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दिल्ली पुलिस ने शुरू की साइकिल पेट्रोलिंग, ईंधन भी बच रहा, गांव वालों से भी बढ़ा सीधा संपर्क

दिल्ली पुलिस ने साइकिल से पेट्रोलिंग शुरू की है. प्रधानमंत्री के 'पेट्रोल-डीजल बचाओ' अभियान को जमीन पर उतारने के लिए बाबा हरिदास नगर थाने की पुलिस अब मोटरसाइकिल-गाड़ियां छोड़कर साइकिल से गश्त कर रही है.

दिल्ली पुलिस ने शुरू की साइकिल पेट्रोलिंग, ईंधन भी बच रहा, गांव वालों से भी बढ़ा सीधा संपर्क

दिल्ली के देहाती इलाकों में इन दिनों सुरक्षा और जागरूकता की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर देखने को मिल रही है. प्रधानमंत्री के 'पेट्रोल-डीजल बचाओ' अभियान को जमीनी स्तर पर कामयाब बनाने के लिए अब दिल्ली पुलिस ने भी कमर कस ली है. इसी कड़ी में बाबा हरिदास नगर थाने की पुलिस ने एक शानदार और अनोखी शुरुआत की है. इलाके के झड़ौदा और उसके आसपास के गांवों में अब पुलिसकर्मी मोटरसाइकिल या सरकारी गाड़ियां छोड़कर साइकिल से गश्त (पेट्रोलिंग) कर रहे हैं.

देर शाम जैसे ही पुलिस की टीमें ग्रुप बनाकर साइकिल पर निकलती हैं तो पूरा माहौल बदला हुआ नजर आता है. इस नए अभियान का सबसे बड़ा मकसद देश में ईंधन की बचत करना और पर्यावरण को प्रदूषण से बचाना है. पुलिस की इस पहल को देखकर दिल्ली के इन शहरीकृत गांवों के लोग न सिर्फ हैरान हैं, बल्कि इस सोच की जमकर तारीफ भी कर रहे हैं.

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अब गलियों में रुककर बात करते हैं पुलिसकर्मी

साइकिल से पेट्रोलिंग करने का एक और सबसे बड़ा फायदा यह हो रहा है कि इससे पुलिस और आम जनता के बीच की दूरी पूरी तरह खत्म हो गई है. आमतौर पर जब पुलिस गाड़ियों या बाइकों पर तेजी से निकल जाती है तो आम लोग अपनी समस्याएं बताने से कतराते हैं, लेकिन साइकिल की धीमी रफ्तार ने पुलिस को जनता के बेहद करीब ला दिया है. अब पुलिसकर्मी गलियों में रुककर लोगों से सीधे बात करते हैं, उनका हाल-चाल पूछते हैं और बुजुर्गों से दुआ-सलाम करते हैं.

पुलिस को मिल रही अपराधियों की जानकारी

इस सीधे संपर्क का फायदा यह हो रहा है कि लोग बिना किसी डर या हिचक के पुलिस को अपने दिल की बात बता रहे हैं. यहां तक कि बातों-बातों में पुलिस को इलाके के असामाजिक तत्वों, सट्टेबाजों और अपराधियों के बारे में भी गुप्त जानकारियां आसानी से मिल जा रही हैं, जिससे इलाके में अपराध को रोकने में बहुत बड़ी मदद मिल रही है.

पुलिस का अभियान आंदोलन का रूप ले रहा

डीसीपी द्वारका के निर्देश पर शुरू हुआ यह अभियान अब एक बड़े आंदोलन का रूप लेता जा रहा है. गांव के प्रधान और रिटायर्ड बुजुर्गों का कहना है कि जब कानून के रखवाले खुद देश को आगे बढ़ाने वाले किसी अभियान में जुड़ते हैं तो आम जनता को इससे बहुत बड़ी प्रेरणा मिलती है. लोगों का मानना है कि पुलिस कर्मियों को इस तरह मेहनत करते देख वे खुद भी अपने निजी जीवन में पेट्रोल और डीजल बचाने का संकल्प ले रहे हैं.

पुलिस कर्मियों को पसंद आया तरीका

दूसरी तरफ, इस अभियान में शामिल पुलिसकर्मी भी बेहद खुश और उत्साहित नजर आ रहे हैं. उनका कहना है कि हर रोज कई किलोमीटर साइकिल चलाने से उनकी फिटनेस और सेहत में भी काफी सुधार हो रहा है. इसके साथ ही, जनता के साथ जो एक अपनेपन का रिश्ता बन रहा है, वह उनके काम को और भी आसान और संतोषजनक बना देता है.

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