पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक, सदर बाजार और कश्मीरी गेट जैसे व्यस्त बाजार लंबे समय से ट्रैफिक जाम, अवैध पार्किंग और अतिक्रमण की समस्या से जूझ रहे हैं. यहां रोजाना हजारों लोग घंटों तक जाम में फंसते हैं. NDTV द्वारा 28 और 30 अगस्त को प्रमुखता से उठाई गई खबरों के बाद आखिरकार प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि हरकत में आए हैं. लगातार उठ रहे सवालों के बाद 10 सितंबर 2026 को उत्तर जिला पुलिस कार्यालय में एक अहम बैठक हुई, जिसमें इन समस्याओं का समाधान निकालने पर चर्चा की गई.
बैठक की अध्यक्षता सांसद और कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने की. इसमें जॉइंट सीपी मधुर वर्मा, डीसीपी निहारिका भट्ट, निगम पार्षद सुमन गुप्ता और FESTA समेत कई व्यापारी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए.
बैठक में लिए गए बड़े फैसले
बैठक में बाजारों में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने और मालवाहक वाहनों पर नियंत्रण के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए. सबसे पहले लोडिंग-अनलोडिंग को लेकर सख्त नियम बनाने पर सहमति बनी. तय किया गया कि माल उतारने के बाद खाली वाहनों को तुरंत बाजार से बाहर जाना होगा. लंबे समय तक खड़े रहने वाले या लावारिस पाए जाने वाले वाहनों को पुलिस जब्त कर सकती है.

इसके अलावा सभी मार्केट एसोसिएशनों को अपनी गलियों और बाजारों में निजी सुरक्षा गार्ड तैनात करने होंगे. इन गार्डों की प्रमाणित सूची संबंधित थाना प्रभारी को सौंपनी होगी. फुटपाथों पर अवैध कब्जे को रोकने के लिए यह भी साफ किया गया कि केवल MCD लाइसेंस वाले पटरी विक्रेताओं को ही बैठने की अनुमति होगी.
'विशेष वस्तु' पर सबसे बड़ा सवाल
बैठक के बाद सबसे ज्यादा चर्चा लोडिंग-अनलोडिंग के समय को लेकर हुई. पुलिस का कहना है कि दोपहर 12:30 बजे के बाद कोई भी मालवाहक वाहन बाजार में नहीं रहना चाहिए. वहीं FESTA ने अपील जारी कर कहा कि सामान्य सामान की लोडिंग-अनलोडिंग दोपहर 12 बजे तक और विशेष वस्तुओं की दोपहर 2 बजे तक हो सकेगी.
यहीं से भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है. अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया कि आखिर 'विशेष वस्तु' किसे माना जाएगा. यदि इसकी स्पष्ट परिभाषा नहीं होगी तो कोई भी वाहन चालक अपने सामान को विशेष वस्तु बताकर दोपहर बाद तक सड़क घेर सकता है.
स्कूली बच्चों और आम लोगों पर सीधा असर
इस अव्यवस्था का सबसे ज्यादा असर स्कूली बच्चों, आम यात्रियों और आपातकालीन सेवाओं पर पड़ता है. दोपहर में स्कूल छुट्टी के समय सड़क पर खड़े ट्रक, टेंपो और पिकअप वाहनों की वजह से बसें, वैन और ई-रिक्शा लंबे जाम में फंस जाते हैं. एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को भी रास्ता बनाने में परेशानी होती है.
साफ नियम ही बन सकते हैं समाधान
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि प्रशासन वास्तव में पुरानी दिल्ली को जाम मुक्त बनाना चाहता है तो अगले चरण की बैठकों में 'विशेष वस्तु' की स्पष्ट परिभाषा तय करनी होगी. साथ ही लोडिंग-अनलोडिंग के लिए एक समान और पारदर्शी कट-ऑफ टाइम लागू करना होगा. तभी चांदनी चौक, सदर बाजार और कश्मीरी गेट के लोगों को रोजाना लगने वाले ट्रैफिक जाम से राहत मिल सकेगी.
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