- दिल्ली में राशन के चावल आवंटन में बड़ा घोटाला सामने आया था.
- इस मामले में CBI ने 8 NERAMAC के अधिकारियों पर FRI दर्ज की है
- बताया जा रहा है कि यह पूरा घोटाला 28 करोड़ रुपए से ज्यादा का है.
दिल्ली में दिहाड़ी मजदूरों, गरीबों और प्रवासी श्रमिकों को राशन में जो चावल दिया जाता था, उसके आवंटन में गड़बड़ी मिली थी. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने इस मामले में अब केस दर्ज किया है. यह केस FCI दिल्ली के तत्कालीन अधिकारियों, NERAMAC (नॉर्थ ईस्टर्न रीजनल एग्रीकल्चर मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड) के तत्कालीन मैनेजिंग डायरेक्टर और कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज किया गया है. बता दें कि इस मामले में आरोप है कि बिना राशन कार्ड वाले जरूरतमंदों के नाम पर आवंटित 50 हजार 645 मीट्रिक टन सब्सिडी वाला चावल खुले बाजार में अवैध रूप से बेच दिया गया था. जिसमें सरकारी खजाने (FCI) को 28.87 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा था.
दिल्ली में जून के महीने में आई थी रिपोर्ट
दरअसल, जून महीने में उपभोक्ता मामले में खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग की विजिलेंस रिपोर्ट सामने आई थी. इस रिपोर्ट के बाद चावल के आवंटन की जांच के लिए एक न्यूट्रल कमेटी बनाई गई थी. कमेटी को यह जांच करनी थी कि FCI ने ओपन मार्केट सेल स्कीम के तहत राज्य सरकारों को चावल बेचने वाली कैटेगरी में NERAMAC को चावल का आवंटन कैसे किया.
50 हजार 645 टन चावल उठाया
जांच में सामने आया कि FCI दिल्ली रीजन ने NERAMAC को कुल 62 हजार 000 मीट्रिक टन चावल आवंटित किया था. इसमें से NERAMAC ने 50 हजार 645 मीट्रिक टन चावल उठा लिया.यह चावल उसे 23 हजार 200 रुपये प्रति मीट्रिक टन की रियायती दर पर दिया गया, जबकि उस समय चावल की बाजार कीमत करीब 28 हजार 900 रुपये प्रति मीट्रिक टन थी. जांच के मुताबिक नियमों के तहत NERAMAC जो भारत सरकार की कंपनी है, बिना ई-ऑक्शन के इस तरह चावल आवंटन पाने की पात्र नहीं थी. बिना ई-ऑक्शन चावल आवंटित करने की सुविधा सिर्फ राज्य सरकारों और राज्य सरकार की कॉरपोरेशन के लिए थी.
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एक और गड़बड़ी मिली थी
मामले में एक और बड़ी गड़बड़ी सामने आई. चावल के आवंटन का पैसा सीधे NERAMAC से नहीं बल्कि अलग-अलग निजी कंपनियों के जरिए भेजा गया. इनमें चावल मिलर्स और होलसेल डीलर्स शामिल थे. जांच के दौरान ऐसा कोई रिकॉर्ड भी नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके कि NERAMAC को दिया गया चावल उस तय मकसद के लिए जनता में बांटा गया था. जिसके नाम पर यह आवंटन किया गया था. इसके अलावा चावल का पुराना स्टॉक पहले निकालने के लिए लागू FIFO यानी First In, First Out नियम का भी पालन नहीं किया गया.
विजिलेंस रिपोर्ट के मुताबिक अगर NERAMAC को रियायती दर पर दिए गए चावल की यही मात्रा 28 हजार 900 रुपये प्रति मीट्रिक टन की रिजर्व कीमत पर ई-ऑक्शन के जरिए बेची जाती, तो FCI को करीब 28.87 करोड़ रुपये का अतिरिक्त फायदा होता. लेकिन इतना नुकसान हुआ था. ऐसे में अब सीबीआई ने बड़ा एक्शन लिया है.
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