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This Article is From Feb 10, 2026

अमेरिकी नागरिकों को ठगने वाले फर्जी कॉल सेंटर गैंग पर ED की छापेमारी, 31 बैंक अकाउंट और एक लॉकर फ्रीज

ED ने 4 फरवरी 2026 को अहमदाबाद में अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाने वाले फर्जी कॉल सेंटर रैकेट पर छापेमारी की. कार्रवाई में लगभग 12,000 USD के बराबर क्रिप्टो, 13.5 लाख नकद, दस्तावेज/डिवाइस जब्त हुए और 31 बैंक अकाउंट व एक लॉकर फ्रीज़ किए गए; ठगी की रकम गिफ्ट कार्ड‑क्रिप्टो‑हवाला चैनलों से खपाई जाती थी.

अमेरिकी नागरिकों को ठगने वाले फर्जी कॉल सेंटर गैंग पर ED की छापेमारी, 31 बैंक अकाउंट और एक लॉकर फ्रीज
  • ED ने अहमदाबाद में छह ठिकानों पर छापेमारी कर साइबर फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट का भंडाफोड़ किया
  • आरोपियों ने अमेरिका के नागरिकों को सरकारी एजेंसियों के नाम पर फोन कर अमेज़न गिफ्ट कार्ड और ऑनलाइन भुगतान करवाए
  • ठगी की रकम को अमेजन गिफ्ट कार्ड में इकट्ठा कर बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी में बदला जाता था

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के हैदराबाद जोनल ऑफिस ने एक बड़े साइबर फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट के खिलाफ कार्रवाई की है. ED ने 4 फरवरी 2026 को अहमदाबाद में 6 ठिकानों पर छापेमारी की. यह कार्रवाई उन अवैध कॉल सेंटरों के खिलाफ की गई, जो अमेरिका के नागरिकों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये की ठगी कर रहे थे. ED ने यह जांच साइबराबाद पुलिस और CBI (IOD), नई दिल्ली द्वारा दर्ज FIR के आधार पर शुरू की थी. जांच में सामने आया कि यह रैकेट पूरी तरह संगठित तरीके से संचालित किया जा रहा था, जिसमें फर्जी पहचान, ऑनलाइन ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग शामिल थी.

एक ही गैंग, कई फर्जी कॉल सेंटर

जांच के दौरान ED को पता चला कि मोहम्मद अंसारी उर्फ मोहम्मद इरफान अंसारी, आकिब गुलामरसूल घांची, विकास के निमार, दिव्यांग रावल और प्रदीप वी. राठौड़ अपने साथियों के साथ मिलकर कई अवैध कॉल सेंटर चला रहे थे. ये कॉल सेंटर अलग‑अलग स्थानों से संचालित होते थे, लेकिन सभी एक ही गैंग के नियंत्रण में थे. ED के मुताबिक, इन सभी कॉल सेंटरों में एक जैसी टेक्नोलॉजी, समान ट्रेनिंग सिस्टम, तैयार कॉल स्क्रिप्ट और पैसे के लेन‑देन का एक ही मैकेनिज़्म इस्तेमाल किया जा रहा था.

अमेरिकी एजेंसियों का अधिकारी बनकर करते थे ठगी

इन कॉल सेंटरों से कॉल करने वाले लोग खुद को अमेरिकी सरकारी एजेंसियों या बड़ी प्राइवेट कंपनियों का अधिकारी बताकर फोन करते थे. पीड़ितों को यह कहकर डराया जाता था कि उन पर लोन बकाया है, टैक्स नहीं दिया गया है या उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होने वाली है. डर और दबाव बनाकर पीड़ितों से अमेज़न गिफ्ट कार्ड खरीदवाए जाते थे या ऑनलाइन पेमेंट करवाया जाता था.

क्रिप्टोकरेंसी और हवाला से होती थी मनी लॉन्ड्रिंग

ED की जांच में खुलासा हुआ कि ठगी से हासिल की गई रकम को पहले अमेज़न गिफ्ट कार्ड के रूप में इकट्ठा किया जाता था, जिसे बाद में बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी में बदला जाता था. इसके लिए Paxful जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और अन्य अवैध चैनलों का इस्तेमाल किया गया. जांच में यह भी सामने आया कि इस पूरी प्रक्रिया में कुछ विदेशी नागरिकों की संलिप्तता भी थी. भारत के बैंकिंग सिस्टम से बहुत कम रकम गुज़री, जबकि ज़्यादातर पैसा नकद, क्रिप्टोकरेंसी और हवाला नेटवर्क के ज़रिए खपाया गया.

छापेमारी में क्रिप्टो और नकदी जब्त

छापेमारी के दौरान ED ने मुख्य आरोपी आकिब घांची के पास से करीब 12 हजार अमेरिकी डॉलर के बराबर की क्रिप्टोकरेंसी बरामद की, जिसे ED के क्रिप्टो वॉलेट में ट्रांसफर कर दिया गया. इसके अलावा 13.5 लाख रुपये नकद भी जब्त किए गए. कार्रवाई के दौरान ED को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस भी मिले हैं, जिन्हें जांच के लिए जब्त किया गया है.

31 बैंक अकाउंट और लॉकर फ्रीज

ED ने आरोपियों और उनसे जुड़ी कंपनियों के 31 बैंक अकाउंट और एक बैंक लॉकर को भी फ्रीज कर दिया है. जांच में यह सामने आया है कि आरोपी लंबे समय से इस तरह की धोखाधड़ी में शामिल रहे हैं और उन्होंने ठगी के पैसों से अपने नाम, परिवार के सदस्यों और बेनामी लोगों के नाम पर बड़ी संपत्तियां खड़ी की हैं. प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, यह गैंग अब भी इसी तरह ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहा है. मामले में आगे की जांच जारी है और आने वाले समय में और भी कार्रवाई की जा सकती है.

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