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महादेव ऑनलाइन बुक केस में ED की बड़ी कार्रवाई,  91.82 करोड़ की संपत्ति की अटैच

ED की जांच में खुलासा हुआ है कि महादेव ऑनलाइन बुक, Skyexchange.com जैसे कई अवैध बेटिंग ऐप्स और वेबसाइट्स के ज़रिए हजारों करोड़ रुपये का काला धन पैदा किया गया.

महादेव ऑनलाइन बुक केस में ED की बड़ी कार्रवाई,  91.82 करोड़ की संपत्ति की अटैच
महादेव बेटिंग एप के खिलाफ ईडी की बड़ी कार्रवाई
नई दिल्ली:

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने महादेव ऑनलाइन बुक और Skyexchange.com से जुड़े अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क पर एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है. इस कार्रवाई के तहत ED ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून यानी PMLA के तहत 91.82 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की है.ED की इस ताज़ा कार्रवाई में 74.28 करोड़ रुपये से ज्यादा की बैंक मनी अटैच की गई है, जो दुबई की दो कंपनियों परफेक्ट प्लान इन्वेस्टमेंट एलएलसी और एग्जिम जनरल ट्रेडिंग के खातों में जमा थीं. ED की जांच में सामने आया है कि ये कंपनियां सौरभ चंद्राकर, अनिल कुमार अग्रवाल और विकास छपरिया से जुड़ी हुई हैं और इनका इस्तेमाल अवैध सट्टेबाजी से कमाए गए पैसे को वैध दिखाने के लिए किया जा रहा था.

इसके अलावा ED ने 17.5 करोड़ रुपये की संपत्तियां भी अटैच की हैं, जो गगन गुप्ता के नाम और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर थीं.गगन गुप्ता, Skyexchange.com के मालिक हरि शंकर तिबरेवाल का करीबी बताया जा रहा है. ED का कहना है कि ये महंगी प्रॉपर्टी और लिक्विड एसेट्स नकद में कमाए गए अवैध पैसों से खरीदे गए थे.

कैसे चलता था अवैध सट्टेबाजी का पूरा खेल

ED की जांच में खुलासा हुआ है कि महादेव ऑनलाइन बुक, Skyexchange.com जैसे कई अवैध बेटिंग ऐप्स और वेबसाइट्स के ज़रिए हजारों करोड़ रुपये का काला धन पैदा किया गया. महादेव ऑनलाइन बुक ऐप को इस तरह डिजाइन किया गया था कि वह अलग-अलग अवैध बेटिंग ऐप्स को ग्राहक उपलब्ध कराए और उनके पैसों का पूरा लेन-देन संभाले.जांच एजेंसी के मुताबिक, ये वेबसाइट्स और ऐप्स जानबूझकर इस तरह से रिग की गई थीं कि आखिर में ग्राहक को नुकसान ही हो.लोगों से करोड़ों रुपये वसूले गए और तय हिस्सेदारी के फॉर्मूले पर रकम बांटी जाती थी.

फर्जी KYC, बेनामी खाते और हवाला नेटवर्क

ED ने पाया कि सट्टेबाजी से आए पैसे को छुपाने के लिए फर्जी और चोरी की गई KYC से बैंक खाते खोले गए.बेनामी खातों के जरिए पैसे को इधर-उधर घुमाया गया, ये रकम न तो टैक्स में दिखाई गई और न ही सरकारी रिकॉर्ड में लाई गई.इतना ही नहीं, अवैध कमाई को हवाला चैनलों, ट्रेड-बेस्ड मनी लॉन्ड्रिंग, और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए विदेश भेजा गया.इसके बाद यही पैसा विदेशी निवेश (FPI) के नाम पर वापस भारत लाकर शेयर बाजार में निवेश किया गया.

30 से 40% कैशबैक स्कैम का भी खुलासा

ED की जांच में एक बेहद चौंकाने वाला कैशबैक स्कीम भी सामने आई है. इसके तहत विदेशी FPI कंपनियां भारतीय कंपनियों में बड़ा निवेश करती थीं और बदले में उन कंपनियों के प्रमोटर्स को 30 से 40 फीसदी रकम नकद वापस करनी पड़ती थी. ED के मुताबिक, गगन गुप्ता को इस तरीके से कम से कम 98 करोड़ रुपये का फायदा हुआ. इसमें Salasar Techno Engineering Ltd. और Tiger Logistics Ltd. जैसी कंपनियों के नाम सामने आए हैं.


अब तक 175 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी

  • करीब 2600 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त, फ्रीज़ या अटैच
  • 13 लोगों की गिरफ्तारी
  • 74 संस्थाओं को आरोपी बनाया गया
  • अब तक 5 चार्जशीट दाखिल की जा चुकी हैं
  • ED का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले समय में इस मामले में और बड़ी कार्रवाई हो सकती है.
लेखक के बारे में
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मुकेश सिंह सेंगर
Associate Editor - Crime & Investigation
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