- दिल्ली के एक अस्पताल में 11 साल के अंतराल पर दो भाइयों का हार्ट ट्रांसप्लांट एक ही सर्जिकल टीम ने किया
- दोनों भाइयों को दुर्लभ हृदय रोग एडवांस डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी की वजह से एंड-स्टेज हार्ट फेलियर था
- बड़े भाई का हार्ट ट्रांसप्लांट 2015 में किया गया था जबकि छोटे भाई का हाल ही में सफल ऑपरेशन हुआ
दिल्ली में 11 साल के अंतर पर दो भाइयों का हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया, वो भी एक ही अस्पताल में. खास बात यह है कि 11 साल पहले जिन डॉक्टर्स की टीम ने बड़े भाई का हार्ट ट्रांसप्लांट किया था उसी टीम ने अब छोटे भाई का भी उसी प्रक्रिया से हार्ट ट्रांसप्लांट किया है. दोनों सगे भाइयों को एक रेयर हेरेडिटरी हार्ट डिजीज थी. दोनों भाई एंड-स्टेज हर्ट फेलियर से जूझ रहे थे. दोनों का इलाज दिल्ली के ओखला स्थित फोर्टिस एस्कॉर्ट्स अस्पताल में सफलतापूर्वक किया गया.
डॉक्टर्स की एक ही टीम ने किया दो भाइयों का हार्ट ट्रांसप्लांट
हालही में जिस छोटे भाई का हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया उसकी उम्र 27 साल है. परिवार को अचानक पता चला कि बेटे को ‘एडवांस डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी' (डीसीएम) नाम की बीमारी है. इस बीमारी में हार्ट की मांसपेशियां बड़ी और कमजोर हो जाती हैं, जिससे वह बहुत ही स्लो ब्लड पंप करता है.
दोनों भाइयों को सेम रेयर बीमारी
अस्पताल ने बताया कि उसके बड़े भाई में भी 16 साल की उम्र में इसी तरह के लक्षण देखने को मिले थे. इलाज के दौरान उसकी हालत बिगड़ने लगी थी. जिसके बाद साल 2015 में उसका हार्ट ट्रांसप्लांट इसी अस्पताल में किया गया था. डॉक्टर्स ने बताया कि उसके छोटे भाई को भी बाद में सांस लेने में तकलीफ होने लगी, वह एक्ससाइज भी ठीक से नहीं कर पा रहा था. हार्ट की बीमारी की वजह से उसे बार-बार अस्पताल में भर्ती होना पड़ता था. लेकिन वह ये नहीं जानता था कि उसे आखिर क्या दिक्कत है. बाद में उसे पता चला कि बड़े भाई को जो बीमारी थी उसे भी वही है.
दिक्कतों को पार कर की गई सर्जरी
अस्पताल ने बताया कि हाल में हुए हार्ट ट्रांसप्लांट में कई तकनीकी चुनौतियां सामने आईं. वजह ये थी कि हार्ट डोनर और लेने वाले की ब्लड वेसल्स के साइज में अंतर था. इस वजह से ऑपरेशन के दौरान स्पेशल सर्जिकल प्रोसेज की जरूरत पड़ी. जिस शख्स ने उसे अपना हार्ट दिया, वह हरियाणा के रोहतक का रहने वाला था. 37 साल के शख्स की मौत मस्तिष्क में रक्तस्राव की वजह से हो गई थी.अस्पताल ने कहा कि यह भारत में पहला ऐसा मामला है जिसमें पारिवारिक ‘कार्डियोमायोपैथी' से पीड़ित दो भाइयों का एक ही अस्पताल में एक ही सर्जिकल टीम ने 11 साल के अंतराल पर सफल हार्ट प्लांट किया है.
इनपुट- भाषा के साथ
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