं पर भी नहीं आईं बेटियां, सोनीपत में बुजुर्ग की मौत के बाद समाज ने पूरी की रस्में
मृतक शिवचरण गुप्ता की तेरहवीं पर भी नहीं आईं बेटिंय
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अपनों की बेरुखी किस कदर इंसान को जीते-जी और मौत के बाद भी दर्द देती है, इसकी एक मिसाल सोनीपत में देखने को मिली. वृद्धाश्रम में अपनी अंतिम सांसें लेने वाले बुजुर्ग शिवचरण राम रतन गुप्ता के जाने के बाद भी उनकी बेटियों का दिल नहीं पसीजा. अंतिम संस्कार और अस्थि विसर्जन के बाद अब जब तेरहवीं का मौका आया, तब भी बेटियां सामने नहीं आईं और महज दूर से ही औपचारिकताएं सिमटकर रह गईं. 

परिवार की इस दूरी के बीच शहर की सामाजिक संस्थाओं और स्थानीय लोगों ने आगे बढ़कर हिंदू रीति-रिवाज से उनकी तेरहवीं की सभी रस्में पूरी कीं.

गीता मंदिर में आयोजित इस तेरहवीं कार्यक्रम में पंडितों के सानिध्य में हवन-यज्ञ कराया गया. शिवचरण गुप्ता की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उपस्थित लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी. तेरहवीं के अवसर पर प्रसाद बनवाकर उपस्थित लोगों में वितरित किया गया. कार्यक्रम में परिवार का कोई भी सगा सदस्य मौजूद नहीं था, लेकिन सोनीपत की कई सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि और स्थानीय नेता इस दुखद घड़ी में शामिल हुए.

अंतिम संस्कार से तेरहवीं तक सिर्फ फोन पर हुई बातचीत

वृद्धाश्रम के संचालक आनंद कुमार ने बताया कि जब शिवचरण गुप्ता का निधन हुआ था, तब भी उनकी बेटियां मौके पर नहीं पहुंची थीं. दाह संस्कार के समय बेटियों से वीडियो कॉल पर बात कराई गई थी और अस्थि विसर्जन के दौरान भी सिर्फ व्हाट्सएप के जरिए ही संपर्क हुआ था. तेरहवीं के कार्यक्रम से पहले ही बेटियों ने इसमें शामिल होने से साफ मना कर दिया था.

आनंद कुमार ने कहा कि एक तरफ जहां कोई विरला परिवार अपने बुजुर्गों को सम्मानपूर्वक घर ले जाने वृद्धाश्रम पहुंचता है, वहीं दूसरी तरफ उनके पास रोजाना ऐसे 20 से ज्यादा फोन आते हैं जिनमें बुजुर्ग अपने ही बच्चों के जुल्म और प्रताड़ना की कहानी सुनाते हैं.

उन्होंने जोर कहा कि हमें अपने बच्चों को ऐसे संस्कार देने होंगे कि माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है, तभी समाज से ऐसी कुरीतियां खत्म होंगी.

'संस्कारों की कमी से बढ़ रहे ऐसे मामले'

तेरहवीं कार्यक्रम में पहुंचीं समाजसेविका और पूर्व डीजीपी सुमन मांजरी ने भी इस घटना पर दुख जाहिर किया. उन्होंने कहा कि आज के दौर में बच्चों में नैतिक संस्कारों की भारी कमी देखने को मिल रही है. शिवचरण गुप्ता जैसे मामले समाज की उस खोखली होती व्यवस्था की ओर इशारा करते हैं, जहां बुजुर्गों को उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है. 

उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों से भले ही लोगों में जागरूकता आ रही हो, लेकिन आज भी माता-पिता को अपने बच्चों को समय रहते सही और गलत का फर्क सिखाने की सख्त जरूरत है.

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